अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (तस्वीर क्रेडिट@ShpoolNews)

अलास्का गैस पाइपलाइन परियोजना को ताइवान का बड़ा समर्थन, 20 साल तक 30 प्रतिशत गैस खरीदने पर सहमति का ट्रंप का दावा

वाशिंगटन,14 अक्टूबर (युआईटीवी)- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अलास्का की प्रस्तावित प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने दावा किया कि ताइवान अगले 20 वर्षों तक इस पाइपलाइन से उत्पादित प्राकृतिक गैस का 30 प्रतिशत हिस्सा खरीदने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही ताइवान परियोजना में अतिरिक्त 4.4 अरब डॉलर का निवेश भी करेगा। ट्रंप ने इस समझौते को अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र, बुनियादी ढाँचे और विदेशी निवेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

अलास्का के वासिला में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ताइवान की दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धता से पाइपलाइन परियोजना की व्यावसायिक संभावनाओं को मजबूती मिलेगी। उनके मुताबिक,इससे परियोजना के लिए वित्तीय आधार तैयार करने और एशियाई बाजारों में अमेरिकी प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालाँकि,समझौते की विस्तृत शर्तों, खरीद की शुरुआत और निवेश की समयसीमा से संबंधित सभी जानकारियाँ अभी स्पष्ट नहीं हैं।

यह परियोजना अमेरिका की उन योजनाओं का हिस्सा है,जिनके तहत घरेलू प्राकृतिक गैस संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाकर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऊर्जा निर्यात का विस्तार करने की कोशिश की जा रही है। ट्रंप प्रशासन इसे रोजगार सृजन,औद्योगिक विकास और विदेशी पूँजी आकर्षित करने के अवसर के रूप में भी पेश कर रहा है।

रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ताइवान अगले दो दशकों तक प्रस्तावित पाइपलाइन से निकलने वाली प्राकृतिक गैस का 30 प्रतिशत खरीदने पर सहमत हुआ है। उन्होंने इस व्यवस्था को परियोजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए अहम बताया। राष्ट्रपति के अनुसार,इतने लंबे समय तक खरीद की प्रतिबद्धता मिलने से परियोजना के आर्थिक भविष्य को लेकर भरोसा बढ़ेगा और इसके निर्माण के लिए निवेश जुटाने में सहायता मिल सकती है।

प्राकृतिक गैस से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं में उत्पादन,परिवहन और निर्यात के लिए भारी पूंजी की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक खरीद का आश्वासन निवेशकों को संभावित माँग का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। हालाँकि,वास्तविक वित्तीय लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि गैस की कीमतें,आपूर्ति की शर्तें,निर्माण लागत और निर्यात की व्यवस्था किस तरह तय होती हैं।

ट्रंप ने ताइवान की प्रतिबद्धता को दक्षिण कोरिया की ओर से पहले घोषित निवेश के साथ जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया की प्रतिबद्धता के अतिरिक्त ताइवान भी 4.4 अरब डॉलर का निवेश करेगा। उनके मुताबिक,दोनों एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की भागीदारी से अलास्का की ऊर्जा परियोजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने भी इस घोषणा के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रशासन ने पिछले सप्ताह ताइवान की सरकार के साथ इस विषय पर बातचीत की थी। लुटनिक के अनुसार, चर्चा के दौरान ताइवान ने पाइपलाइन से उत्पादित प्राकृतिक गैस का 30 प्रतिशत खरीदने की प्रतिबद्धता जताई।

उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान परियोजना में 4.4 अरब डॉलर का निवेश करेगा,जबकि दक्षिण कोरिया ने पाइपलाइन के निर्माण के लिए 50.1 अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है। ट्रंप ने रैली में दक्षिण कोरिया के निवेश का उल्लेख करते हुए इसे परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।

हालाँकि,इन घोषणाओं को समझते समय निवेश की प्रतिबद्धता और वास्तविक रूप से उपलब्ध कराई गई पूँजी के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी परियोजना के लिए निवेश की घोषणा होने के बाद भी धन जारी करने,निर्माण शुरू करने और तय समयसीमा में काम पूरा करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती है। इसलिए परियोजना की वास्तविक प्रगति का आकलन निवेश समझौतों की शर्तों और निर्माण संबंधी गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की भागीदारी अमेरिका के लिए एशियाई ऊर्जा बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर बन सकती है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं को ऊर्जा की बड़ी जरूरत है और प्राकृतिक गैस बिजली उत्पादन तथा औद्योगिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालाँकि,किसी भी देश की वास्तविक खरीद उसके ऊर्जा मिश्रण, कीमतों और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों पर निर्भर करेगी।

अलास्का एलएनजी परियोजना का उद्देश्य राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित नॉर्थ स्लोप क्षेत्र से प्राकृतिक गैस को दक्षिणी तट तक पहुँचाना है। इसके लिए लगभग 800 मील लंबी पाइपलाइन प्रस्तावित है। दक्षिणी तट पर पहुँचने के बाद प्राकृतिक गैस को प्रसंस्कृत कर तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक भेजने की योजना है।

प्राकृतिक गैस को तरलीकृत करने से उसका आयतन काफी कम हो जाता है,जिससे विशेष जहाजों के जरिए उसे दूसरे देशों तक पहुँचना संभव होता है। इस व्यवस्था के माध्यम से अमेरिका उन बाजारों तक गैस का निर्यात कर सकता है,जहाँ पाइपलाइन के जरिए सीधे आपूर्ति करना संभव नहीं है।

अलास्का में प्राकृतिक गैस के बड़े संसाधन मौजूद हैं,लेकिन उन्हें व्यावसायिक रूप से विकसित करने के लिए परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़ा बुनियादी ढाँचा तैयार करना जरूरी है। प्रस्तावित परियोजना इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में बनाई गई है। यदि योजना आगे बढ़ती है, तो इससे राज्य के ऊर्जा संसाधनों का उपयोग बढ़ सकता है और निर्यात से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

हालाँकि,इतने बड़े स्तर की परियोजना को पूरा करने के लिए निर्माण लागत,तकनीकी जरूरतों,पर्यावरण संबंधी नियमों और बाजार की माँग जैसे कई पहलुओं पर काम करना होगा। लंबे समय तक गैस की आपूर्ति और खरीद सुनिश्चित करना भी इसकी आर्थिक व्यवहार्यता के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार ने पाइपलाइन परियोजना के लिए आवश्यक संघीय परमिट प्रक्रिया पूरी कर ली है। उनके मुताबिक,इससे निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने में आने वाली एक प्रमुख बाधा दूर हो गई है। राष्ट्रपति ने कहा कि परियोजना के लिए जरूरी परमिट दे दिए गए हैं और प्रशासन इसे निर्माण के करीब लाने के लिए लंबे समय से काम कर रहा है।

उन्होंने अलास्का के रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन को भी परियोजना को आगे बढ़ाने में सहयोग देने का श्रेय दिया। ट्रंप ने इसे घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निवेश लाने की अपनी व्यापक रणनीति से जोड़ा।

हालाँकि,परमिट मिलने का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि निर्माण कार्य पूरा हो चुका है या गैस का निर्यात तुरंत शुरू हो जाएगा। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्था, निर्माण संबंधी तैयारी, तकनीकी क्रियान्वयन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसलिए परियोजना की वास्तविक स्थिति का निर्धारण इन सभी चरणों की प्रगति से होगा।

ट्रंप ने दावा किया कि अलास्का की इस परियोजना से 13,000 से अधिक नौकरियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे एक सामान्य अलास्का परिवार के ऊर्जा बिल में सालाना 2,000 डॉलर से अधिक की बचत हो सकती है।

राष्ट्रपति ने परियोजना को अमेरिकी परिवारों के लिए ऊर्जा लागत कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा बताया। उनके अनुसार,बड़े ऊर्जा निवेश से निर्माण क्षेत्र, परिवहन, औद्योगिक सेवाओं और संबंधित कारोबारों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

हालाँकि, रोजगार की वास्तविक संख्या परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान पैदा होने वाले अवसरों पर निर्भर करेगी। इसी तरह,परिवारों के ऊर्जा बिल में संभावित बचत का आकलन स्थानीय आपूर्ति,वितरण लागत,बाजार की कीमतों और परियोजना से मिलने वाले लाभों के आधार पर करना होगा। ट्रंप की ओर से बताए गए आँकड़ों की पुष्टि के लिए विस्तृत आर्थिक आकलन और परियोजना संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

ताइवान और दक्षिण कोरिया के साथ घोषित समझौतों को ट्रंप प्रशासन अमेरिकी ऊर्जा निर्यात बढ़ाने की रणनीति के हिस्से के रूप में देख रहा है। एशिया में प्राकृतिक गैस की माँग के कारण अमेरिकी उत्पादकों के लिए निर्यात के अवसर बन सकते हैं। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा, परिवहन लागत, कीमतों में उतार-चढ़ाव और दूसरे आपूर्तिकर्ताओं की उपलब्धता भी इस कारोबार को प्रभावित करेगी।

ताइवान की ओर से प्रस्तावित दीर्घकालिक खरीद प्रतिबद्धता और अतिरिक्त निवेश की घोषणा अलास्का परियोजना के लिए संभावित रूप से महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद, परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित प्रतिबद्धताएँ किस तरह औपचारिक समझौतों और वास्तविक निवेश में बदलती हैं।

कुल मिलाकर,ट्रंप की घोषणा ने अलास्का की प्राकृतिक गैस पाइपलाइन परियोजना को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। ताइवान की ओर से 20 वर्षों तक 30 प्रतिशत गैस खरीदने और 4.4 अरब डॉलर निवेश करने के दावे के साथ दक्षिण कोरिया की प्रतिबद्धता भी परियोजना के केंद्र में है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि निवेश,निर्माण और गैस निर्यात की योजनाएँ किस गति से आगे बढ़ती हैं और क्या यह परियोजना अमेरिकी ऊर्जा उद्योग के लिए घोषित आर्थिक लाभ हासिल कर पाती है।