स्पेसएक्स की 14वीं स्टारशिप परीक्षण उड़ान आज

स्टारशिप की 14वीं टेस्ट फ्लाइट आज,पहली कक्षीय उड़ान के साथ 26 स्टारलिंक उपग्रह भी होंगे तैनात

नई दिल्ली,28 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स सोमवार को स्टारशिप रॉकेट की 14वीं परीक्षण उड़ान शुरू करने की तैयारी में है। इस मिशन को कंपनी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि इसमें स्टारशिप को पहली बार कक्षीय उड़ान के उद्देश्य से भेजने का प्रयास किया जाएगा। उड़ान के दौरान अंतरिक्ष यान की क्षमता, उसके ऊपरी चरण, सुपर हेवी बूस्टर, हीट शील्ड और दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। मिशन की सफलता भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे दूरस्थ अभियानों के लिए स्टारशिप को विकसित करने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है।

स्पेसएक्स के मुताबिक,प्रक्षेपण के लिए 75 मिनट की समयावधि सुबह 7 बजकर 15 मिनट से शुरू होने वाली थी। हालाँकि,वास्तविक प्रक्षेपण नियामकीय मंजूरी और अंतिम तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगा। कंपनी अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से इस अभियान का सीधा प्रसारण भी करेगी। इसके लिए लाइव कवरेज प्रक्षेपण से लगभग 30 मिनट पहले शुरू होने की उम्मीद है। स्टारशिप का यह परीक्षण केवल रॉकेट को अंतरिक्ष तक पहुँचाने तक सीमित नहीं होगा,बल्कि इसमें उड़ान के कई महत्वपूर्ण चरणों और नई तकनीकों को परखा जाएगा।

योजना के अनुसार,स्टारशिप को पृथ्वी से करीब 275 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँचाया जाएगा। इसके बाद अंतरिक्ष यान लगभग छह चक्कर लगाने और करीब 10 घंटे तक उड़ान भरने का प्रयास करेगा। मिशन के निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, उड़ान के अंतिम चरण में स्टारशिप को नियंत्रित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापस लाया जाएगा। इसके बाद चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर में तय क्षेत्र के भीतर समुद्र में उतरने का प्रयास किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अंतरिक्ष यान की संरचना, इंजन, संचार प्रणाली और तापरोधी सुरक्षा की क्षमता पर नजर रहेगी।

इस मिशन का एक प्रमुख हिस्सा स्टारलिंक उपग्रहों की तैनाती भी है। चरण अलग होने के बाद स्टारशिप के ऊपरी हिस्से से अगली पीढ़ी के 26 स्टारलिंक वी3 उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना है। इन उपग्रहों की तैनाती से स्पेसएक्स के उपग्रह नेटवर्क की क्षमता में लगभग 26 टेराबिट प्रति सेकंड की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। कंपनी के लिए यह तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी,क्योंकि बताई गई क्षमता एक सामान्य फाल्कन-9 प्रक्षेपण की क्षमता से करीब 10 गुना अधिक है। इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर उपग्रहों को एक साथ अंतरिक्ष में भेजने की स्टारशिप की क्षमता का भी प्रदर्शन होगा।

उपग्रहों की तैनाती के बाद स्टारशिप अपने एक रैप्टर इंजन की मदद से अंतरिक्ष में डी-ऑर्बिट बर्न करने का प्रयास करेगा। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष यान को निर्धारित प्रक्षेप पथ पर लाकर पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश कराना होगा। वायुमंडल में प्रवेश के दौरान स्टारशिप को अत्यधिक ताप और घर्षण का सामना करना पड़ेगा। इसी कारण इस मिशन में उसकी हीट शील्ड यानी तापरोधी सुरक्षा प्रणाली का परीक्षण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सफल पुनः प्रवेश और समुद्र में नियंत्रित लैंडिंग स्टारशिप के भविष्य के पुन: उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकती है।

मिशन में केवल स्टारशिप के ऊपरी चरण की ही परीक्षा नहीं होगी। सुपर हेवी बूस्टर के कई प्रमुख चरणों को भी परखा जाएगा। इसमें प्रक्षेपण के दौरान बूस्टर का प्रदर्शन,दोनों चरणों के अलग होने की प्रक्रिया और इसके बाद अंतिम लैंडिंग बर्न शामिल है। योजना के मुताबिक सुपर हेवी बूस्टर को मैक्सिको की खाड़ी में निर्धारित समुद्री क्षेत्र की ओर ले जाकर वहाँ नियंत्रित लैंडिंग का प्रयास किया जाएगा। इस परीक्षण से यह समझने में मदद मिलेगी कि बूस्टर भविष्य में कितनी प्रभावी ढंग से वापस लौट सकता है और दोबारा इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकता है।

यह उड़ान ऐसे समय हो रही है,जब स्पेसएक्स ने पिछली परीक्षण उड़ानों से मिली तकनीकी जानकारियों के आधार पर स्टारशिप के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में कई बदलाव किए हैं। इन बदलावों का एक उद्देश्य इंजन से जुड़ी उन समस्याओं को कम करना है, जिनमें बर्फ बनने के कारण इंजन के प्रदर्शन पर असर पड़ा था। 13वीं परीक्षण उड़ान के दौरान इसी तरह की तकनीकी समस्या के चलते बूस्टबैक मैन्युवर को निर्धारित समय से पहले समाप्त करना पड़ा था। नई उड़ान में कंपनी यह जाँचना चाहती है कि किए गए बदलाव इन समस्याओं को कितनी प्रभावी ढंग से दूर करते हैं।

स्टारशिप की हीट शील्ड में भी कई बदलावों का परीक्षण किया जा रहा है। इनमें अधिक मजबूत टाइल माउंटिंग,घुमावदार डिजाइन वाली हीट-शील्ड टाइल्स और बेहतर प्लाज्मा शील्डिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं। अंतरिक्ष यान के पुन: उपयोग के लिए हीट शील्ड की मजबूती बेहद महत्वपूर्ण है,क्योंकि प्रत्येक उड़ान के बाद उसे पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान अत्यधिक तापमान का सामना करना पड़ता है।

इस परीक्षण में एक और खास प्रयोग किया जाएगा। शिप-41 में शिप-40 से हटाई गई दो दोबारा इस्तेमाल की गई हीट-शील्ड टाइल्स लगाई जाएँगी। इसे स्टारशिप के लिए पुन: इस्तेमाल किए जा सकने वाले तापरोधी सुरक्षा तंत्र की शुरुआती परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। यदि यह तकनीक सफल रहती है,तो भविष्य में स्टारशिप के रखरखाव और दोबारा उड़ान भरने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

स्टारशिप कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य एक ऐसे विशाल और पूरी तरह या बड़े हिस्से में पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष परिवहन तंत्र को विकसित करना है,जिसका इस्तेमाल पृथ्वी की कक्षा में बड़े पेलोड पहुँचाने के साथ-साथ भविष्य के चंद्र और मंगल अभियानों में भी किया जा सके। 14वीं परीक्षण उड़ान के दौरान कंपनी एक साथ कई तकनीकों को परख रही है। इसलिए इस अभियान के दौरान केवल यह देखना महत्वपूर्ण नहीं होगा कि रॉकेट अंतरिक्ष तक पहुँचता है या नहीं,बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उसके विभिन्न चरण निर्धारित परिस्थितियों में कितनी सटीकता से काम करते हैं और वापसी के दौरान अंतरिक्ष यान किस तरह प्रदर्शन करता है। मिशन से मिलने वाले आंकड़े स्टारशिप की अगली उड़ानों के डिजाइन,सॉफ्टवेयर और संचालन में आगे के बदलावों का आधार बन सकते हैं।