अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

फ्लाईदुबई विमान घटना पर ट्रंप की ईरान को चेतावनी, बोले- संबंध साबित हुआ तो होगा ‘बहुत कड़ा हमला’

वॉशिंगटन,2 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लाईदुबई के यात्री विमान में हुई हिंसक घटना को लेकर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर जाँच में यह साबित होता है कि विमान के सह-पायलट के हमले के पीछे ईरान का हाथ था,तो अमेरिका ईरान के खिलाफ बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालाँकि, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जाँच अभी जारी है और उन्होंने ईरान की संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष सबूत सार्वजनिक नहीं किया है।

ट्रंप ने यह बयान व्हाइट हाउस से टेक्सास रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनसे पूछा गया था कि क्या उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि फ्लाईदुबई विमान में अपने ही कप्तान पर हमला करने वाले सह-पायलट का ईरान से कोई संबंध हो सकता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी इस मामले पर काम कर रहे हैं और उन्हें संबंधित पक्षों से जानकारी मिल रही है। उन्होंने कहा कि जो जानकारी उन्हें अभी तक मिली है,उसके आधार पर ईरान से संबंध होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता,लेकिन जाँच अभी चल रही है।

पत्रकारों ने जब ट्रंप से पूछा कि क्या यह संभव है कि सह-पायलट को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने विमान में भेजा हो या किसी अन्य माध्यम से उसे कट्टरपंथी बनाया गया हो,तो ट्रंप ने इस संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि ऐसा हो सकता है। हालाँकि,उनके इस बयान को किसी प्रमाण के तौर पर नहीं देखा जा सकता,क्योंकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई खुफिया जानकारी या दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया।

इसके बाद ट्रंप से सीधे पूछा गया कि अगर जाँच में यह साबित हो जाता है कि फ्लाईदुबई विमान में हुई घटना के पीछे ईरान था,तो क्या अमेरिका उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई करेगा। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान की भूमिका साबित हुई तो उस पर “बहुत कड़ा हमला” किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को पता है कि ऐसी स्थिति में अमेरिका की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है।

फ्लाईदुबई की यह घटना 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में हुई थी। विमान में करीब 174 यात्री और चालक दल के सदस्य सवार थे। उड़ान के दौरान सह-पायलट ने कथित तौर पर भारतीय कप्तान पर हमला कर दिया। इसके बाद विमान तेजी से नीचे आने लगा और कुछ ही समय में हजारों फीट की ऊँचाई खो बैठा। यात्रियों और चालक दल के कुछ सदस्यों ने स्थिति को सँभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। घायल कप्तान कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे,जिसके बाद यात्रियों ने अंदर पहुँचकर हमलावर को काबू करने में मदद की। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित उतारा गया।

घटना के बाद विमान में सवार यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। भारतीय कप्तान घायल हुए और उनका इलाज किया गया। इजरायल और भारत की ओर से कप्तान की भूमिका की सराहना की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,विमान को बचाने में यात्रियों और अतिरिक्त उड़ान चालक दल की भूमिका भी अहम रही। फ्लाईदुबई ने घटना की जांच जारी रहने के बीच इजरायल के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।

घटना के बाद सह-पायलट की पहचान और उसके मकसद को लेकर भी कई सवाल उठे हैं। शुरुआती जाँच में वह ओमान से जुड़ा बताया गया है,लेकिन उसकी नागरिकता और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से संबंधित कई जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि अभी जाँच का हिस्सा है। सऊदी अरब में प्रारंभिक कार्रवाई के बाद उसे संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। संयुक्त अरब अमीरात ने घटना की जाँच का आदेश दिया है,जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमला किसी आतंकी गतिविधि या पहले से बनाई गई योजना से जुड़ा था या नहीं।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घटना को लेकर कहा है कि सह-पायलट के बारे में कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा से प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने यह भी कहा कि वह आत्मघाती प्रवृत्ति का हो सकता है। हालाँकि,नेतन्याहू ने शुरुआती चरण में ईरान की भूमिका को लेकर सावधानी बरतते हुए कहा था कि इस निष्कर्ष पर पहुँचना अभी जल्दबाजी होगी। इस तरह ट्रंप के बयान और इजरायली नेतृत्व के शुरुआती आकलन के बीच भी अंतर दिखाई देता है।

वहीं,जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सह-पायलट को विमान की उड़ान और इजरायल जाने वाली इस सेवा में काम करने की अनुमति कैसे मिली। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि चालक दल के किसी सदस्य की ओर से संभावित खतरे को रोकने के लिए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्थाएँ कितनी प्रभावी हैं। सामान्य तौर पर कॉकपिट को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखने के लिए कड़े नियम होते हैं,लेकिन इस मामले में कथित खतरा कॉकपिट के अंदर से पैदा हुआ।

ट्रंप ने फ्लाईदुबई मामले पर चेतावनी देने के साथ-साथ ईरान की मौजूदा सैन्य और आर्थिक स्थिति को लेकर भी कई दावे किए। उन्होंने ईरान में महँगाई के बहुत ऊँचे स्तर पर होने की बात कही और दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है। उन्होंने ईरानी सेना की क्षमता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ईरान के पास पहले की तुलना में बहुत कम सैन्य संसाधन बचे हैं। ये दावे ट्रंप के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इनके अलग-अलग आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस बातचीत में उपलब्ध नहीं है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपनी सरकार की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अब युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में भी अधिक तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से निकाल रहा है। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना और सेना की प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिकी सैन्य बलों ने अच्छा काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि अब उनके सामने ईरान के अगले कदम को लेकर निर्णय लेने का सवाल है।

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते और न ही होने दिए जाएँगे। ट्रंप के अनुसार,ईरान इस बात पर सहमत हो रहा है कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं होंगे। ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत और क्षेत्रीय तनाव पहले से ही अमेरिका तथा ईरान के बीच संबंधों का प्रमुख विषय बने हुए हैं।

इस बीच,फ्लाईदुबई घटना के कारण मध्य पूर्व में पहले से मौजूद सुरक्षा चिंताएँ और बढ़ गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में विमान घटना में ईरानी कनेक्शन की किसी भी पुष्टि का क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। हालाँकि,फिलहाल उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर ईरान की भूमिका साबित नहीं हुई है। जाँच में सह-पायलट के मकसद, उसकी पृष्ठभूमि, संभावित संपर्कों और घटना की पूर्व योजना जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

ट्रंप ने यह भी माना कि ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और उससे जुड़े घटनाक्रम का अमेरिका की घरेलू राजनीति पर असर पड़ सकता है। उनसे पूछा गया था कि क्या ईरान युद्ध या उससे जुड़े फैसले आगामी मध्यावधि चुनावों को प्रभावित कर सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि ऐसा संभव है,लेकिन उन्होंने साथ ही तर्क दिया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनके लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी होना चाहिए। यह उनका राजनीतिक आकलन है,जबकि चुनाव पर वास्तविक प्रभाव का आकलन भविष्य के राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि फ्लाईदुबई विमान में हुई घटना की जाँच जारी है और ईरान की कथित भूमिका को लेकर कोई सार्वजनिक रूप से पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। ट्रंप ने संभावित ईरानी कनेक्शन की बात कही है और इसके साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है,लेकिन जाँच एजेंसियों को यह निर्धारित करना बाकी है कि सह-पायलट ने हमला क्यों किया,क्या उसने अकेले यह कदम उठाया और क्या उसके किसी संगठन या विदेशी सरकार से संबंध थे। इसलिए इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा।