नई दिल्ली,13 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारतीय क्रिकेट टीम के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपनी प्रतिभा के साथ-साथ टीम में खेलने के अवसर को लेकर भी चर्चा में हैं। महज 15 साल की उम्र में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव को वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी टी20 सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली है। उन्हें टीम में शामिल तो किया गया है,लेकिन मैदान पर उतरने के बजाय वह बेंच पर बैठकर अपने मौके का इंतजार कर रहे हैं। इस स्थिति पर उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने नाराजगी जताई है और भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर की सोच पर सवाल उठाए हैं।
मनीष ओझा का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को केवल टीम के साथ रखने या बेंच पर बैठाने से भविष्य के लिए तैयार नहीं किया जा सकता। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की परिस्थितियों में खेलने और दबाव का सामना करने का अवसर देना जरूरी है। उनके मुताबिक,अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों को विकसित करने के लिए टीम प्रबंधन को प्रतिभा पर भरोसा दिखाने के साथ उन्हें मैदान पर अपनी क्षमता साबित करने का मौका भी देना चाहिए।
वैभव को लगातार शुरुआती मुकाबलों में बाहर बैठना पड़ा है,जिससे उनके खेलने के अवसरों को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालाँकि,टीम प्रबंधन का तर्क है कि टीम में पहले से अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देना जरूरी है। ऐसे में युवा प्रतिभा को अवसर देने और अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को महत्व देने के बीच संतुलन बनाना टीम प्रबंधन के सामने चुनौती बना हुआ है।
वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी को केवल बेंच पर बैठाकर तैयार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार,यदि भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए मजबूत खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करनी है,तो युवा प्रतिभाओं को वास्तविक मैच परिस्थितियों में खेलने का अवसर देना होगा।
ओझा ने कहा कि क्रिकेट के दिग्गजों से बात करने पर भी यही राय सामने आएगी कि अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए उन्हें मैदान पर उतरने और अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करने का मौका मिलना चाहिए। उनका तर्क है कि मैच में खेलने से खिलाड़ी दबाव को समझते हैं,अपनी गलतियों से सीखते हैं और बड़े मुकाबलों के लिए जरूरी अनुभव हासिल करते हैं।
उन्होंने मौजूदा टीम प्रबंधन के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि वैभव जैसे युवा खिलाड़ी को बाहर बैठाकर रखना उचित नहीं है। ओझा ने यहाँ तक कहा कि टीम प्रबंधन का काम करने का तरीका उन्हें तानाशाही जैसा लगता है। उनका आरोप है कि प्रबंधन अपनी पसंद के अनुसार फैसले ले रहा है और युवा खिलाड़ी को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
हालाँकि,यह मनीष ओझा की निजी प्रतिक्रिया है। टीम प्रबंधन की ओर से खिलाड़ियों को चुनने के पीछे प्रदर्शन,टीम संयोजन और मैच की जरूरतों जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है। ऐसे में वैभव को बाहर रखने के फैसले को लेकर बहस का केंद्र यह है कि टीम में तत्काल नतीजों को प्राथमिकता दी जाए या भविष्य की तैयारी के लिए युवा खिलाड़ियों को अधिक मौके दिए जाएँ।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर इस मुद्दे पर पहले ही अपनी राय स्पष्ट कर चुके हैं। उनका कहना है कि टीम प्रबंधन को वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा और उनकी क्षमताओं का पूरा अंदाजा है,लेकिन किसी खिलाड़ी में प्रतिभा होने का अर्थ यह नहीं है कि उसे हर मुकाबले में खेलने का अवसर दिया ही जाए।
गंभीर के अनुसार,जो खिलाड़ी पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं,उन्हें उस खिलाड़ी के मुकाबले प्राथमिकता मिल सकती है,जिसने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई है। उनके इस तर्क के पीछे टीम में निरंतर प्रदर्शन और प्रतिस्पर्धा को महत्व देने की सोच दिखाई देती है।
मुख्य कोच ने यह भी संकेत दिया है कि वैभव को जब अवसर मिलेगा,तो उन्हें लगातार मौके देने पर विचार किया जाएगा। टीम के ड्रेसिंग रूम में प्रतिभा और प्रतिस्पर्धा दोनों का होना जरूरी है। लेकिन किसी भी खिलाड़ी को अपने मौके का इंतजार करना पड़ सकता है। गंभीर की राय में खिलाड़ी की उम्र इस प्रक्रिया को नहीं बदलती। चाहे कोई खिलाड़ी 15 साल का हो या 30 साल का,उसे टीम में अपनी जगह बनाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
इस तरह गंभीर और वैभव के बचपन के कोच के विचारों में अंतर साफ नजर आता है। जहाँ गंभीर मौजूदा टीम में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं,वहीं ओझा युवा खिलाड़ियों को अधिक अवसर देने की वकालत कर रहे हैं। इस बहस के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी मुकाबलों में टीम प्रबंधन वैभव को मौका देता है या उन्हें कुछ और समय तक इंतजार करना पड़ता है।
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में अपने प्रदर्शन से काफी ध्यान खींचा था। कम उम्र में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें क्रिकेट जगत में पहचान दिलाई और इसके बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। इतनी कम उम्र में राष्ट्रीय टीम तक पहुँचना उनके लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई।
आईपीएल में प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद वैभव को इंग्लैंड दौरे पर खेली गई पाँच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम की ओर से पदार्पण करने का अवसर मिला। उन्होंने सीरीज के दूसरे मुकाबले में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। हालाँकि,उनका शुरुआती अनुभव उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। शुरुआती तीन मैचों में उनका बल्ला नहीं चला और इसके बाद आखिरी मुकाबले की प्लेइंग इलेवन में उन्हें शामिल नहीं किया गया।
इसके बावजूद वैभव ने हार नहीं मानी। जिम्बाब्वे दौरे पर उन्हें फिर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला और उन्होंने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए प्रभावित किया। उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और यह दिखाया कि मौका मिलने पर वह टीम के लिए उपयोगी योगदान दे सकते हैं।
जिम्बाब्वे दौरे पर मिली सफलता के बाद वैभव से उम्मीदें और बढ़ गईं। उनकी बल्लेबाजी की शैली तेज रन बनाने पर केंद्रित है,जिससे वह कम समय में मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। हालाँकि,अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उन्हें अलग-अलग गेंदबाजों,पिचों और मैच परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी होगा।
वैभव सूर्यवंशी ने एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ स्वर्ण पदक मुकाबले में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया था। उस मैच में उन्होंने नौ गेंदों पर 15 रन बनाए। हालांकि यह पारी बहुत लंबी नहीं थी,लेकिन इसने बड़े मुकाबलों में उन्हें खेलने का अनुभव दिया।
वैभव के करियर का शुरुआती दौर तेजी से आगे बढ़ा है। आईपीएल में पहचान बनाने से लेकर भारतीय टीम में जगह हासिल करने तक उन्होंने कम उम्र में कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं। ऐसे में उनके प्रशंसकों और कोच को उम्मीद है कि उन्हें नियमित अवसर मिलेंगे,ताकि वह अपनी प्रतिभा को और बेहतर तरीके से साबित कर सकें।
दूसरी ओर,राष्ट्रीय टीम में जगह बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना करना भी हर खिलाड़ी के करियर का हिस्सा है। टीम प्रबंधन को यह तय करना होता है कि किसी मुकाबले में किन खिलाड़ियों को उतारने से टीम का संतुलन बेहतर रहेगा। ऐसे फैसलों में मौजूदा फॉर्म, विरोधी टीम की रणनीति और पिच की परिस्थितियाँ भी भूमिका निभाती हैं।
वेस्टइंडीज के खिलाफ शुरुआती तीन मुकाबलों में वैभव को मौका नहीं मिलने के बाद अब निगाहें आगामी मैचों पर हैं। उनके बचपन के कोच की प्रतिक्रिया ने युवा खिलाड़ियों को अवसर देने और टीम में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
मनीष ओझा का मानना है कि युवा प्रतिभाओं को केवल भविष्य की उम्मीद बताकर बाहर नहीं बैठाना चाहिए,बल्कि उन्हें मैदान पर उतरकर सीखने का अवसर देना चाहिए। वहीं, गौतम गंभीर का पक्ष है कि टीम में पहले से लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देना भी जरूरी है और हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
आखिरकार,वैभव सूर्यवंशी के लिए सबसे अहम बात यह होगी कि जब भी उन्हें खेलने का अवसर मिले,वह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करें। कम उम्र में मिली पहचान को लंबे अंतर्राष्ट्रीय करियर में बदलने के लिए निरंतरता,धैर्य और अनुभव महत्वपूर्ण होंगे। अब देखना होगा कि टीम प्रबंधन उन्हें आगामी मुकाबलों में प्लेइंग इलेवन में शामिल करता है या नहीं और वैभव अपने अगले अवसर का किस तरह उपयोग करते हैं।
