नई दिल्ली,30 सितंबर (युआईटीवी)- नई दिल्ली में बुधवार को इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच सत्तारूढ़ एनडीए के नेताओं ने विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। बैठक में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर, ईवीएम, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों ने चर्चा की। वहीं, एनडीए नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इंडिया ब्लॉक की एकजुटता और उसकी राजनीतिक दिशा पर सवाल उठाए। विपक्षी दलों की बैठक और उसके एजेंडे की जानकारी पहले से सार्वजनिक थी और इसमें चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने पर चर्चा होनी थी।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन बिखर चुका है और उसमें एकता नहीं रह गई है। उन्होंने इसे ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए कहा कि देश ने पहले भी इसके जुड़ने और फिर बिखरने का दृश्य देखा है। मौर्य ने विपक्ष के चुनाव आयोग और ईवीएम से जुड़े आरोपों पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक,जब विपक्ष चुनाव जीतता है तो ईवीएम और चुनावी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाता,लेकिन हार के बाद इन्हीं संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराया जाता है। उनके इस बयान का संदर्भ उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा, जहां विपक्षी दलों के बीच चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा तेज है।
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने भी इंडिया ब्लॉक की बैठक को लेकर विपक्षी दलों के बीच तालमेल पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं का अपना-अपना एजेंडा है और यह स्पष्ट नहीं है कि कौन कब गठबंधन के साथ खड़ा होगा और कौन किस मुद्दे पर अलग रुख अपनाएगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच राजनीतिक संबंधों को लेकर भी टिप्पणी की। इसके विपरीत उन्होंने एनडीए के बारे में दावा किया कि उसके सहयोगी दल लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं और आपसी समन्वय के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने चुनावी हार के बाद विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर सवाल उठाने को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जो नेता चुनाव में जनता का समर्थन हासिल नहीं कर पाते,वे अपनी हार का कारण चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को बताने लगते हैं। हुसैन ने चुनाव आयोग को संवैधानिक संस्था बताते हुए कहा कि वह अपना काम कर रहा है। उन्होंने इंडिया ब्लॉक की संगठनात्मक संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस गठबंधन का कोई स्थायी कार्यालय, संयोजक,अध्यक्ष या अध्यक्षीय ढाँचा नहीं है। उन्होंने विपक्षी बैठक को लेकर कटाक्ष करते हुए इसे कभी-कभार होने वाली बैठक बताया।
भाजपा सांसद भोला सिंह ने ईवीएम को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद और विभिन्न राज्यों में कांग्रेस की सरकारें उसी चुनावी व्यवस्था के जरिए चुनी गई हैं,जिस पर अब विपक्ष सवाल उठा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी के रायबरेली से लोकसभा चुनाव जीतने का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ईवीएम पर भरोसा नहीं है,तो उसी व्यवस्था के माध्यम से चुनाव जीतने वाले नेताओं की स्थिति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका तर्क था कि चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय विपक्ष को अपने राजनीतिक प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए।
केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने कहा कि विपक्षी दल चाहे जितनी बैठकें कर लें,सरकार अपने काम पर ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि जनता राजनीतिक दलों के बयानों और उनके कामकाज को देख रही है। उनके मुताबिक,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और विपक्ष की बैठकों से सरकार की नीतियों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संदर्भ में इंडिया ब्लॉक की स्थिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार उस गठबंधन से अलग हो चुके हैं,जिसके गठन की प्रक्रिया में उन्होंने खुद भूमिका निभाई थी। ठाकुर के अनुसार, उस समय नीतीश कुमार को गठबंधन का संयोजक बनाने की चर्चा हुई थी,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने एनडीए के साथ जाने का फैसला किया। ठाकुर ने कहा कि अब नीतीश कुमार के पुराने गठबंधन से अलग हो जाने के बाद उनके बारे में चर्चा करने का कोई विशेष अर्थ नहीं है।
जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हाल में चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद की खबरों को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए थे,लेकिन चुनाव आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई और कहा गया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई असहमति नहीं थी। उनके मुताबिक,जिस पत्राचार को लेकर सवाल उठाए गए, वह एक अधिकारी की तैनाती से जुड़ा प्रशासनिक विषय था। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि चुनावी नतीजे उसके पक्ष में होने पर चुनाव आयोग के खिलाफ आवाज नहीं उठाई जाती,लेकिन परिणाम प्रतिकूल होने पर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जाते हैं।
राजीव रंजन ने इंडिया ब्लॉक की एकता पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन कई बार आंतरिक मतभेदों का सामना कर चुका है। उत्तर प्रदेश में चुनावी गतिविधियां तेज होने के बीच उन्होंने अखिलेश यादव की बैठक में अनुपस्थिति को भी विपक्ष के लिए चिंता का विषय बताया। हालाँकि,इंडिया ब्लॉक के भीतर अलग-अलग दलों की बैठक में भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर स्थिति एक जैसी नहीं रही। कुछ दलों ने दूरी बनाए रखी,जबकि कुछ ने अपने प्रतिनिधि भेजे।
भाजपा विधायक राम कदम ने विपक्षी बैठक को लेकर कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर ईवीएम, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं को देखने का अलग-अलग नजरिया नहीं होना चाहिए। उन्होंने एसआईआर के तहत मतदाता सूची की समीक्षा का समर्थन करते हुए कहा कि यदि मतदाता सूची में मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हैं,तो उन्हें हटाने की प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष पर इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। हालाँकि,एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों ने मतदाता सूची से नाम हटने, सत्यापन और अपील की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन ने भी इंडिया ब्लॉक के भीतर एकता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन में एकता केवल कागजों तक सीमित है। उन्होंने नीतीश कुमार के गठबंधन से अलग होने और उसके बाद भी विपक्षी नेताओं द्वारा उनके राजनीतिक फैसले पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया। सुमन के मुताबिक,यदि कोई नेता गठबंधन से बाहर हो चुका है और फिर भी उसकी भूमिका पर लगातार चर्चा हो रही है,तो इससे गठबंधन के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठते हैं।
बिहार जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तो इंडिया ब्लॉक के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन अब जमीन पर दिखाई नहीं देता और नीतीश कुमार के अलग होने के बाद उसकी स्थिति बदल गई। उनके बयान में विपक्षी गठबंधन के भीतर नेतृत्व और आपसी समन्वय को लेकर सवाल प्रमुख रहे।
आंध्र प्रदेश से भाजपा नेता विनूषा ने भी बैठक में विपक्षी दलों की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि बैठक में सभी विपक्षी दलों की एकजुटता का दावा किया जा रहा है,तो कुछ प्रमुख क्षेत्रीय दलों के नेता इसमें प्रत्यक्ष रूप से क्यों नहीं हैं। उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता एमके स्टालिन और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की अनुपस्थिति का जिक्र किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। हालाँकि,बैठक से पहले उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक,कई दलों की भागीदारी अलग-अलग रूप में तय हुई थी। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के स्थान पर प्रतिनिधि भेजे जाने की बात सामने आई थी,जबकि कुछ अन्य दलों की भागीदारी को लेकर भी अलग व्यवस्था की खबरें थीं।
कर्नाटक से भाजपा नेता सीटी रवि ने एसआईआर को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इसका इस्तेमाल पहले भी चुनावी व्यवस्था में किया जाता रहा है। रवि ने सवाल किया कि मृत व्यक्तियों के नाम हटाने या फर्जी मतदाताओं के नाम की जाँच करने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईआर का काम केवल मुख्य चुनाव आयुक्त का नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से भी होता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित आपत्ति होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और आपत्ति दर्ज कराने का विकल्प मौजूद है।
इसी क्रम में रवि ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल के पास उनके खिलाफ ठोस प्रमाण हैं,तो वह न्यायिक प्रक्रिया का सहारा ले सकता है। उनका कहना था कि चुनाव आयोग से जुड़े विवादों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए उठाया जाना चाहिए।
भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने विपक्षी गठबंधन की बैठक पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि विपक्षी दल वास्तव में अपने सहयोगियों को साथ लेकर चलने में सफल होते, तो गठबंधन से जुड़े दलों के बीच दूरी नहीं बढ़ती। उन्होंने इंडिया ब्लॉक को लेकर ‘लठबंधन’ और ‘ठगबंधन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और आरोप लगाया कि सहयोगी दलों के बीच केवल सार्वजनिक स्तर पर एकता दिखाई जाती है। उन्होंने अखिलेश यादव और आम आदमी पार्टी की बैठक से दूरी का भी उल्लेख किया।
इंडिया ब्लॉक की बैठक का मूल मुद्दा हालाँकि,चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की चिंताओं से जुड़ा था। विपक्षी दल एसआईआर, मतदाता सूची में कथित बदलाव, ईवीएम और वीवीपैट से संबंधित सवालों पर साझा रणनीति बनाने के लिए जुटे। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग और इस संबंध में आगे की राजनीतिक तथा संसदीय कार्रवाई पर भी चर्चा हुई। बैठक के बाद विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियों को सार्वजनिक किया और आगे संयुक्त आंदोलन की दिशा में बढ़ने की बात कही।
विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया है। बैठक में कांग्रेस सहित कई दलों ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता, नोटिस और अपील के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए। वहीं,एनडीए नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची का सत्यापन और उसमें मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना चुनावी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। इस तरह एसआईआर का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है,बल्कि सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी दोनों पक्षों के रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई और पद से हटाने की माँग को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। बैठक से पहले ही विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर साझा रणनीति बनाने की चर्चा थी। दूसरी ओर,एनडीए से जुड़े नेता चुनाव आयोग का बचाव कर रहे हैं और विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक प्रतिक्रिया बता रहे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से भी हाल में यह स्पष्ट किया गया है कि उसके निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। आयोग ने एसआईआर को लेकर उठे सवालों के जवाब में अपनी प्रक्रिया और सत्यापन व्यवस्था का बचाव किया है। एनडीए के सहयोगी दलों ने भी आयोग की इस स्थिति का समर्थन किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में एसआईआर,मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि भारत में चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद पहले भी सामने आते रहे हैं। इस बार एसआईआर और ईवीएम के मुद्दे ने उस बहस को फिर केंद्र में ला दिया है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए,जबकि एनडीए नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज को राजनीतिक आरोपों के आधार पर कटघरे में नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
बुधवार की बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक टकराव और स्पष्ट हो गया है। एक ओर इंडिया ब्लॉक चुनाव आयोग, एसआईआर और ईवीएम से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी रणनीति आगे बढ़ा रहा है,वहीं एनडीए के नेता विपक्षी एकता और उसके आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद का असर आने वाले चुनावी राज्यों की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है,क्योंकि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे सीधे राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति से जुड़े हैं।
फिलहाल,एसआईआर, ईवीएम और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इंडिया ब्लॉक इन मुद्दों को लेकर संयुक्त राजनीतिक अभियान चलाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है,जबकि एनडीए नेता चुनाव आयोग के बचाव में खुलकर सामने आ गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष अपने प्रस्तावित राजनीतिक और संसदीय कदमों को किस तरह आगे बढ़ाता है और चुनाव आयोग इन मुद्दों पर क्या अतिरिक्त स्पष्टीकरण देता है।
