टोयोटा,28 सितंबर (युआईटीवी)- भारत की युवा निशानेबाज ईशा सिंह ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीत लिया। सोमवार को हुए इस रोमांचक फाइनल में ईशा ने बेहद दबाव वाले मुकाबले के दौरान शानदार मानसिक मजबूती और एकाग्रता का परिचय दिया। प्रतियोगिता के दौरान उन्हें कई बार शूट-ऑफ की कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा,लेकिन उन्होंने हर चुनौती का डटकर सामना किया और अंत तक पदक की दौड़ में बनी रहीं। आखिरकार चीन की जिओ जियारुइक्सुआन से कड़े मुकाबले के बाद ईशा को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।
यह एशियन गेम्स में ईशा सिंह का तीसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने हांग्जो में आयोजित 2023 एशियन गेम्स में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल की व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल किया था। अब 25 मीटर पिस्टल में रजत पदक जीतकर उन्होंने एशियाई स्तर पर अपनी निरंतरता को एक बार फिर साबित किया है। खास बात यह रही कि फाइनल में जगह बनाने के दौरान ईशा का प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा था,लेकिन मेडल राउंड में उन्होंने पूरी तरह अलग अंदाज में वापसी की।
ईशा ने क्वालिफिकेशन में 580-22एक्स का स्कोर हासिल किया और आठवें स्थान पर रहते हुए बड़ी मुश्किल से फाइनल में जगह बनाई थी। ऐसे में फाइनल से पहले उनके लिए चुनौती काफी बड़ी थी। हालाँकि, जैसे ही मेडल राउंड शुरू हुआ,भारतीय निशानेबाज ने क्वालिफिकेशन के संघर्ष को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने फाइनल की शुरुआत अपने पहले पाँच शॉट्स में पांचों निशाने सटीक लगाकर की। उनकी इस शुरुआत ने उन्हें शुरुआती दौर में शीर्ष निशानेबाजों के साथ मुकाबले में बनाए रखा।
फाइनल के शुरुआती चरण में मुकाबला बेहद कड़ा रहा। चीन की जिओ जियारुइक्सुआन लगातार बेहतरीन सीरीज के साथ बढ़त बनाने में सफल रहीं। वहीं उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए पदक की दौड़ में बनी हुई थीं। ईशा के लिए हर सीरीज बेहद महत्वपूर्ण थी,क्योंकि एक छोटी सी गलती भी उन्हें पदक की दौड़ से बाहर कर सकती थी। एलिमिनेशन राउंड में उन्हें एक समय मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा, जब तीन हिट के बाद उनकी स्थिति नीचे खिसक गई।
इसके बावजूद ईशा ने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने तुरंत वापसी करते हुए 5 में से 5 निशाने सटीक लगाए और खुद को फिर से मुकाबले में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया। उनकी इस वापसी ने यह दिखाया कि वह दबाव की परिस्थितियों में अपने प्रदर्शन को नियंत्रित करने की क्षमता रखती हैं। इसके बाद वियतनाम की ट्रिन्ह थू विन्ह के बाहर होने के साथ ही ईशा का पदक पक्का हो गया। लेकिन भारतीय निशानेबाज के लिए मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ था,क्योंकि उन्हें आगे पदक के रंग के लिए एक और कठिन चुनौती का सामना करना था।
ब्रॉन्ज मेडल के लिए ईशा सिंह और उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। दोनों निशानेबाज 34 हिट्स पर बराबरी पर थीं। ऐसे में फैसला शूट-ऑफ से होना था। शूट-ऑफ में दोनों ने शुरुआत में तीन-तीन हिट हासिल किए, जिसके बाद मुकाबला फिर बराबरी पर पहुँच गया। इस दौरान एक तकनीकी रुकावट ने तनाव को और बढ़ा दिया। रुकावट के बाद मुकाबला सिंगल-शॉट शूट-ऑफ के रूप में आगे बढ़ा।
ऐसे बेहद दबाव वाले क्षण में ईशा ने अपनी एकाग्रता बनाए रखी और निर्णायक स्थिति में बेहतर प्रदर्शन करते हुए किम को पीछे छोड़ दिया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल की स्थिति पक्की कर ली और गोल्ड मेडल के लिए चीन की जिओ जियारुइक्सुआन के खिलाफ मुकाबला करने का अधिकार हासिल कर लिया। इस स्तर तक पहुँचना ही ईशा के लिए बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि उन्होंने फाइनल की शुरुआत आठवें स्थान के क्वालिफायर के तौर पर की थी।
गोल्ड मेडल के लिए ईशा और जिओ के बीच मुकाबला भी बेहद रोमांचक रहा। दोनों निशानेबाजों के बीच अंतर लगातार कम रहा। एक समय दोनों के बीच केवल एक हिट का अंतर था। इसके बाद ईशा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चार हिट हासिल किए और मुकाबले को फिर शूट-ऑफ तक पहुँचा दिया। दोनों खिलाड़ियों ने एक बार फिर चार-चार हिट लगाए। इससे मुकाबला एक और निर्णायक शूट-ऑफ में चला गया और तनाव अपने चरम पर पहुँच गया।
निर्णायक शूट-ऑफ में ईशा ने दो हिट लगाए, जबकि जिओ जियारुइक्सुआन तीन हिट हासिल करने में सफल रहीं। इसी के साथ चीन की निशानेबाज ने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया और ईशा को सिल्वर मेडल मिला। हालाँकि, ईशा का प्रदर्शन किसी भी लिहाज से कम प्रभावशाली नहीं रहा। उन्होंने पूरे फाइनल में लगातार दबाव झेला, कई बार शूट-ऑफ की स्थिति का सामना किया और हर बार खुद को मुकाबले में बनाए रखा।
ईशा का कुल स्कोर 38 हिट तक पहुँचा। यह प्रदर्शन हांग्जो एशियन गेम्स 2023 में चीन की लियू रुई द्वारा बनाए गए 38 हिट के गेम्स रिकॉर्ड के बराबर रहा। इस तरह ईशा ने अपने प्रदर्शन से न सिर्फ सिल्वर मेडल हासिल किया,बल्कि एशियन गेम्स के मौजूदा रिकॉर्ड की बराबरी भी की। उनके लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने क्वालिफिकेशन में आठवें स्थान से शुरुआत करने के बाद फाइनल में पदक जीतने तक का सफर तय किया।
ईशा सिंह की उपलब्धियों में पिछले कुछ समय में लगातार इजाफा हुआ है। महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में उनके नाम विश्व रिकॉर्ड भी दर्ज है। मई में म्यूनिख वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने 43 हिट का शानदार प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के बाद वह इस स्पर्धा में विश्व नंबर एक रैंकिंग पर भी पहुँचीं थीं। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।
ईशा का यह पदक भारतीय शूटिंग दल के लिए एक उतार-चढ़ाव भरे दिन के बाद आया। महिलाओं की टीम फाइनल में भारत को निराशा का सामना करना पड़ा था। टीम में दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर, ईशा सिंह और कई बार एशियन गेम्स में पदक जीत चुकीं राही सरनोबत शामिल थीं। भारतीय टीम ने प्रिसिजन और रैपिड इवेंट्स को मिलाकर 1727-56एक्स का स्कोर बनाया और पाँचवें स्थान पर रही।
टीम स्पर्धा में एक जरूरी टारगेट चूकने के कारण भारतीय टीम पदक से दूर रह गई। इसके बाद व्यक्तिगत 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में ईशा का प्रदर्शन भारत के लिए राहत लेकर आया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हुए एक के बाद एक चुनौती पार की और अंत में सिल्वर मेडल अपने नाम किया।
एशियन गेम्स 2026 में ईशा सिंह की यह उपलब्धि भारतीय निशानेबाजी के लिए भी महत्वपूर्ण है। खासकर जिस तरह उन्होंने क्वालिफिकेशन में आठवें स्थान से फाइनल में प्रवेश करने के बाद पदक हासिल किया,वह उनके संघर्ष और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता को दर्शाता है। फाइनल में कई बार शूट-ऑफ की स्थिति बनने के बावजूद उन्होंने अपना संतुलन नहीं खोया।
ईशा सिंह के लिए यह सिल्वर मेडल उनके एशियन गेम्स सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। हांग्जो में दो सिल्वर मेडल जीतने के बाद अब 25 मीटर पिस्टल में रजत पदक हासिल कर उन्होंने एशियाई खेलों में अपनी पदक संख्या बढ़ा ली है। चीन की जिओ जियारुइक्सुआन ने भले ही गोल्ड मेडल अपने नाम किया,लेकिन ईशा ने जिस तरह से फाइनल में संघर्ष किया और आखिरी क्षण तक मुकाबले को जीवित रखा,वह उनके प्रदर्शन की खासियत रही।
भारतीय निशानेबाजी में युवा प्रतिभाओं की मजबूत मौजूदगी के बीच ईशा सिंह लगातार अपने प्रदर्शन से अलग पहचान बना रही हैं। विश्व रिकॉर्ड और विश्व नंबर एक रैंकिंग के बाद अब एशियन गेम्स का सिल्वर मेडल उनके अंतर्राष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों में एक और बड़ी कामयाबी बन गया है। सोमवार को शूटिंग रेंज में कई उतार-चढ़ाव के बीच ईशा ने जिस संयम और दृढ़ता के साथ मुकाबला किया, उसने भारत के खाते में एक और पदक जोड़ दिया।
