वैशाली,14 अक्टूबर (युआईटीवी)- बिहार के वैशाली जिले में नाव पलटने की एक दर्दनाक घटना ने कई परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। राघोपुर थाना क्षेत्र की रामपुर श्यामचंद पंचायत में हुए इस हादसे में 13 बच्चों की डूबने से मौत हो गई। बुधवार को जब एक साथ कई मासूमों की अर्थियाँ गाँव की गलियों से निकलीं,तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। जिन घरों में बच्चों की हँसी और किलकारियाँ गूँजती थीं,वहाँ अब अपनों को खोने का दर्द और परिजनों की चीखें सुनाई दे रही हैं।
इस त्रासदी ने पूरे गाँव को गहरे सदमे में डाल दिया है। हादसे के बाद से ही रामपुर श्यामचंद में मातम पसरा हुआ है। मृत बच्चों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। किसी माँ की आँखें अपने बच्चे को आखिरी बार देखने के बाद भी उसे तलाश रही हैं,तो कोई पिता अपने कलेजे के टुकड़े को खोने के गम में सुध-बुध खो बैठा है। गाँव के लोगों के लिए यह मंजर इतना पीड़ादायक था कि अंतिम विदाई के समय वहाँ मौजूद शायद ही कोई व्यक्ति अपने आँसू रोक पाया।
बुधवार का दिन रामपुर श्यामचंद के लोगों के लिए कभी न भूल पाने वाला दुख लेकर आया। एक साथ कई बच्चों के शवों को अंतिम विदाई देने की तैयारी हुई,तो गाँव की गलियाँ करुण क्रंदन से भर गईं। हर तरफ रोने-बिलखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। बच्चों के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि जिन बच्चों को कुछ समय पहले तक अपने सामने खेलते-कूदते देख रहे थे,वे अब इस दुनिया में नहीं रहे।
हादसे में सबसे अधिक दर्दनाक स्थिति उस परिवार की रही,जिसने एक साथ अपने सात बच्चों को खो दिया। एक ही घर से सात मासूमों के शव उठने की घटना ने हर किसी को भीतर तक झकझोर दिया। परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि आसपास के लोग भी अपने आँसू नहीं रोक सके। किसी के लिए यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि एक ही हादसे में किसी परिवार के इतने बच्चे हमेशा के लिए उससे दूर हो सकते हैं।
इस दुर्घटना में दूसरे परिवार के पाँच बच्चों की भी जान चली गई,जबकि तीसरे परिवार का एक बच्चा भी हादसे का शिकार हो गया। इस तरह कुल 13 बच्चों की मौत ने कई घरों की खुशियाँ छीन लीं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु से गाँव में शोक की लहर फैल गई। जिन परिवारों में बच्चों के भविष्य को लेकर सपने सजाए जा रहे थे,वहाँ अब असहनीय दुख और खालीपन रह गया है।
जानकारी के अनुसार,यह हादसा रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में हुआ। गाँव में एक घर पर भोज का आयोजन किया गया था। इसमें शामिल होने के लिए करीब 20 लोग एक छोटी नाव पर सवार होकर ढाब के दूसरी ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि जिस नाव का इस्तेमाल किया जा रहा था,वह पुरानी और जर्जर हालत में थी।
ग्रामीणों के लिए नाव से पानी पार करना उस समय यात्रा का एक साधन था,लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह सफर इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। नाव पर सवार लोग जब पानी के बीच पहुँचे,तभी नाव अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। नाव के पलटते ही उसमें सवार लोग पानी में गिर पड़े और डूबने लगे। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पानी में फँसे लोगों को बचाने की कोशिशों के बीच हादसे की गंभीरता सामने आने लगी। दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई। जिन परिवारों के सदस्य भोज में शामिल होने के लिए घर से निकले थे,उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कुछ ही देर बाद उनके सामने ऐसा दुखद समाचार आएगा। जिस आयोजन में शामिल होने के लिए लोग निकले थे,वह कई परिवारों के लिए जीवनभर का दर्द बन गया।
हादसे के बाद नाव की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नाव को बदलने के लिए पहले भी आवेदन दिया गया था। इसके बावजूद यदि पुरानी और जर्जर नाव का इस्तेमाल जारी था,तो यह जाँच का विषय है कि उसकी जगह सुरक्षित नाव की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
इस घटना ने जलमार्ग से आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा पर भी ध्यान खींचा है। जहाँ नाव लोगों के आवागमन का जरूरी साधन होती है, वहाँ उसकी हालत और यात्रियों की सुरक्षा की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। खासकर बच्चों और परिवारों के साथ यात्रा के दौरान सुरक्षित नाव,उसकी क्षमता और जरूरी बचाव इंतजामों का होना बेहद अहम है।
ग्रामीणों की ओर से पहले आवेदन दिए जाने की बात सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए थे। हालाँकि,हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जाँच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नाव हादसे के बाद अस्पताल में भी शोक का माहौल बना रहा। बच्चों की मौत की खबर से वहाँ मौजूद लोग और अधिकारी भी दुखी नजर आए। हादसे की गंभीरता ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मृत बच्चों के परिवारों को सँभालना मुश्किल हो रहा है,क्योंकि अपनों को खोने का दर्द हर पल उनके सामने है।
गाँव में कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। लोगों के लिए सामान्य दिनचर्या में लौटना मुश्किल हो गया है। पड़ोसी और रिश्तेदार शोकाकुल परिवारों को ढांढस बँधाने पहुँच रहे हैं,लेकिन सात बच्चों को खोने वाले परिवार या एक साथ कई संतानों की मौत का सामना कर रहे माता-पिता को सांत्वना देने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि फ्रैंकफर्ट से दिल्ली जा रही उड़ान को अलर्ट मिलने के बाद जयपुर डायवर्ट किया गया और सुबह करीब 9:45 बजे उसे आइसोलेशन वे पर पहुँचाया गया,लेकिन अलर्ट के पीछे वास्तविक कारण,विमान के भीतर की स्थिति और जाँच के दौरान सामने आए तथ्यों को लेकर अभी आधिकारिक विवरण सामने आना बाकी है।
जाँच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत जानकारी जारी किए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विमान में किसी वास्तविक सुरक्षा खतरे की आशंका थी या यह किसी अन्य कारण से उत्पन्न हुई स्थिति थी। तब तक इस मामले में हाईजैक की आशंका और वास्तविक अपहरण की घटना के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है।
