ओलंपिक (तस्वीर क्रेडिट@siryanshyadav)

2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत आगे,आईओसी ने जारी किया चयन का पूरा रोडमैप

नई दिल्ली,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत के 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी के सपने को अब एक महत्वपूर्ण दिशा मिल गई है। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने भविष्य के मेजबान शहर के चयन की प्रक्रिया का रोडमैप जारी कर दिया है। इसके साथ ही भारत की दावेदारी अगले चरण में पहुँच गई है। भारत उन सात इच्छुक देशों में शामिल है, जो इस समय अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के साथ 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी को लेकर लगातार बातचीत कर रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन की मेजबानी हासिल करने की भारत की कोशिश अब औपचारिक प्रक्रिया के अगले पड़ाव की ओर बढ़ रही है।

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने मंगलवार को 2036 ओलंपिक खेलों के लिए मेजबान चुनने की प्रक्रिया से संबंधित हैंडबुक जारी की। इसमें आवेदन करने वाले इच्छुक देशों के आकलन से लेकर अंतिम मेजबान के चयन तक की पूरी प्रक्रिया का खाका पेश किया गया है। इसके अनुसार,अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का कार्यकारी बोर्ड मार्च 2027 तक उन परियोजनाओं को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट करेगा,जो प्रारंभिक मूल्यांकन में निर्धारित मानकों पर खरी उतरेंगी। इसका मतलब है कि भारत को अब अपनी प्रस्तावित योजना, खेल सुविधाओं, वित्तीय व्यवस्था और आयोजन क्षमता को मजबूत तरीके से पेश करना होगा।

फिलहाल भारत के अलावा जर्मनी,हंगरी, कतर, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी में रुचि रखने वाले देशों के रूप में प्रक्रिया में शामिल हैं। इन सभी देशों के प्रस्तावों का अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा अलग-अलग मानकों पर मूल्यांकन किया जाएगा। मेजबानी की दौड़ में शामिल देशों के लिए केवल शानदार खेल सुविधाएँ होना पर्याप्त नहीं होगा,बल्कि उन्हें यह भी साबित करना होगा कि वे इतने बड़े अंतर्राष्ट्रीय आयोजन को आर्थिक,प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सफलतापूर्वक आयोजित करने की क्षमता रखते हैं।

भारत लंबे समय से 2036 ओलंपिक की मेजबानी की अपनी इच्छा जाहिर करता रहा है। भारत की ओर से इस दिशा में औपचारिक कदम 1 अक्टूबर 2024 को उठाया गया था, जब भारतीय ओलंपिक संघ ने अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के ‘फ्यूचर होस्ट कमीशन’ को औपचारिक रूप से अपनी रुचि का पत्र भेजा था। इस पत्र के जरिए 2036 ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी में भारत की आधिकारिक दिलचस्पी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद से भारत की संभावित दावेदारी को लेकर तैयारियाँ लगातार आगे बढ़ती रही हैं।

‘फ्यूचर होस्ट कमीशन’ अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की उस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भविष्य में होने वाले ओलंपिक खेलों के मेजबान के चयन से जुड़ी है। मेजबान का चयन सीधे किसी एक चरण में नहीं होता,बल्कि कई स्तरों से गुजरने वाली प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। इसमें इच्छुक देशों की योजनाओं,उनकी तैयारियों और विभिन्न परिस्थितियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। अंतिम फैसला अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य करते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की अध्यक्ष क्रिस्टी कोवेंट्री ने मेजबान चयन प्रक्रिया के नए रोडमैप को लेकर एथलीटों को सबसे महत्वपूर्ण केंद्र में रखने की बात कही है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें चार महाद्वीपों में पाँच ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने का अवसर मिला और हर आयोजन की अपनी अलग विशेषता थी। उनके अनुसार, अलग-अलग मेजबान देशों ने अपनी संस्कृति,अपने लोगों और खेलों के आयोजन के तरीके से ओलंपिक को अलग पहचान दी। हालाँकि,उनके मुताबिक एक चीज हमेशा समान रहनी चाहिए और वह है एथलीटों की प्राथमिकता।

क्रिस्टी कोवेंट्री ने कहा कि एक एथलीट अपने ओलंपिक सपने को पूरा करने के लिए वर्षों तक मेहनत करता है। जब वह आखिरकार ओलंपिक खेलों में पहुँचता है,तो वहाँ मिलने वाला अनुभव जीवनभर उसके साथ रहता है। इसलिए भविष्य के प्रत्येक मेजबान के लिए एथलीटों को बेहतरीन अनुभव देना शुरुआत से ही सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की नई चयन प्रक्रिया में भी इसी सोच को प्रमुखता दी गई है।

नए रोडमैप के अनुसार, 2036 ओलंपिक की मेजबानी में रुचि रखने वाले पक्ष नवंबर 2026 में ‘फ्यूचर होस्ट कमीशन’ के सामने ऑनलाइन प्रस्तुति देंगे। इन प्रस्तुतियों के जरिए इच्छुक देश अपनी योजनाओं, खेल स्थलों, आयोजन संरचना और भविष्य की तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन करेगी। यह मूल्यांकन मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

इसके बाद चयन प्रक्रिया में आगे बढ़ने वाली परियोजनाओं के साथ ‘स्ट्रैटेजिक डायलॉग’ शुरू किया जाएगा। इस चरण में प्रस्तावित मेजबान शहर या देश की योजनाओं पर और अधिक गहराई से चर्चा होगी। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति यह देखेगी कि संबंधित परियोजना वास्तव में ओलंपिक स्तर के आयोजन की जरूरतों को पूरा करने में कितनी सक्षम है। भारत के लिए यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण होगा,क्योंकि उसे अपनी आयोजन क्षमता के साथ-साथ यह भी दिखाना होगा कि ओलंपिक की मेजबानी देश के दीर्घकालिक विकास में किस तरह योगदान दे सकती है।

मेजबानी के दावेदारों का मूल्यांकन कई तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर किया जाएगा। इसमें खेल स्थलों की योजना, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएँ, वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था, राजनीतिक और जनता का समर्थन, आयोजन को सफल बनाने की प्रशासनिक क्षमता और खेलों के बाद छोड़ी जाने वाली दीर्घकालिक विरासत जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि प्रस्तावित आयोजन स्थानीय विकास योजनाओं के साथ किस तरह जुड़ता है और ओलंपिक आंदोलन के व्यापक उद्देश्यों को कितना आगे बढ़ाता है।

भारत के लिए इस प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपनी मौजूदा खेल सुविधाओं और भविष्य में तैयार होने वाले बुनियादी ढाँचे को एक ऐसी समग्र योजना के रूप में पेश करे,जो अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति की अपेक्षाओं को पूरा कर सके। ओलंपिक की मेजबानी सिर्फ प्रतियोगिताओं के आयोजन तक सीमित नहीं होती। इसमें खिलाड़ियों के रहने, आने-जाने, प्रशिक्षण, सुरक्षा, चिकित्सा व्यवस्था और दर्शकों की सुविधाओं से लेकर आयोजन के बाद बुनियादी ढाँचे के उपयोग तक कई पहलू शामिल होते हैं। इसलिए भारत को अपनी पूरी योजना में दीर्घकालिक उपयोगिता और स्थायी विकास को भी महत्व देना होगा।

चयन प्रक्रिया का अगला बड़ा चरण दिसंबर 2028 में शुरू होगा। इस समय अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति का कार्यकारी बोर्ड कुछ चुनिंदा पसंदीदा मेजबानों के साथ ‘टारगेटेड डायलॉग’ शुरू करेगा। इस चरण में दावेदारों की योजनाओं की और विस्तृत जाँच होगी। पसंदीदा मेजबानों से अंतिम प्रश्नावली के जवाब और विभिन्न प्रकार की औपचारिक गारंटी भी माँगी जाएँगी। इसके बाद प्रक्रिया अंतिम निर्णय की ओर बढ़ेगी।

अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य 2029 के मध्य में होने वाले आईओसी सत्र में 2036 ओलंपिक खेलों के मेजबान का चुनाव करेंगे। यानी भारत के पास अपनी दावेदारी को मजबूत करने के लिए आने वाले वर्षों में कई महत्वपूर्ण चरणों से गुजरने का अवसर है। इस दौरान भारत को लगातार अपनी योजनाओं को बेहतर बनाना होगा और अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सामने अपनी क्षमता साबित करनी होगी।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने 31 अक्टूबर 2026 की समय-सीमा भी तय कर दी है। इस तारीख के बाद 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी के लिए नए इच्छुक पक्षों को प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसे में मौजूदा सात दावेदारों के लिए अब प्रतियोगिता और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत भी इस सीमित सूची का हिस्सा है और उसे अगले चरण में पहुँचने के लिए अपनी प्रस्तावित योजना को मजबूती से पेश करना होगा।

भारत के लिए 2036 ओलंपिक की मेजबानी हासिल करना केवल एक खेल आयोजन की मेजबानी का अवसर नहीं होगा,बल्कि देश की वैश्विक खेल पहचान को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जाएगा। भारत पहले ही कई अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर चुका है और अब दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन को देश में लाने की महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा जारी रोडमैप ने इस महत्वाकांक्षा को एक स्पष्ट प्रक्रिया दे दी है।

अब भारत की दावेदारी की असली परीक्षा नवंबर 2026 से शुरू होगी, जब इच्छुक देशों को अपनी योजनाएँ प्रस्तुत करनी होंगी। इसके बाद मार्च 2027 तक होने वाली शॉर्टलिस्टिंग यह तय करेगी कि कौन से प्रस्ताव अगले चरण में प्रवेश करेंगे। 2029 में होने वाले अंतिम चुनाव तक भारत के सामने कई महत्वपूर्ण पड़ाव होंगे। ऐसे में 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत का सफर अब औपचारिक रूप से एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।