मास्को,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास एक बार फिर तेज होते दिखाई दे रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच सेंट पीटर्सबर्ग में करीब तीन घंटे तक बैठक हुई। इस मुलाकात के बाद क्रेमलिन ने संकेत दिया कि रूस अमेरिका और यूक्रेन के साथ त्रिपक्षीय शांति वार्ता फिर से शुरू करने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार है। यह बातचीत नवंबर की शुरुआत में हो सकती है। हालाँकि,अभी तक वार्ता की निश्चित तारीख,स्थान और एजेंडे को लेकर अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
रूसी राष्ट्रपति कार्यालय के सहयोगी यूरी उशाकोव ने पत्रकारों को बताया कि पुतिन और विटकॉफ के बीच हुई बैठक काफी विस्तृत और स्पष्ट रही। उनके मुताबिक,दोनों पक्षों ने रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच बातचीत दोबारा शुरू करने की संभावनाओं पर विचार किया। बैठक के दौरान युद्ध समाप्त करने के लिए चल रहे प्रयासों और हाल में सामने आए प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।
इस घटनाक्रम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है,क्योंकि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर सैन्य हमले के बाद से दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है। इस दौरान युद्ध रोकने के लिए कई कूटनीतिक पहल की गईं, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा,सीमाओं और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर मतभेदों के कारण कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। अब प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता से बातचीत की प्रक्रिया को नया अवसर मिलने की उम्मीद है।
क्रेमलिन के अनुसार,पुतिन ने अमेरिकी विशेष दूत को बताया कि रूस नवंबर की शुरुआत में त्रिपक्षीय वार्ता फिर शुरू करने के लिए तैयार है। इस बातचीत में रूस,अमेरिका और यूक्रेन के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। हालाँकि, रूस की ओर से जताई गई सहमति को फिलहाल बातचीत दोबारा शुरू करने की तैयारी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह नहीं है कि युद्ध समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर सहमति बन चुकी है।
यूरी उशाकोव ने बताया कि पुतिन और विटकॉफ की बैठक पहले से निर्धारित थी और इसकी तैयारी कई दिन पहले ही कर ली गई थी। उन्होंने इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संपर्क का उपयोगी हिस्सा बताया। उनके मुताबिक,यह पुतिन और विटकॉफ के बीच नौवीं बैठक थी। रूस और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच होने वाली नियमित फोन बातचीत के अतिरिक्त इस तरह की व्यक्तिगत मुलाकातें विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने का अवसर देती हैं।
बैठक में अमेरिकी वार्ताकार जेरेड कुशनर भी शामिल होने वाले थे,लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण वह सेंट पीटर्सबर्ग नहीं पहुँच सके। इसके बजाय उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से चर्चा में हिस्सा लिया। उशाकोव के अनुसार,कुशनर ने बातचीत के विषयों पर अपने विचार और आकलन साझा किए। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका की ओर से युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक विकल्पों पर विचार जारी है।
हालाँकि,आगामी वार्ता की सफलता कई ऐसे सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी,जिन पर रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। इनमें युद्ध के दौरान कब्जे में आए क्षेत्रों का भविष्य,यूक्रेन की सुरक्षा व्यवस्था और किसी संभावित समझौते को लागू करने की शर्तें शामिल हैं।
पुतिन के साथ बैठक से एक दिन पहले स्टीव विटकॉफ ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ बातचीत की थी। इस बैठक में यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने युद्ध समाप्त करने के लिए नए विचार और प्रस्ताव सामने रखे थे। चर्चा का मुख्य उद्देश्य ऐसा समाधान तलाशना था,जिससे युद्ध रोका जा सके और भविष्य में संघर्ष दोबारा शुरू होने की आशंका कम हो।
यूरी उशाकोव ने बताया कि विटकॉफ ने पुतिन को ओस्लो में हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यूक्रेन और यूरोपीय देशों की ओर से सामने रखे गए विचारों तथा उनके रुख से भी रूसी राष्ट्रपति को अवगत कराया। हालाँकि,उशाकोव के मुताबिक, रूस को इन प्रस्तावों में यूक्रेन संकट के समाधान के लिहाज से बहुत कम उपयोगी बातें नजर आईं।
रूस की इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट होता है कि शांति वार्ता दोबारा शुरू करने की सैद्धांतिक तैयारी के बावजूद प्रस्तावों की शर्तों पर सहमति बनना आसान नहीं होगा। किसी भी संभावित समझौते के लिए दोनों पक्षों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं और राजनीतिक मांगों पर विचार करना जरूरी होगा। रूस और यूक्रेन की प्राथमिकताओं में अंतर होने के कारण बातचीत के दौरान कई कठिन मुद्दे उठ सकते हैं।
ओस्लो में हुई चर्चा में यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी,युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण और यूरोप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था जैसे विषय शामिल थे। यूक्रेन और उसके सहयोगियों का जोर इस बात पर है कि युद्ध समाप्त होने के बाद ऐसी व्यवस्था बनाई जाए,जिससे भविष्य में रूस की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई को रोका जा सके।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका के साथ बातचीत में सुरक्षा गारंटी को प्रमुख मुद्दा बनाया है। कीव का रुख है कि युद्ध समाप्त करने के लिए होने वाले किसी भी समझौते में यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। यूक्रेन चाहता है कि शांति समझौते के बाद उसे भविष्य में संभावित हमलों से बचाने के लिए ठोस और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था मिले।
यूक्रेन के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है,क्योंकि केवल युद्धविराम हो जाने से लंबे समय की सुरक्षा संबंधी चिंताएँ समाप्त नहीं होंगी। यदि किसी समझौते के बाद फिर से सैन्य संघर्ष शुरू होता है,तो युद्ध रोकने के प्रयासों पर सवाल उठ सकते हैं। इसीलिए यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को शांति प्रक्रिया का अहम हिस्सा मानते हैं।
दूसरी ओर,रूस ने ओस्लो में सामने आए प्रस्तावों को लेकर संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इससे यह स्पष्ट है कि सुरक्षा गारंटी और युद्ध के बाद की व्यवस्था पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण रहेगा। प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता में इन विषयों पर चर्चा होने की संभावना है,लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों पक्ष किन शर्तों पर समझौते के लिए तैयार हो सकते हैं।
यूरोपीय देशों की भूमिका भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है। यूक्रेन की सुरक्षा और यूरोप की क्षेत्रीय स्थिरता एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए यूरोपीय सहयोगी चाहते हैं कि युद्ध समाप्त करने के साथ-साथ भविष्य में किसी नए सैन्य टकराव की आशंका को कम करने के उपाय भी तय किए जाएँ।
पुतिन और विटकॉफ की बैठक में युद्ध के अलावा ऊर्जा व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हुई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक,दोनों पक्षों ने रूसी डीजल की आपूर्ति से संबंधित व्यवस्था पर चर्चा की। इसके साथ ही रूस और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
ऊर्जा व्यापार रूस की अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालाँकि,यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर लगाए गए प्रतिबंध दोनों देशों के आर्थिक संपर्क के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे माहौल में ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े विषयों पर बातचीत का महत्व बढ़ जाता है।
फिर भी,ऊर्जा व्यापार पर चर्चा होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों के बीच किसी नए समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है। उपलब्ध जानकारी में ऐसी किसी अंतिम सहमति की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल यह कहा जा सकता है कि दोनों पक्षों की बातचीत में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विषयों के साथ आर्थिक मुद्दों को भी जगह मिली।
अमेरिका की मध्यस्थता में युद्ध समाप्त करने की कोशिशों के दौरान राजनीतिक समाधान और आर्थिक संबंधों जैसे विषयों पर विचार किया जाता रहा है। हालाँकि,आर्थिक सहयोग की संभावनाओं के बावजूद रूस पर लागू प्रतिबंध और युद्ध से जुड़े मतभेद व्यापक समझौते की राह में बाधा बने हुए हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था। तब से दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष जारी है और इसे समाप्त करने के लिए विभिन्न स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास किए गए हैं। अमेरिका ने भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने और शांति का रास्ता तलाशने में भूमिका निभाई है। इसके बावजूद सीमाओं,सुरक्षा और युद्ध के बाद की व्यवस्था से जुड़े मतभेदों के कारण स्थायी समाधान हासिल नहीं हो सका है।
अब पुतिन और विटकॉफ की बैठक के बाद त्रिपक्षीय वार्ता फिर शुरू होने की संभावना सामने आई है। यदि नवंबर की शुरुआत में बातचीत होती है,तो रूस,अमेरिका और यूक्रेन को अपने-अपने रुख स्पष्ट करने और संभावित समझौते के आधार पर चर्चा करने का अवसर मिल सकता है। हालाँकि,वार्ता की तारीख और अन्य व्यवस्थाओं की पुष्टि होना अभी बाकी है।
रूस ने नए शांति प्रस्तावों को लेकर आपत्तियाँ जताई हैं,जबकि यूक्रेन अपनी संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन चाहता है। ऐसे में किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाना जरूरी होगा। युद्ध के दौरान कब्जे में आए क्षेत्रों का भविष्य,सुरक्षा गारंटी और समझौते के पालन की व्यवस्था जैसे विषय बातचीत को जटिल बना सकते हैं।
कुल मिलाकर,पुतिन और अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच करीब तीन घंटे चली बैठक ने शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावना को आगे बढ़ाया है। रूस की ओर से नवंबर की शुरुआत में त्रिपक्षीय बातचीत के लिए सैद्धांतिक सहमति एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है,लेकिन इसे युद्ध समाप्त होने का संकेत नहीं माना जा सकता। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित वार्ता कब आयोजित होती है, उसमें किन मुद्दों पर चर्चा होती है और क्या रूस तथा यूक्रेन अपने मतभेद कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठा पाते हैं।
