क्रिस्टा पाइक की फाँसी नाकाम होने से अमेरिका में मचा हड़कंप (तस्वीर क्रेडिट@tv13gujarati)

दो घातक इंजेक्शन के बाद भी नहीं हुई मौत,क्रिस्टा पाइक की फाँसी नाकाम होने से अमेरिका में मचा हड़कंप

वाशिंगटन,2 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के टेनेसी राज्य में 30 सितंबर 2026 को एक ऐसी घटना हुई, जिसने मृत्युदंड की प्रक्रिया और उसके भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 50 वर्षीय क्रिस्टा गेल पाइक को 1995 में की गई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। करीब 31 साल बाद उन्हें घातक इंजेक्शन के जरिए मृत्युदंड देने की प्रक्रिया शुरू हुई,लेकिन दो बार पेंटोबार्बिटल दिए जाने के बावजूद उनकी मौत नहीं हुई। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया,जहाँ उनके वकीलों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।

पाइक का मामला इसलिए भी ऐतिहासिक था क्योंकि वह टेनेसी में दो शताब्दियों से ज्यादा समय बाद मृत्युदंड पाने वाली पहली महिला बनने वाली थीं। उनकी निर्धारित फाँसी से कुछ घंटे पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत रोक और फिर उसे हटाए जाने के बाद आखिरकार बुधवार रात प्रक्रिया शुरू की गई। लेकिन घातक इंजेक्शन के नाकाम रहने से अब यह सवाल सामने है कि आगे पाइक के साथ क्या होगा और क्या राज्य दोबारा उनकी फाँसी की कोशिश कर सकता है।

पाइक को बुधवार सुबह मृत्युदंड दिया जाना था। उनकी फाँसी को लेकर अंतिम समय तक कानूनी लड़ाई चलती रही। निर्धारित समय से करीब एक घंटे पहले एक अपीलीय अदालत ने घातक इंजेक्शन के जरिए फाँसी पर रोक लगा दी थी। हालाँकि,कुछ घंटे बाद टेनेसी की सर्वोच्च अदालत ने उस रोक को हटा दिया और राज्य को मृत्युदंड की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई। पाइक के वकीलों ने इससे पहले भी राज्य की घातक इंजेक्शन व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी थी।

इसके बाद शाम को नैशविल स्थित जेल में प्रक्रिया शुरू की गई। मीडिया के कुछ प्रतिनिधियों को अलग कमरे से कांच की दीवार के माध्यम से प्रक्रिया देखने की अनुमति दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक,पाइक को बिस्तर पर बाँधा गया था और अधिकारियों ने उन्हें पेंटोबार्बिटल देने की प्रक्रिया शुरू की।

पाइक ने अपने आखिरी शब्दों में कहा कि वह दुनिया छोड़ने जा रही हैं, उसी तरह जैसे उन्होंने अपनी जिंदगी का अधिकांश हिस्सा बिताया है—प्यार में। इसके बाद उन्हें घातक दवा की पहली खुराक दी गई। सामान्य तौर पर इस दवा के प्रभाव से व्यक्ति गहरी बेहोशी में चला जाता है और इसके बाद सांस तथा हृदय की गतिविधियाँ बंद हो जाती हैं,लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहली खुराक दिए जाने के बाद पाइक की आँखें खुली रहीं। वह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हुईं और एक समय उन्होंने अपना सिर उठाकर अधिकारियों से अपनी बांह में महसूस हो रहे एहसास के बारे में सवाल भी किया। यह स्थिति वहाँ मौजूद लोगों के लिए असामान्य थी,क्योंकि प्रक्रिया का उद्देश्य उन्हें कुछ ही समय में बेहोश कर उनकी सांस और हृदय की गतिविधियों को रोकना था।

करीब एक घंटे बाद पाइक को पेंटोबार्बिटल की दूसरी खुराक दी गई। इसके बाद मौत की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद की जा रही थी,लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पर्दे के पीछे से उनकी सांस लेने की आवाजें सुनाई देती रहीं। कुछ समय तक माइक्रोफोन के जरिए खर्राटों जैसी आवाजें भी सुनाई देती रहीं।

बाद में माइक्रोफोन का कनेक्शन काट दिया गया और मीडिया के प्रतिनिधियों को वहाँ से बाहर जाने के लिए कहा गया। इसके बाद आपात चिकित्सा सहायता के लिए पाइक को अस्पताल ले जाया गया। उनके वकीलों ने बाद में कहा कि वह जीवित थीं और उन्हें जीवनरक्षक चिकित्सा उपचार दिया जा रहा था।

पाइक की फाँसी नाकाम होने के बाद घातक इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली दवा पेंटोबार्बिटल की प्रभावशीलता और राज्य की पूरी प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। पेंटोबार्बिटल बार्बिचुरेट समूह की दवा है। इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय परिस्थितियों में भी किया जाता है और अधिक मात्रा में यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से दबा सकती है।

घातक मात्रा में यह दवा गहरी बेहोशी, सांस रुकने और अंततः हृदय की गतिविधि बंद होने का कारण बन सकती है,लेकिन किसी भी घातक इंजेक्शन प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि दवा शरीर में निर्धारित तरीके से पहुंचे और प्रोटोकॉल सही ढंग से लागू हो।

मृत्युदंड सूचना केंद्र के अनुसार अमेरिका में घातक इंजेक्शन से जुड़े नाकाम मामलों का इतिहास पहले से मौजूद है। पाइक का मामला हालांकि अलग इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि दो खुराक दिए जाने के बाद भी वह जीवित रहीं। विशेषज्ञों ने संभावित कारणों में दवा के शरीर में ठीक से न पहुँचने,नसों से जुड़ी कठिनाइयों और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों जैसे कारकों की चर्चा की है।

पाइक के वकीलों ने मृत्युदंड की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही टेनेसी के घातक इंजेक्शन प्रोटोकॉल को अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया था कि इस प्रक्रिया से उन्हें अत्यधिक पीड़ा का खतरा हो सकता है। इस मामले से जुड़े दस्तावेजों में उनके वकीलों ने राज्य की प्रक्रिया और उसे चुनौती देने के लिए लागू कानूनी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे।

पाइक के मामले में उनकी उम्र और मानसिक तथा चिकित्सकीय परिस्थितियों को लेकर भी उनके वकीलों ने अदालतों के सामने दलीलें दी थीं। हालाँकि,अदालतों में उनकी याचिकाओं को सफलता नहीं मिली और निर्धारित तारीख पर मृत्युदंड की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

अब दो घातक इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनके भविष्य को लेकर नया कानूनी प्रश्न खड़ा हो गया है। उनके वकीलों ने कहा है कि उनकी मुवक्किल ने प्रक्रिया के दौरान गंभीर शारीरिक पीड़ा झेली और दो असफल इंजेक्शन के बाद दोबारा मृत्युदंड की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

क्रिस्टा पाइक को 1995 में 19 वर्षीय कॉलिन स्लेमर की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। घटना के समय पाइक 18 वर्ष की थीं। अभियोजन के अनुसार पाइक ने अपने तत्कालीन 17 वर्षीय बॉयफ्रेंड और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर स्लेमर को जंगल के एक कैंप क्षेत्र में बुलाया था। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई।

मामले ने उस समय व्यापक ध्यान आकर्षित किया था। अभियोजन पक्ष ने हत्या के पीछे ईर्ष्या को एक कारण बताया था। पाइक को संदेह था कि स्लेमर उनके बॉयफ्रेंड में रुचि ले रही थी। अदालत ने पाइक को मौत की सजा सुनाई,जबकि उनके 17 वर्षीय बॉयफ्रेंड को आजीवन कारावास की सजा मिली।

पाइक के मामले में लंबे समय से मृत्युदंड को लेकर कानूनी बहस चलती रही। उनके समर्थकों और वकीलों ने उनकी कम उम्र,उनके बचपन के अनुभवों तथा मानसिक और चिकित्सकीय परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए सजा पर पुनर्विचार की माँग की थी। वहीं पीड़िता के परिवार की ओर से पाइक को मिली मौत की सजा के समर्थन की बात भी सामने आई थी।

फाँसी की कोशिश नाकाम होने के बाद संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख फोल्कर तुर्क ने टेनेसी प्रशासन से पाइक को दोबारा मृत्युदंड देने की कोशिश नहीं करने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय और नौ स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने कहा कि दो असफल प्रयासों के बाद दोबारा फाँसी की कोशिश गंभीर मानवाधिकार चिंताएं पैदा करेगी।

संयुक्त राष्ट्र की ओर से पाइक के मामले में निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े कुछ लंबित सवालों का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने इस घटना को अमेरिका में मृत्युदंड के व्यापक मुद्दे से जोड़ते हुए अपनी उस स्थिति को दोहराया कि वह मृत्युदंड का विरोध करता है। यह संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक मानवाधिकार स्थिति है,न कि पाइक के मामले में किसी अमेरिकी अदालत का फैसला।

पाइक की फाँसी की नाकामी के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने राज्य में 2026 के बाकी हिस्से के लिए निर्धारित सभी मृत्युदंड प्रक्रियाओं को रोक दिया है। उन्होंने इस घटना की व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा कराने का आदेश दिया है,ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रक्रिया में आखिर क्या गड़बड़ी हुई।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि टेनेसी में इससे पहले भी मृत्युदंड की प्रक्रिया को लेकर समस्याए सामने आ चुकी हैं। पाइक की घटना के बाद अब राज्य की घातक इंजेक्शन व्यवस्था,दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सा प्रक्रिया और जेल अधिकारियों द्वारा अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है।

दो घातक इंजेक्शन दिए जाने के बावजूद पाइक के जीवित बचने से उनकी कानूनी स्थिति असाधारण बन गई है। फिलहाल वह चिकित्सा निगरानी में हैं और उनके वकील उनकी ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य भविष्य में किस कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा। उनके वकीलों ने उनकी मौत की सजा को कम करने और दोबारा मृत्युदंड की कोशिश रोकने की मांग की है।

इस घटना ने एक साथ कई सवाल खड़े किए हैं। इनमें घातक इंजेक्शन की विश्वसनीयता,दवा के इस्तेमाल की प्रक्रिया, चिकित्सा प्रोटोकॉल,कैदियों के संवैधानिक अधिकार और एक असफल मृत्युदंड के बाद दोबारा फांसी देने की कानूनी स्थिति शामिल है।

क्रिस्टा पाइक को 1995 के अपराध के लिए मृत्युदंड सुनाया गया था और लगभग तीन दशक बाद उनकी सजा लागू करने की कोशिश हुई,लेकिन जिस प्रक्रिया को कुछ घंटों में उनकी जिंदगी खत्म कर देनी थी,वह दो घातक इंजेक्शनों के बाद भी पूरी नहीं हो सकी। अब उनके मामले में अदालतों,टेनेसी प्रशासन और स्वतंत्र जाँच से जुड़े अगले कदम यह तय करेंगे कि उनकी कानूनी स्थिति किस दिशा में जाती है। इस बीच,पाइक का मामला अमेरिका में मृत्युदंड की प्रक्रिया को लेकर चल रही पुरानी बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।