नई दिल्ली,29 सितंबर (युआईटीवी)- एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने अंतरिक्ष अभियान के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी का विशाल अंतरिक्ष यान स्टारशिप सोमवार को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में पहुँचा और मिशन के दौरान 26 अगली पीढ़ी के स्टारलिंक वी3 उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में तैनात किया गया। इस सफलता को पूरी तरह पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में इसी तकनीक के जरिए चंद्रमा और मंगल ग्रह से जुड़े महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष अभियानों को अंजाम देना है।
यह मिशन पूरी तरह चुनौतीमुक्त नहीं रहा। उड़ान के दौरान स्टारशिप के छह रैप्टर वैक्यूम इंजनों में से एक इंजन बंद हो गया। इंजन में आई इस समस्या के बाद कुछ समय के लिए मिशन कंट्रोल टीम के सामने स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई। हालाँकि,इंजीनियरों ने बाकी इंजनों के प्रदर्शन और यान की स्थिति का आकलन किया और मिशन को जारी रखने का फैसला किया। शेष इंजनों के सामान्य प्रदर्शन के चलते स्टारशिप अपनी निर्धारित उड़ान जारी रखने में सफल रहा और पृथ्वी की कक्षा तक पहुँच गया।
स्पेसएक्स के अनुसार,स्टारशिप इस मिशन के दौरान करीब 10 घंटे तक अंतरिक्ष में रहेगा। इस दौरान यान पृथ्वी की लगभग छह परिक्रमाएं पूरी करेगा। मिशन के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, उड़ान के अंतिम चरण में स्टारशिप चिली के पश्चिम में प्रशांत महासागर में नियंत्रित लैंडिंग यानी स्प्लैशडाउन करेगा। इस तरह मिशन का उद्देश्य केवल उपग्रहों की तैनाती तक सीमित नहीं है,बल्कि स्टारशिप की लंबी अवधि की अंतरिक्ष उड़ान और नियंत्रित वापसी से जुड़ी क्षमताओं का परीक्षण भी इसमें शामिल है।
इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक नई पीढ़ी के 26 स्टारलिंक वी3 उपग्रहों की सफल तैनाती है। स्पेसएक्स ने बताया कि सभी 26 उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया गया है और वे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। कंपनी के लिए यह कदम स्टारलिंक नेटवर्क की अगली पीढ़ी की क्षमता को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्टारलिंक वी3 उपग्रहों को पहले की पीढ़ी के उपग्रहों की तुलना में अधिक क्षमता और बेहतर प्रदर्शन के लिए डिजाइन किया गया है। स्पेसएक्स के अनुसार, प्रत्येक वी3 उपग्रह 1 टेराबिट प्रति सेकंड तक की डाउनलिंक क्षमता और 160 गीगाबिट प्रति सेकंड तक की अपलिंक क्षमता उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। कंपनी के दावे के मुताबिक, यह वी2 उपग्रहों की तुलना में डाउनलिंक क्षमता में करीब 10 गुना और अपलिंक क्षमता में लगभग 22 गुना वृद्धि है।
इन उपग्रहों की तैनाती के बाद वे अपने एंटेना खोलेंगे और सौर पैनलों का विस्तार करेंगे। इसके बाद रेडियो फ्रीक्वेंसी तथा लेजर लिंक के जरिए ग्राउंड स्टेशनों और स्टारलिंक नेटवर्क के अन्य हिस्सों से संपर्क स्थापित किया जाएगा। उपग्रहों को इसके बाद अपने ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स की मदद से धीरे-धीरे निर्धारित परिचालन कक्षा तक पहुँचाया जाएगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद उपग्रह स्टारलिंक के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा बनकर इंटरनेट सेवा को बेहतर बनाने में योगदान देंगे।
स्पेसएक्स का कहना है कि वी3 उपग्रहों की बेहतर क्षमता के पीछे कंपनी की अगली पीढ़ी की बीमफॉर्मिंग चिप्स तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह तकनीक नेटवर्क में अलग-अलग डेटा बीम के बीच ट्रैफिक को अधिक कुशल तरीके से संचालित करने में मदद करती है। कंपनी के मुताबिक,इस तकनीक के इस्तेमाल से पिछले सिस्टम की तुलना में मॉडेम थ्रूपुट क्षमता को 64 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
इसका सीधा असर इंटरनेट नेटवर्क की क्षमता और डेटा ट्रांसफर पर पड़ सकता है। स्पेसएक्स के अनुसार,नई तकनीक की मदद से ऐसे क्षेत्रों में भी बेहतर इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी,जहाँ नेटवर्क की माँग बहुत अधिक है। घनी आबादी वाले शहरों के अलावा दूरदराज के इलाकों और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में भी स्टारलिंक की सेवा को मजबूत करने का लक्ष्य है।
नई पीढ़ी के उपग्रहों की एक अहम विशेषता नेटवर्क की माँग के अनुसार क्षमता को अधिक प्रभावी तरीके से समायोजित करने की क्षमता होगी। इसका मतलब है कि जिन क्षेत्रों में इंटरनेट ट्रैफिक अधिक होगा,वहाँ नेटवर्क संसाधनों को अधिक कुशलता से इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे एक ही समय में बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
स्टारलिंक नेटवर्क पहले से ही दुनिया के कई हिस्सों में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा उपलब्ध करा रहा है। नए वी3 उपग्रहों की तैनाती के साथ कंपनी नेटवर्क की क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अधिक क्षमता वाले उपग्रहों का इस्तेमाल भविष्य में डेटा ट्रैफिक बढ़ने के साथ नेटवर्क पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में भी किया जा सकता है।
वहीं, स्टारशिप की सफलता स्पेसएक्स के व्यापक अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है। कंपनी एक ऐसी प्रक्षेपण प्रणाली विकसित करने पर काम कर रही है, जिसमें रॉकेट और अंतरिक्ष यान को बार-बार इस्तेमाल किया जा सके। यदि यह तकनीक पूरी तरह विकसित और परिचालन स्तर पर सफल होती है,तो भविष्य में बड़े पैमाने पर उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने और अंतरिक्ष अभियानों की लागत तथा संचालन प्रक्रिया में बदलाव की संभावना है।
स्टारशिप को भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह से जुड़े अभियानों के लिए भी इस्तेमाल करने की योजना है। इसके लिए यान को भारी सामान और अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी दूरी तक ले जाने तथा मिशन पूरा होने के बाद वापस लौटने की क्षमता विकसित करनी होगी। मौजूदा मिशन में कक्षा तक पहुँचना,उपग्रहों की तैनाती करना और निर्धारित तरीके से पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी करना इसी व्यापक विकास प्रक्रिया का हिस्सा है।
हालाँकि,उड़ान के दौरान एक रैप्टर वैक्यूम इंजन का बंद होना यह भी दिखाता है कि इतनी जटिल प्रणाली के संचालन में तकनीकी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इसके बावजूद मिशन टीम ने उपलब्ध प्रणोदन क्षमता और यान की स्थिति का आकलन करते हुए उड़ान जारी रखी। अब मिशन के बाकी चरणों और स्टारशिप की नियंत्रित वापसी से मिलने वाले आँकड़े भविष्य की उड़ानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
स्पेसएक्स के लिए यह मिशन इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें एक ही उड़ान के दौरान स्टारशिप की कक्षीय क्षमता और नई पीढ़ी के स्टारलिंक उपग्रहों की तैनाती दोनों का प्रदर्शन हुआ। 26 वी3 उपग्रहों के सफल संचालन से कंपनी को अपने वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क को अगले स्तर तक ले जाने में मदद मिल सकती है। वहीं स्टारशिप के प्रदर्शन से भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक तकनीक को परखने का अवसर मिला है। इस तरह मिशन ने पुन: उपयोग योग्य अंतरिक्ष प्रणाली और तेज गति से बढ़ते उपग्रह इंटरनेट नेटवर्क,दोनों क्षेत्रों में स्पेसएक्स की योजनाओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
