काबुल,2 मार्च (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से उबाल कर रहा तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदलता नजर आ रहा है। सोमवार को अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु सेना ने पाकिस्तान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों पर सटीक और समन्वित हवाई अभियान चलाया है। मंत्रालय के अनुसार यह कार्रवाई हाल ही में पाकिस्तान द्वारा काबुल और बगराम पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है। इस घटनाक्रम ने दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व तल्खी ला दी है और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं।
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि अफगान वायु सेना ने रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस,क्वेटा (बलूचिस्तान) में स्थित 12वीं डिवीजन मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा के मोहमंद एजेंसी क्षेत्र में मौजूद ख्वाजई कैंप को निशाना बनाया। मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि इन हमलों के दौरान पाकिस्तान के कई अन्य रणनीतिक कमांड सेंटरों को भी टारगेट किया गया। प्रारंभिक आकलन के आधार पर अफगानिस्तान ने कहा है कि उसके हवाई हमलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये हमले पाकिस्तान द्वारा हाल ही में काबुल और बगराम पर किए गए हवाई अभियानों के जवाब में किए गए हैं। मंत्रालय ने चेतावनी भरे लहजे में दोहराया कि यदि पाकिस्तान अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करता है या कोई और आक्रामक कदम उठाता है,तो उसका जवाब “तेज,निर्णायक और संतुलित” होगा। इस बयान से स्पष्ट है कि काबुल की ओर से अब किसी भी उकसावे पर कड़ी प्रतिक्रिया की नीति अपनाई जा रही है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई,जब पाकिस्तान ने अफगान तालिबान प्रशासन के खिलाफ खुले युद्ध की घोषणा की और सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़पें तेज हो गईं। पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार को काबुल और कंधार में हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में अफगान बलों ने पाकिस्तानी सीमा सैनिकों पर हमला किया। अब ताजा हवाई अभियानों ने संघर्ष को और व्यापक बना दिया है।
तालिबान प्रशासन ने दावा किया है कि उसके जवाबी हमलों में 32 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं। हालाँकि,पाकिस्तान की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार,ये ऑपरेशन 203 मन्सूरी,201 सिलाब और 205 अल-बदर कोर द्वारा संयुक्त रूप से अंजाम दिए गए। मंत्रालय का कहना है कि इन अभियानों में कई पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, 10 घायल हुए और चार सैन्य चौकियाँ नष्ट कर दी गईं।
रक्षा मंत्रालय के उप प्रवक्ता सेदीकुल्लाह नसरत ने बताया कि अफगान बलों ने नंगरहार, पाक्तिया,खोस्त और कंधार प्रांतों में आधुनिक हथियारों और लेजर तकनीक का उपयोग करते हुए आक्रामक अभियान चलाए। उनके अनुसार इन अभियानों का नेतृत्व 203 मन्सूरी, 201 खालिद बिन वलीद और 205 अल-बदर कोर ने किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अफगान बलों ने पाकिस्तान की सेना के दो ड्रोन मार गिराए,जो कथित तौर पर अफगान हवाई क्षेत्र में निगरानी कर रहे थे।
रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस पाकिस्तान वायु सेना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है। यह एयरबेस पहले भी सुर्खियों में रहा था,जब मई 2025 में भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इसे निशाना बनाया गया था। उस हमले के बाद एयरबेस की मरम्मत और पुनर्स्थापना की गई थी। अब एक बार फिर इस ठिकाने पर हमले का दावा क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को जटिल बना रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का मुख्य कारण सीमा पार आतंकवाद,टीटीपी की गतिविधियाँ और ड्यूरंड रेखा को लेकर विवाद है। पाकिस्तान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान प्रशासन उसकी सीमा के भीतर सक्रिय उग्रवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा। दूसरी ओर, अफगानिस्तान पाकिस्तान पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन और हवाई हमलों के जरिए दबाव बनाने का आरोप लगाता रहा है।
वर्तमान हालात में दोनों देशों के बीच पूर्ण सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी इस घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं,क्योंकि यह संघर्ष पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियाँ अब तक संयम बरतने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने की अपील करती रही हैं,लेकिन जमीनी हालात तेजी से बदल रहे हैं।
अफगान रक्षा मंत्रालय की ओर से दोहराई गई चेतावनी यह संकेत देती है कि काबुल अब रक्षात्मक मुद्रा से आगे बढ़कर सक्रिय जवाबी रणनीति अपना रहा है। वहीं पाकिस्तान की ओर से अभी तक आधिकारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन सैन्य हलकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
सीमा पर बढ़ते तनाव,हवाई हमलों के दावे और सैनिकों की मौत के आँकड़ों ने दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या दोनों देश कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं या फिर यह टकराव और व्यापक रूप लेता है। फिलहाल,अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच हालिया घटनाएँ दक्षिण एशिया में एक नए और खतरनाक अध्याय की शुरुआत का संकेत दे रही हैं।
