वाशिंगटन,29 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और बातचीत शुरू करने के ईरान के हालिया प्रस्ताव को खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि तेहरान बातचीत शुरू होने से पहले ही बड़ी रियायतें चाहता था।
अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए वाल्ट्ज ने कहा कि ईरान चाहता था कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाए, प्रतिबंधों में ढील दे और ईरान की फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्ति तक तुरंत पहुँच दे। वाल्ट्ज के अनुसार,वाशिंगटन ने इन मांगों को अस्वीकार्य माना क्योंकि तेहरान ठोस बातचीत पर लौटने से पहले ही रियायतें माँग रहा था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सात दिन का एक रोडमैप प्रस्तावित किया था, जिसके तहत अगर वाशिंगटन तेहरान की शर्तें मान लेता,तो होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता था और परमाणु वार्ता फिर से शुरू की जा सकती थी। इस प्रस्ताव में ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करने और व्यापक क्षेत्रीय युद्धविराम की भी मांग की गई थी।
वाल्ट्ज ने इस प्रस्ताव को बातचीत से पहले रियायतें हासिल करने की एक “मतलबी” कोशिश बताया। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन को इस बात पर बहुत कम भरोसा था कि ईरान अपने वादों को पूरा करेगा,खासकर पिछली कूटनीतिक कोशिशों के विफल होने के बाद।
ट्रंप ने खुद कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उनका तर्क था कि ईरान इसलिए डील करना चाहता है क्योंकि उस पर भारी दबाव है। उन्होंने कहा कि वह समझौते के लिए तैयार हैं,लेकिन तेहरान की मौजूदा शर्तें उन्हें मंज़ूर नहीं हैं।
ईरान ने अपने प्रस्ताव के बारे में वॉशिंगटन के नज़रिए पर आपत्ति जताई है। अराघची ने कहा कि तेहरान की शर्तों का मकसद बातचीत के लिए आधार तैयार करना था और उनका तर्क था कि इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अभी तक राजनयिक मध्यस्थों के ज़रिए कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य इस विवाद के केंद्र में है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा शिपमेंट का एक अहम रास्ता है। इसमें लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट का असर तेल की सप्लाई, शिपिंग और ऊर्जा की कीमतों पर पड़ता है।
ट्रंप के इनकार के बावजूद,अमेरिका और ईरान के अधिकारी मध्यस्थों के ज़रिए कूटनीति की गुंजाइश बनाए हुए हैं। कतर और दूसरे मध्यस्थों के साथ हालिया बातचीत से संकेत मिलता है कि बातचीत जारी रह सकती है,हालाँकि,दोनों पक्ष इस बात पर बंटे हुए हैं कि कौन सी रियायतें पहले दी जानी चाहिए।
फिलहाल,असहमति इस बात पर है कि कौन सा कदम पहले उठाया जाए: तेहरान चाहता है कि जलमार्ग को फिर से खोलने और बातचीत शुरू करने से पहले अहम प्रतिबंधों और नाकेबंदी से जुड़े उपायों पर ध्यान दिया जाए,जबकि वॉशिंगटन बड़ी रियायतें देने से पहले ईरान से ज़्यादा ठोस वादे चाहता है।
