प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (तस्वीर क्रेडिट@seriousfunnyguy)

नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने का न्योता,भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी को किया सलाम

यरुशलम,23 अक्टूबर (युआईटीवी)- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत और इजरायल के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और भविष्य में सहयोग को और आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। इसके साथ ही पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई। दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बातचीत का एक खास पहलू भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से जुड़ा रहा। नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में कैप्टन मच्छार के साथ मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने भारतीय पायलट के साहस की प्रशंसा करते हुए उन्हें भारत का वीर पायलट बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के बाद सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इजरायली प्रधानमंत्री का फोन आया था और दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में जारी प्रगति पर चर्चा की। मोदी के अनुसार,बातचीत के दौरान दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में हाल में हुए घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता बहाल करने की तत्काल जरूरत को रेखांकित किया गया। इस बातचीत से स्पष्ट हुआ कि भारत और इजरायल अपने रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय परिस्थितियों पर भी एक-दूसरे के साथ संवाद बनाए हुए हैं।

इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी इस बातचीत के बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर एक वीर भारतीय पायलट के साथ समारोह की मशाल जलाने का निमंत्रण दिया है। नेतन्याहू ने यह भी बताया कि मोदी ने इस आमंत्रण के लिए उनका आभार व्यक्त किया। बातचीत में आतंकवाद के खिलाफ भारत और इजरायल के सहयोग का मुद्दा भी सामने आया। नेतन्याहू के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश जमीन और आसमान, दोनों जगह आतंकवाद के विरुद्ध मिलकर खड़े हैं। इस दौरान दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और आपसी सहयोग की भी सराहना की गई।

इस बातचीत में कैप्टन स्मित मच्छार का उल्लेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। सितंबर के अंतिम दिनों में एक विमान में हुई गंभीर घटना के दौरान उनके साहस और सूझबूझ ने कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर को तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक उड़ान में ओमानी सह-पायलट ने कथित तौर पर विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की थी। इस दौरान कैप्टन मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हालाँकि,कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हमलावर का सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे।

बताया गया है कि कॉकपिट का दरवाजा खुलने के बाद चालक दल के दूसरे सदस्यों और यात्रियों को अंदर पहुँचने तथा कथित हमलावर को काबू करने का अवसर मिला। विमान में 170 से अधिक लोग सवार थे। ऐसे में यह घटना बेहद गंभीर हो सकती थी। कैप्टन मच्छार के साहसिक कदम से स्थिति को सँभालने में मदद मिली और एक बड़ी दुर्घटना टल गई। इस घटना के बाद उनके प्रयासों की सराहना की गई। अब इजरायल के प्रधानमंत्री की ओर से उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह में विशेष सम्मान देने का प्रस्ताव उनके साहस को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के रूप में देखा जा रहा है।

कैप्टन मच्छार के साथ मशाल जलाने का निमंत्रण इसलिए भी उल्लेखनीय है,क्योंकि इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्ज्वलित करना सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इस परंपरा के माध्यम से ऐसे लोगों को सम्मानित किया जाता है, जिनके कार्यों और योगदान को देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नेतन्याहू ने भारतीय पायलट को इस समारोह में शामिल करने की इच्छा जाहिर कर यह संकेत दिया है कि उनके साहस को इजरायल में भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को भी उनके साथ मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना भारत और इजरायल के रिश्तों के प्रतीकात्मक महत्व को बढ़ाता है।

यह पहली बार नहीं है,जब नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की हो। इससे पहले तीन अक्टूबर को इजरायली प्रधानमंत्री ने भारतीय पायलट से फोन पर बातचीत की थी। उस समय भी उन्होंने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का निमंत्रण दिया था। नेतन्याहू ने पायलट को भारत, इजरायल और पूरी दुनिया का सच्चा नायक बताते हुए उनके साहस की सराहना की थी।

उस बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कहा था कि वह प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन मच्छार को अपने देश के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। उन्होंने दोनों को भारत और इजरायल के बहादुर लोगों का प्रतिनिधि बताते हुए कहा था कि उनका साहस पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है। नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना भी की थी। इससे पता चलता है कि इजरायली प्रधानमंत्री इस घटना के बाद से लगातार भारतीय पायलट के संपर्क और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित रहे हैं।

नेतन्याहू ने पहले की बातचीत में यह भी स्पष्ट किया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने का सम्मान आम तौर पर इजरायल के नागरिकों को दिया जाता है। हालाँकि,कैप्टन मच्छार के मामले में उन्होंने विशेष अपवाद की बात कही थी। उनका कहना था कि इजरायल के लोग भारतीय पायलट को अपना मान रहे हैं और आगे भी उन्हें इसी भावना से अपनाते रहेंगे। यह टिप्पणी केवल एक व्यक्ति की बहादुरी की प्रशंसा तक सीमित नहीं थी,बल्कि इसमें भारत और इजरायल के लोगों के बीच आत्मीयता और सम्मान का संदेश भी शामिल था।

तीन अक्टूबर को हुई बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार से विमान के कॉकपिट में हुई घटना के बारे में जानकारी भी ली थी। घटना की परिस्थितियों को समझने के बाद उन्होंने पायलट के साहस,धैर्य और कठिन समय में संयम बनाए रखने की क्षमता की प्रशंसा की। विमान में अचानक पैदा हुई ऐसी स्थिति में चालक दल के सदस्यों के सामने यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी होती है। ऐसे समय में किसी भी फैसले का असर विमान में मौजूद सभी लोगों की जान पर पड़ सकता है। कैप्टन मच्छार ने गंभीर खतरे के बीच जिस तरह स्थिति का सामना किया,उसी कारण उनके प्रयासों को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

नेतन्याहू ने यह भी कहा था कि कैप्टन मच्छार ने केवल विमान में सवार लोगों की जान बचाने में योगदान नहीं दिया,बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दिया कि साहस,एकजुटता और सूझबूझ के सहारे खतरनाक परिस्थितियों का मुकाबला किया जा सकता है। उनके मुताबिक,पायलट और यात्री मिलकर बेहद कठिन हालात का सामना कर सकते हैं। इस घटना ने विमानन सुरक्षा और आपात स्थिति में चालक दल की भूमिका को लेकर भी ध्यान आकर्षित किया है।

इजरायली प्रधानमंत्री ने पिछली बातचीत के अंत में कैप्टन मच्छार को दोबारा अपने देश आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने उनसे फिर मुलाकात करने की इच्छा जताते हुए कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनकी यात्रा यादगार और ऐतिहासिक हो सकती है। अब प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई ताजा बातचीत में स्वतंत्रता दिवस समारोह का निमंत्रण फिर सामने आने से यह मुद्दा एक बार दोबारा चर्चा में आ गया है।

प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई ताजा बातचीत का महत्व केवल कैप्टन मच्छार को दिए गए निमंत्रण तक सीमित नहीं है। दोनों नेताओं ने भारत और इजरायल के बीच जारी सहयोग की समीक्षा की और साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों देशों के संबंध रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित संवाद आपसी प्राथमिकताओं और साझा चुनौतियों पर चर्चा करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

पश्चिम एशिया के हालात पर हुई चर्चा भी इस बातचीत का अहम हिस्सा रही। क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की जरूरत पर दोनों नेताओं का जोर ऐसे समय में सामने आया है,जब वहाँ के घटनाक्रम अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। हालाँकि,बातचीत के बारे में जारी जानकारी में किसी खास प्रस्ताव या नई पहल का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया,लेकिन दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्षेत्रीय परिस्थितियों पर विचार साझा किए और स्थिरता की आवश्यकता पर सहमति जताई।

कैप्टन स्मित मच्छार को स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित करने का प्रस्ताव इस पूरी बातचीत का मानवीय और प्रतीकात्मक पहलू है। एक ओर दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर ध्यान दे रहे हैं,वहीं दूसरी ओर एक भारतीय पायलट की बहादुरी को सम्मानित करने की इच्छा भी जाहिर की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन मच्छार इस निमंत्रण को स्वीकार कर शामिल होते हैं या नहीं। फिलहाल,नेतन्याहू की पहल ने कैप्टन मच्छार के साहस और भारत-इजरायल की मित्रता,दोनों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।