वॉशिंगटन,29 सितंबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय कारोबारी समूह एस्सार ग्रुप की अमेरिकी इकाई मेसाबी मेटालिक्स के बड़े स्टील प्रोजेक्ट की घोषणा की है। कंपनी आयोवा राज्य में करीब 15 अरब डॉलर यानी लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपये के निवेश से एक विशाल स्टील प्लांट विकसित कर रही है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एस्सार ग्रुप के सह-संस्थापक रवि रुइया और मेसाबी मेटालिक्स के चेयरमैन रेवंत रुइया की मौजूदगी में इस परियोजना का ऐलान किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बताया है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मेसाबी मेटालिक्स आयोवा में अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा स्टील प्लांट बनाने जा रही है। उन्होंने इसे अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े स्टील संयंत्रों में शामिल होने वाली परियोजना बताया। इस घोषणा के साथ अमेरिकी प्रशासन ने घरेलू विनिर्माण,स्टील उत्पादन और कच्चे माल की आपूर्ति को देश के भीतर मजबूत करने की दिशा में इस निवेश को महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में पेश किया है।
मेसाबी मेटालिक्स का आयोवा प्रोजेक्ट फिलहाल निर्माण के चरण में है। कंपनी की योजना करीब 2030 के आसपास यहाँ स्टील उत्पादन शुरू करने की है। परियोजना के पहले चरण में हर साल लगभग 7.5 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करने की क्षमता विकसित की जाएगी। इसके बाद उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर करीब 10 मिलियन टन सालाना करने की योजना है। इस क्षमता के साथ यह संयंत्र अमेरिका के स्टील उद्योग में बड़े उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
इस परियोजना की एक खास बात इसका एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला मॉडल है। स्टील उत्पादन के लिए आवश्यक आयरन ओर कंपनी की अपनी खदान से उपलब्ध कराया जाएगा। यह खदान मिनेसोटा में स्थित है। यानी परियोजना में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा माल अमेरिका में ही निकाला जाएगा और फिर उसे देश के भीतर ही आगे की प्रक्रिया से गुजरकर स्टील में बदला जाएगा। अमेरिकी प्रशासन इस मॉडल को घरेलू स्टील आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देख रहा है।
एस्सार ग्रुप पहले से ही अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में आयरन-ओर कारोबार में बड़ा निवेश कर रहा है। उसकी इकाई मेसाबी मेटालिक्स ने वहां एक नई आयरन-ओर माइन विकसित की है। कंपनी के अनुसार,यह परियोजना अमेरिका में करीब पाँच दशक के बाद विकसित की गई नई आयरन-ओर खदान के तौर पर महत्वपूर्ण है। मिनेसोटा की इस परियोजना में अब तक 2.5 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया जा चुका है।
मिनेसोटा की खदान और आयोवा के प्रस्तावित स्टील प्लांट के बीच सीधा संबंध इस परियोजना के कारोबारी मॉडल का अहम हिस्सा है। खदान से निकाला जाने वाला आयरन-ओर आयोवा स्थित स्टील संयंत्र में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे कच्चे माल की उपलब्धता से लेकर स्टील उत्पादन तक एक ऐसी आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने की कोशिश की जा रही है,जिसके अधिकांश प्रमुख चरण अमेरिका के भीतर ही पूरे हों।
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार,इस परियोजना का असर रोजगार के स्तर पर भी दिखाई दे सकता है। व्हाइट हाउस का अनुमान है कि आयोवा में स्टील प्लांट के निर्माण के दौरान करीब 6,000 तक नौकरियाँ पैदा हो सकती हैं। प्लांट के संचालन में आने के बाद लगभग 1,750 से 2,000 स्थायी रोजगार उपलब्ध होने का अनुमान है। इन नौकरियों में स्टील विनिर्माण के साथ-साथ खनन और उससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों के लिए अवसर शामिल होंगे।
सरकार ने इस परियोजना के संभावित व्यापक आर्थिक प्रभाव का भी अनुमान लगाया है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक,निर्माण अवधि और शुरुआती 10 वर्षों के संचालन को मिलाकर यह परियोजना अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर करीब 95 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव डाल सकती है। हालाँकि,यह आँकड़ा सरकार का अनुमान है और इसे अभी हासिल हो चुका वास्तविक आर्थिक लाभ नहीं माना जा सकता। परियोजना के निर्माण, उत्पादन, रोजगार और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के आधार पर यह अनुमान तैयार किया गया है।
आयोवा में प्रस्तावित निवेश ऐसे समय में सामने आया है,जब अमेरिकी सरकार घरेलू स्टील उद्योग को बढ़ावा देने और विदेशी स्टील पर निर्भरता कम करने के लिए कई नीतिगत कदम उठा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्टील आयात पर ऊँचे शुल्क लगाए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन शुल्कों का उद्देश्य घरेलू कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने और अमेरिका में नई औद्योगिक क्षमता विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने भी मेसाबी मेटालिक्स के निवेश के संदर्भ में ट्रंप की स्टील टैरिफ नीति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्टील आयात पर लगाए गए ऊँचे शुल्क ने अमेरिका में घरेलू स्टील उत्पादन के लिए कारोबारी माहौल को बदला है। लटनिक के अनुसार,इसी नीति ने कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
लटनिक ने यहाँ तक दावा किया कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप की स्टील टैरिफ नीति लागू नहीं होती,तो एस्सार ग्रुप अमेरिका में इस स्टील परियोजना में निवेश नहीं करता। यह अमेरिकी प्रशासन का दावा है और परियोजना में निवेश के पीछे कंपनी के सभी कारोबारी कारणों को इससे अलग करके देखना जरूरी है। स्टील की कीमतें, घरेलू माँग, कच्चे माल की उपलब्धता, परिवहन लागत, सरकारी नीतियाँ और दीर्घकालिक बाजार संभावनाएँ जैसे कई कारक किसी बड़े औद्योगिक निवेश के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।
मेसाबी मेटालिक्स का आयोवा प्रोजेक्ट एस्सार ग्रुप की अमेरिका में औद्योगिक मौजूदगी को भी विस्तार देगा। मिनेसोटा में आयरन-ओर उत्पादन और आयोवा में स्टील निर्माण को जोड़कर कंपनी अमेरिका में कच्चे माल से तैयार उत्पाद तक की एक बड़ी औद्योगिक श्रृंखला विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी के लिए यह निवेश अमेरिकी बाजार में लंबे समय की मौजूदगी और स्टील क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इस परियोजना का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्टील उत्पादन के लिए जरूरी प्रमुख कच्चे माल का स्रोत और उत्पादन संयंत्र दोनों अमेरिका में होंगे। इससे घरेलू स्तर पर कच्चे माल की उपलब्धता, प्रसंस्करण और तैयार स्टील के उत्पादन को एक साथ जोड़ने में मदद मिल सकती है। अमेरिकी प्रशासन के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं में होने वाले बदलावों के बीच अमेरिका अपने रणनीतिक उद्योगों में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
परियोजना की घोषणा भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी और औद्योगिक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। भारतीय कंपनी द्वारा अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर निवेश से यह संकेत मिलता है कि भारतीय कारोबारी समूह अमेरिकी बाजार में उत्पादन क्षमता विकसित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने में रुचि रखते हैं। हालाँकि,परियोजना का वास्तविक प्रभाव निर्माण पूरा होने और उत्पादन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
मेसाबी मेटालिक्स का लक्ष्य करीब 2030 के आसपास आयोवा संयंत्र से स्टील उत्पादन शुरू करना है। पहले चरण में 7.5 मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता और बाद में इसे 10 मिलियन टन तक बढ़ाने की योजना है। ऐसे में परियोजना के अगले कुछ वर्षों में निर्माण, निवेश और क्षमता विकास से जुड़े कई चरण देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल अमेरिकी प्रशासन और एस्सार ग्रुप दोनों ने इसे बड़े औद्योगिक निवेश के रूप में पेश किया है,जिसमें खनन से लेकर स्टील उत्पादन तक की पूरी श्रृंखला को अमेरिका में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
