PM Modi lays foundation stone of AIIMS Rajkot, Gujarat.

‘कोरोना काल के नए अनुसंधानों और प्रयोगों ने जीवन नवनिर्माण का सकारात्मक मार्ग बनाया’

भोपाल, 14 नवंबर (युआईटीवी/आईएएनएस)| मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोविड के बाद जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान-उद्यमिता और चिकित्सकीय नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया के 16 देशों के 130 प्रतिभागी की हिस्सेदारी रही। सभी ने माना कि कोरोना काल में जीवन के नवनिर्माण का सकारात्मक मार्ग बना। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आए वक्ताओं ने कहा, महामारी के पीड़ादायक काल में जीवन बचाने के संघर्ष ने नवीन अनुसंधानों और प्रयोगों के माध्यम से जीवन के नवनिर्माण का सकारात्मक मार्ग प्रशस्त हुआ है। भारत ने कोरोना महामारी की वैश्विक आपदा के दौरान अनुसंधान और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भरता के नए अवसरों का निर्माण किया है।

मध्यप्रदेश कांउसिल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी तथा श्री सत्य साईं महिला महाविद्यालय भोपाल द्वारा हाईब्रिड मोड में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में 16 देशों के 130 प्रतिभागी सम्मिलित हुए। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च फॉर एन्वायरमेंटल हेल्थ के निदेशक डॉ. राजनारायण तिवारी ने कहा कि क्लीनिकल ट्रायल एक्टीविटी ने बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों में चिकित्सा विज्ञान व पद्धतियों के संबंध में नए निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं।

सम्मेलन के चार तकनीकी सत्र में 27 प्रतिभागियों ने शोध समीक्षा प्रस्तुत की। ग्लोबल स्ट्रेजी एवं एसआरएस लाइफ साइंस हेल्थ केयर सिंगापुर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. राजन दुबे, सरबिया विश्वविद्यालय की प्राध्यापक डॉ. जारोस्लावा गेजिक सहित देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थाओं के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

वनस्पति शास्त्र एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान की विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित तकनीकी सत्र में दस छात्राओं ने भी शोध समीक्षाएं प्रस्तुत की। सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पेपर और पोस्टर प्रस्तुति के लिए पुरस्कार प्रदान किए गए। श्री सत्य साईं महिला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. आशा अग्रवाल ने सभी का आभार माना।

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