वाशिंगटन,2 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीतियों को अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वापसी और नई नौकरियों के सृजन का प्रमुख कारण बताया है। टेक्सास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि विदेशी कंपनियों से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा को टैरिफ के जरिए नियंत्रित करने से अमेरिकी उद्योगों को मजबूती मिली है। उनके मुताबिक, देश में नए कारखानों और उत्पादन संयंत्रों के निर्माण की रफ्तार बढ़ी है और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र एक बार फिर विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
ट्रंप ने भारी ट्रक बनाने वाली कंपनी के एक कार्यक्रम में अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देशभर में फैक्ट्रियों और प्लांट का निर्माण हो रहा है। उन्होंने इसे अपनी व्यापार नीति के असर से जोड़ते हुए कहा कि अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण मिलने के कारण कंपनियाँ देश में निवेश बढ़ा रही हैं। ट्रंप के अनुसार, उत्पादन बढ़ने से अमेरिकी श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि पहले विदेशी कंपनियाँ अमेरिका में अपने उत्पाद बेचती थीं और यहाँ से कमाई लेकर चली जाती थीं,जबकि अमेरिकी कर्मचारियों के लिए पर्याप्त नौकरियाँ उपलब्ध नहीं हो पाती थीं। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ नीति ने इस व्यवस्था को बदलने में मदद की है। ट्रंप के मुताबिक,विदेशी कंपनियों के लिए अब अमेरिकी बाजार में सामान बेचकर पहले की तरह आसानी से मुनाफा कमाना संभव नहीं है। उनका कहना था कि टैरिफ के जरिए अमेरिकी उद्योगों को प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा मिली है और इसका फायदा घरेलू उत्पादन को हो रहा है।
ट्रंप ने अमेरिकी निर्यात को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि मजबूत टैरिफ नीति के कारण इस साल अमेरिका का निर्यात देश के इतिहास में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है। इसके साथ ही उन्होंने चीन के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे में भी बड़ी कमी आने की बात कही। ट्रंप के अनुसार,चीन के साथ व्यापार घाटा पिछले 44 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने इसे अपनी व्यापार नीतियों की सफलता के तौर पर पेश किया।
मैन्युफैक्चरिंग रोजगार को लेकर ट्रंप ने कहा कि इस साल अमेरिका में करीब 60 हजार नई मैन्युफैक्चरिंग नौकरियाँ जुड़ी हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की कमाई में वृद्धि हुई है। राष्ट्रपति ने भारी ट्रकों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी का जिक्र किया। उनके मुताबिक,भारी ट्रकों का उत्पादन करीब 31 प्रतिशत बढ़ा है और इनकी आपूर्ति अमेरिकी इतिहास के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गई है।
ट्रंप ने टेक्सास में भारी ट्रक निर्माता कंपनी के कार्यक्रम को अपनी व्यापार नीति के प्रभाव का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी के बढ़ते कारोबार से यह संकेत मिलता है कि अमेरिकी उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ रही है। राष्ट्रपति के मुताबिक,कंपनियाँ अब अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने,नई सुविधाएँ स्थापित करने और अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने पर जोर दे रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान कंपनी की कार्यक्रम प्रबंधक सारा रेनशॉ ने भी ट्रंप की टैरिफ नीति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि टैरिफ लागू होने के बाद कंपनी उत्पादन बढ़ाने में सक्षम हुई और करीब 1,000 कर्मचारियों को रोजगार दिया गया। रेनशॉ ने राष्ट्रपति के सामने कहा कि व्यापार नीति में हुए बदलावों से कंपनी को घरेलू स्तर पर अपनी गतिविधियाँ बढ़ाने में मदद मिली है।
ट्रंप ने भारी ट्रक उद्योग में हुई प्रगति को केवल टैरिफ से नहीं जोड़ा,बल्कि अपनी सरकार द्वारा पर्यावरण से संबंधित कुछ नियमों में किए गए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने खास तौर पर भारी ट्रकों से होने वाले नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन से जुड़े नियम का जिक्र किया। ट्रंप का कहना था कि इस तरह के नियमों को हटाने या उनमें बदलाव करने से ट्रकों के निर्माण की लागत कम करने में मदद मिलेगी। उनके अनुसार,इससे अमेरिकी ट्रक निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने में अतिरिक्त फायदा मिल सकता है।
कार्यक्रम में कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रेस्टन फेइट ने भी ट्रंप और उनके प्रशासन की व्यापार नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि कंपनी अमेरिकी उद्योगों के लिए अनुकूल व्यापार नीतियाँ लागू किए जाने को लेकर राष्ट्रपति,वाणिज्य मंत्री और प्रशासन की आभारी है। उनका कहना था कि मौजूदा नीतियों से अमेरिका में विनिर्माण गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
ट्रंप लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि आयातित सामान पर अधिक शुल्क लगाने से अमेरिकी कंपनियों को घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। उनका कहना है कि विदेशी उत्पादों पर टैरिफ लगाने से अमेरिकी बाजार में घरेलू निर्माताओं को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा और कंपनियाँ उत्पादन को दूसरे देशों से वापस अमेरिका ला सकती हैं। इसी रणनीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने विभिन्न देशों के उत्पादों पर अलग-अलग दरों से शुल्क लगाने की नीति अपनाई है।
हालाँकि,टैरिफ के आर्थिक प्रभाव को लेकर व्यापक बहस भी जारी है। जहाँ ट्रंप और उनके समर्थक इसे अमेरिकी उद्योगों और रोजगार को बढ़ावा देने वाला कदम बताते हैं, वहीं टैरिफ से आयातित कच्चे माल और अन्य सामान की लागत बढ़ने की संभावना को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। कंपनियों के लिए टैरिफ का असर इस बात पर निर्भर करता है कि वे कितनी मात्रा में विदेशी सामग्री और पुर्जों पर निर्भर हैं और बढ़ी हुई लागत को किस तरह सँभालती हैं।
टेक्सास में ट्रंप के बयान से साफ है कि उनका प्रशासन अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को अपनी आर्थिक और व्यापार नीति के प्रमुख परिणाम के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ट्रंप ने फैक्ट्रियों के निर्माण, रोजगार बढ़ने, भारी ट्रकों के उत्पादन में वृद्धि और चीन के साथ व्यापार घाटे में कमी जैसे आँकडों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका में औद्योगिक गतिविधियाँ फिर से मजबूत हो रही हैं। अब इन नीतियों का दीर्घकालिक असर उत्पादन, रोजगार, कीमतों और अमेरिकी कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर कितना पड़ता है, यह आने वाले आर्थिक आँकडों से अधिक स्पष्ट होगा।
