अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर भीषण संघर्ष (तस्वीर क्रेडिट@kashmirwatch06)

अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर भीषण संघर्ष,हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई में दर्जनों लोगों की मौत

काबुल,28 फरवरी (युआईटीवी)- अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव ने शुक्रवार को गंभीर सैन्य टकराव का रूप ले लिया। दोनों देशों की सेनाओं के बीच हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद पूर्वी अफगान प्रांतों खोस्त और पक्तिका में भारी जनहानि की खबर है। अफगानिस्तान सरकार के उपप्रवक्ता हमदुल्ला फितरत ने बताया कि पाकिस्तान के साथ हुई झड़पों के बाद कम-से-कम 19 लोगों की मौत हो गई और 26 अन्य घायल हो गए। मृतकों में ज्यादातर महिलाएँ और बच्चे बताए जा रहे हैं,जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

फितरत के अनुसार,यह हिंसा पाकिस्तान द्वारा की गई हवाई कार्रवाई के बाद भड़की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने अफगानिस्तान के कई इलाकों को निशाना बनाया,जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। दूसरी ओर,तालिबान सरकार के प्रमुख प्रवक्ता बीहुल्लाह मुजाहिद ने कंधार में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि काबुल और इस्लामाबाद के बीच बढ़ते तनाव के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय एक “खास समूह” की भूमिका है,जो क्षेत्र को अस्थिर करने का मिशन चला रहा है। उन्होंने पड़ोसी देशों से अपील की कि वे ऐसे तत्वों को रोकें जो उपद्रव को बढ़ावा दे रहे हैं।

मुजाहिद ने दावा किया कि अफगानिस्तान की सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को “सटीक निशाना” बनाया। जब उनसे पूछा गया कि क्या क्षेत्रीय देश इस संघर्ष को रोकने की कोशिश कर रहे हैं,तो उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान हमेशा मसलों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और पाकिस्तान के साथ कई दौर की बातचीत कर चुका है,लेकिन इस्लामाबाद वार्ता के जरिए समाधान के लिए तैयार नहीं था। उनके मुताबिक पाकिस्तान लगातार जंग के बहाने गढ़ता है और अपने आंतरिक संकटों को अफगानिस्तान से जोड़ने की कोशिश करता है।

संघर्ष की शुरुआत तब हुई,जब पाकिस्तान ने गुरुवार रात अफगानिस्तान के काबुल,कंधार और पक्तिया प्रांतों में हवाई हमले किए। मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने इन इलाकों में कई ठिकानों पर बमबारी की। इन हमलों में 13 अफगान सैनिकों की मौत हो गई और 22 अन्य घायल हो गए। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। तालिबान के उपप्रवक्ता फितरत ने बताया कि अफगान एयर फोर्स ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद,नौशेरा,जमरूद और एबटाबाद में स्थित सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की।

फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की एयर फोर्स ने इस्लामाबाद के फैजाबाद क्षेत्र के पास एक सैन्य कैंप,नौशेरा में एक आर्मी कैंटोनमेंट, जमरूद मिलिट्री कॉलोनी और एबटाबाद में स्थित ठिकानों को निशाना बनाया। उनके अनुसार,ये हमले काबुल,कंधार और पक्तिया में पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक के जवाब में किए गए और सफलतापूर्वक पाकिस्तानी सेना के महत्वपूर्ण सैन्य ढाँचों को नुकसान पहुँचाया गया।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि सीमा पर की गई जवाबी कार्रवाई में कम-से-कम 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 19 चौकियों के साथ दो सैन्य अड्डों पर कब्जा कर लिया गया। हालाँकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि इस ऑपरेशन में आठ अफगान सैनिक मारे गए और 11 अन्य घायल हुए।

इस बीच नागरिक हताहतों की खबरों ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अफगान रक्षा मंत्रालय ने बताया कि नंगरहार प्रांत में एक शरणार्थी शिविर पर पाकिस्तानी मिसाइल हमले में महिलाओं और बच्चों समेत 13 अफगान नागरिक घायल हो गए। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक,सीमा के पास बसे गाँवों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा।

पाकिस्तान की ओर से जारी रिपोर्टों में कहा गया है कि गुरुवार को सीमा पर अफगान सेना की जवाबी कार्रवाई के खिलाफ ‘ऑपरेशन गजब लिल-हक’ शुरू किया गया। पाकिस्तानी मीडिया डॉन के अनुसार,पाकिस्तान एयर फोर्स ने काबुल,कंधार और पक्तिया में कथित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए। इस्लामाबाद का कहना है कि ये हमले सीमापार से हो रही आतंकी गतिविधियों और हमलों के जवाब में किए गए।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं,खासकर डूरंड रेखा को लेकर विवाद और सीमापार उग्रवादी गतिविधियों के आरोपों के कारण। तालिबान के सत्ता में आने के बाद भी दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता नहीं आ पाई है। पाकिस्तान बार-बार आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ हमलों के लिए किया जा रहा है,जबकि काबुल इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि पाकिस्तान अपने आंतरिक सुरक्षा संकटों का ठीकरा अफगानिस्तान पर फोड़ रहा है।

हालिया संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है,तो यह व्यापक संघर्ष का रूप ले सकती है,जिसका असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में किसी भी प्रकार की गलतफहमी या उकसावे से हालात और बिगड़ सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। अभी तक किसी बड़े वैश्विक संगठन की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन उम्मीद की जा रही है कि संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय शक्तियाँ दोनों देशों से संयम बरतने की अपील करेंगी। मानवीय संकट की आशंका भी बढ़ रही है,क्योंकि सीमा के पास बसे हजारों लोगों की सुरक्षा खतरे में है।

अफगानिस्तान के प्रवक्ताओं ने दोहराया है कि उनका देश शांति चाहता है और संवाद के लिए तैयार है,लेकिन यदि उस पर हमला किया जाता है,तो वह जवाब देने में संकोच नहीं करेगा। वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है और वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

दोनों देशों के बीच जारी यह ताजा टकराव ऐसे समय में हुआ है,जब क्षेत्र पहले ही राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। सीमाई इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों के लिए यह संघर्ष भय और अनिश्चितता लेकर आया है। महिलाएँ और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं,जिनकी सुरक्षा को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने चिंता जताई है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक स्तर पर कोई पहल होती है या फिर दोनों देश सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हैं। फिलहाल सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और दोनों पक्षों की ओर से सख्त बयानबाजी जारी है। यदि शीघ्र ही संवाद की राह नहीं निकली,तो यह संघर्ष और गहरा सकता है,जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।