नई दिल्ली,12 अक्टूबर (युआईटीवी)- कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने रूस और यूक्रेन के बीच प्रस्तावित ऊर्जा युद्धविराम को लेकर रूस से समझौते का पालन करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से बातचीत हुई है। इस दौरान दोनों नेताओं के साथ यूक्रेन युद्ध की तेजी से बदलती परिस्थितियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हालात पर चर्चा की गई। कार्नी के मुताबिक,ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की पहल से युद्ध के प्रभाव को कम करने और आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों से बचाने में मदद मिल सकती है।
कार्नी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप और जेलेंस्की के साथ चर्चा में ऊर्जा क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और यूक्रेन में जारी युद्ध के घटनाक्रम प्रमुख विषय रहे। कनाडाई प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति की मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम की कोशिश का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे संघर्ष के कारण पैदा होने वाली कठिनाइयों को कम किया जा सकता है।
उन्होंने रूस से अपील की कि वह इस समझौते का पालन करे। साथ ही,कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर यूक्रेन और यूरोप के लिए न्यायपूर्ण तथा स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में काम जारी रखेगा। उनके बयान से स्पष्ट है कि कनाडा ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को रोकने की पहल को व्यापक शांति प्रयासों से जोड़कर देख रहा है।
इस घटनाक्रम से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दावा किया था कि रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि दोनों पक्ष इस व्यवस्था पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने अपने संदेश में दोनों देशों से इस समझौते को नहीं तोड़ने की अपील भी की।
व्हाइट हाउस ने भी ट्रंप की पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा से संबंधित युद्धविराम तत्काल प्रभाव से लागू है। हालांकि, इस दावे के साथ समझौते की विस्तृत शर्तों,उसकी समयसीमा और निगरानी की व्यवस्था को लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश वास्तव में ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए किन कदमों पर सहमत होते हैं और इस व्यवस्था को किस तरह लागू किया जाता है।
ऊर्जा युद्धविराम का मुख्य उद्देश्य बिजली उत्पादन,ईंधन आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने से रोकना है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष में ऊर्जा प्रतिष्ठान महत्वपूर्ण लक्ष्य रहे हैं। ऐसे ठिकानों पर हमलों का असर केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता,बल्कि आम लोगों की बिजली,पानी, हीटिंग और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुँच भी प्रभावित हो सकती है।
यदि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रुकते हैं,तो इससे नागरिकों को राहत मिलने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का अवसर मिल सकता है। हालाँकि,ऊर्जा क्षेत्र में सीमित युद्धविराम अपने आप में पूरे युद्ध को समाप्त करने का समझौता नहीं है। इसके प्रभाव का आकलन इस बात से होगा कि दोनों पक्ष कितनी गंभीरता से इसका पालन करते हैं और क्या इसके बाद व्यापक शांति वार्ता को आगे बढ़ाने का रास्ता खुलता है।
ऊर्जा युद्धविराम को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यदि रूस यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकता है,तो यूक्रेन भी रूस की तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना बंद करने के लिए तैयार है। इस बयान में दोनों पक्षों की ओर से हमले रोकने की संभावना सामने आई थी, लेकिन इसके लिए एक-दूसरे के कदमों पर निर्भरता भी दिखाई देती है।
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों को लेकर टकराव का असर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है। तेल रिफाइनरियों और ईंधन आपूर्ति से जुड़े केंद्रों पर हमलों के कारण उत्पादन तथा वितरण प्रभावित होने की आशंका रहती है। यही वजह है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने का मुद्दा युद्ध के मैदान से बाहर भी आर्थिक और राजनीतिक महत्व रखता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शनिवार को यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों पर किए जा रहे हमलों की आलोचना की थी। उन्होंने इन हमलों को अमेरिका में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से जोड़ते हुए जेलेंस्की से हमले रोकने की अपील की थी। ट्रंप के इस बयान से संकेत मिला कि वह ऊर्जा क्षेत्र में जारी टकराव को अमेरिका के घरेलू आर्थिक हितों के संदर्भ में भी देख रहे हैं।
ट्रंप ने इसी दौरान जेलेंस्की के नेतृत्व पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यूक्रेनी राष्ट्रपति रूस के साथ समझौते के कई अवसर गंवा चुके हैं और अब यूक्रेन को अपना नेता बदलने के बारे में सोचना चाहिए। यह ट्रंप की राजनीतिक टिप्पणी थी,जबकि यूक्रेन की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव रूस के कदमों से जुड़ी शर्त के साथ सामने आया था।
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा युद्धविराम की घोषणा ऐसे समय में हुई है,जब संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। कनाडा की ओर से इस पहल का समर्थन और रूस से समझौते के पालन की अपील यह दर्शाती है कि सहयोगी देश ऊर्जा क्षेत्र में तनाव कम करने को नागरिक सुरक्षा तथा व्यापक शांति प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
फिर भी,किसी भी युद्धविराम की सफलता केवल घोषणा पर निर्भर नहीं करती। इसके लिए दोनों पक्षों की सहमति, स्पष्ट नियम, उल्लंघन की स्थिति में जवाबदेही और लगातार संवाद आवश्यक होते हैं। यदि किसी पक्ष को लगता है कि दूसरा पक्ष समझौते का लाभ उठाकर सैन्य बढ़त हासिल कर रहा है,तो युद्धविराम को बनाए रखना कठिन हो सकता है।
मार्क कार्नी ने अपने बयान में न्यायपूर्ण और स्थायी शांति पर जोर दिया है। इसका अर्थ है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की पहल को व्यापक राजनीतिक समाधान का विकल्प नहीं,बल्कि संभावित शुरुआती कदम के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ट्रंप की ओर से घोषित व्यवस्था जमीन पर किस हद तक लागू होती है और क्या इससे रूस तथा यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
फिलहाल,ऊर्जा युद्धविराम को लेकर सबसे अहम सवाल इसके वास्तविक क्रियान्वयन का है। यदि दोनों देश ऊर्जा बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने से परहेज करते हैं,तो इससे नागरिकों को राहत मिल सकती है और संघर्ष की तीव्रता कम करने का अवसर पैदा हो सकता है,लेकिन स्थायी शांति के लिए युद्धविराम के साथ-साथ व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक सहमति बनाना भी जरूरी होगा।
