मद्रास हाईकोर्ट ने एनएमसी को प्राइवेट मेडिकल कॉलेज सीटों के लिए कम शुल्क तय करने का दिया निर्देश

चेन्नई, 9 सितम्बर (युआईटीवी/आईएएनएस)- मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को निर्देश दिया कि वह डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेजों के लिए फीस संबंधित मामले में 3 फरवरी को जारी एक ज्ञापन पर फिर से विचार करें। विशेष रूप से, एनएमसी ने 3 फरवरी को एक ज्ञापन जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटों के लिए शुल्क संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एकत्र किए गए शुल्क के बराबर होना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और न्यायमूर्ति एन माला ने एनएमसी से ज्ञापन पर फिर से विचार करने का आह्वान किया, क्योंकि कुछ पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया है। जिसमें हाई फीस के कारण अन्य 50 प्रतिशत में कई सीटों के खाली होने की संभावना आदि शामिल है।

न्यायाधीशों ने आदेश दिया कि पुनर्विचार जल्द से जल्द किया जाना चाहिए, लेकिन तब तक वर्तमान शुल्क नियम जारी रहेगा।

कोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी के डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेजों के एक समूह द्वारा दायर रिट याचिकाओं के एक बैच पर फैसला सुनाया गया। रिट याचिका में 3 फरवरी को जारी ज्ञापन को चुनौती दी गई थी।

हालांकि, पीठ ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019 की धारा 10(1)(आई) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, जिसके तहत कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया था।

बता दें, यह प्रावधान एनएमसी को निजी मेडिकल कॉलेजों के डीम्ड यूनिवर्सिटी में 50 प्रतिशत सीटों के संबंध में फीस और अन्य शुल्क के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का अधिकार देता है।

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