चेन्नई,27 फरवरी (युआईटीवी)- चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम में गुरुवार को खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 मुकाबले में भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 4 विकेट पर 256 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इस धमाकेदार पारी के केंद्र में रहे युवा सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा,जिन्होंने 30 गेंदों में 55 रन बनाकर न सिर्फ टीम को मजबूत शुरुआत दी,बल्कि आलोचकों को भी करारा जवाब दिया। बाएँ हाथ के इस 25 वर्षीय बल्लेबाज ने अपनी पारी में चार छक्के और चार चौके जड़े और मैच के बाद कहा कि वह इस खास पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।
टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में अभिषेक का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। लीग स्टेज में वह तीन बार बिना खाता खोले आउट हुए,जिससे उन पर सवाल उठने लगे थे। स्थिति और कठिन तब हो गई,जब पेट में इन्फेक्शन के कारण उन्हें नामीबिया के खिलाफ मैच से बाहर होना पड़ा और इलाज के लिए नई दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे में सुपर-8 के इस अहम मुकाबले में उनकी वापसी और 26 गेंदों में अर्धशतक भारत की सेमीफाइनल की राह में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
मिड-इनिंग्स बातचीत में अभिषेक ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा कि टीम के लिए योगदान देना हमेशा खास होता है और वह इस पल का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि पूरे टूर्नामेंट में उन्हें पर्याप्त गेंदें खेलने का मौका नहीं मिला था और वह बस क्रीज पर समय बिताना चाहते थे। उनके शब्दों में राहत और आत्मविश्वास दोनों झलक रहे थे। उन्होंने कहा कि जब आप मुश्किल दौर से गुजरते हैं और फिर वापसी करते हैं,तो वह संतोष अलग ही होता है।
अभिषेक ने अपने अच्छे प्रदर्शन का श्रेय टीम के सहयोग और समर्थन को भी दिया। उन्होंने कहा कि टीम के साथियों ने कभी उन्हें यह महसूस नहीं होने दिया कि वह रन नहीं बना रहे हैं। प्रैक्टिस सेशन हो या होटल का माहौल,सभी ने उनका मनोबल ऊँचा बनाए रखा। उन्होंने बताया कि साथी खिलाड़ी लगातार उन्हें याद दिलाते रहे कि उन्होंने पहले भी अच्छा प्रदर्शन किया है और उनका अच्छा समय दूर नहीं है। यही भरोसा उन्हें आत्मविश्वास देता रहा।
मैच की बात करें तो भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। अभिषेक और उनके साथी सलामी बल्लेबाज ने तेज शुरुआत कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। शुरुआती ओवरों में कुछ गेंदों पर लय नहीं मिल रही थी,लेकिन जैसे-जैसे वह क्रीज पर टिके, उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। उन्होंने गेंदबाजों की लंबाई को जल्दी समझा और अपने पसंदीदा शॉट्स खेलने शुरू कर दिए। कवर ड्राइव से लेकर पुल शॉट तक,हर स्ट्रोक में आत्मविश्वास झलक रहा था।
भारत की पारी के अंतिम ओवरों को कई विशेषज्ञों ने ‘वीडियो गेम जैसा’ बताया। इस पर अभिषेक ने सहमति जताते हुए कहा कि जिस तरह से टीम ने पारी को फिनिश किया,उससे साफ था कि वही इरादा वापस आ गया है,जैसा वे पूरे साल दिखाते आए हैं। उन्होंने खुलासा किया कि मैच से पहले टीम की स्पष्ट रणनीति थी कि अगर बल्लेबाजों को लगे कि उन्होंने पर्याप्त गेंदें देख ली हैं,तो वे खुलकर अपने शॉट्स खेलेंगे। यही योजना अभ्यास सत्रों में भी तय की गई थी और बल्लेबाजी इकाई को खुद को अभिव्यक्त करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई थी।
अभिषेक ने कहा कि शुरुआत में सब कुछ सहज नहीं था,लेकिन टीम का संदेश साफ था कि आत्मविश्वास बनाए रखें और अपनी प्राकृतिक शैली में खेलें। पूरे साल टीम ने इसी आक्रामक अंदाज को अपनाया है और आगे भी यही तरीका जारी रहेगा। उनके अनुसार,एक-दूसरे का समर्थन और भरोसा ही टीम की सबसे बड़ी ताकत है।
युवा बल्लेबाज की यह पारी सिर्फ आँकड़ों तक सीमित नहीं थी,बल्कि यह मानसिक मजबूती और धैर्य की मिसाल भी थी। लगातार असफलताओं और स्वास्थ्य समस्याओं के बाद इतनी बड़ी वापसी आसान नहीं होती,लेकिन अभिषेक ने दिखा दिया कि वह दबाव में भी खुद को सँभाल सकते हैं। उनकी इस पारी ने न केवल टीम को मजबूत स्थिति में पहुँचाया,बल्कि उनके व्यक्तिगत आत्मविश्वास को भी नई ऊँचाई दी।
भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला बेहद अहम था,क्योंकि सुपर-8 चरण में हर जीत सेमीफाइनल की दौड़ में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। ऐसे में अभिषेक की आक्रामक शुरुआत ने टीम को वह मंच दिया,जिस पर बाद के बल्लेबाजों ने विशाल स्कोर खड़ा किया। चेन्नई के दर्शकों ने भी उनकी पारी का भरपूर आनंद लिया और हर चौके-छक्के पर तालियों की गूंज सुनाई दी।
अब आगे के मुकाबलों में अभिषेक से और भी बड़ी पारियों की उम्मीद की जाएगी। उनकी यह वापसी टीम के लिए शुभ संकेत है। यदि वह इसी आत्मविश्वास के साथ खेलते रहे,तो भारत की सेमीफाइनल की राह और मजबूत हो सकती है। फिलहाल,चेन्नई की यह शाम अभिषेक शर्मा के नाम रही,जिन्होंने मुश्किल दौर के बाद अपने बल्ले से जवाब देते हुए साबित कर दिया कि उनका अच्छा समय सचमुच लौट आया है।
