नई दिल्ली,7 अक्टूबर (युआईटीवी)- भारत की प्रमुख दूरसंचार कंपनी वोडाफोन आइडिया (वीआई) के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई तय हुई है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह वोडाफोन आइडिया द्वारा दायर उस याचिका पर 13 अक्टूबर को सुनवाई करेगा,जिसमें कंपनी ने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) बकाया पर लगाए गए ब्याज,जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को माफ करने की माँग की है। यह मामला वर्षों से जारी एजीआर विवाद से जुड़ा हुआ है,जिसने भारत की टेलीकॉम इंडस्ट्री को गहरे वित्तीय संकट में डाल दिया था।
वोडाफोन आइडिया ने अदालत में अपने आवेदन में कहा है कि वह अपनी पहली याचिका में संशोधन करना चाहती है। कंपनी ने पहले जो याचिका दायर की थी,उसमें उसने वित्त वर्ष 2019 तक दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा माँगी गई 9,450 करोड़ रुपये की अतिरिक्त एजीआर माँग को रद्द करने की माँग की थी। अब संशोधित याचिका में कंपनी ने इस अतिरिक्त माँग के साथ-साथ ब्याज,जुर्माना और जुर्माने पर ब्याज को माफ करने की गुहार लगाई है।
कंपनी का कहना है कि एजीआर बकाया का भुगतान न कर पाना जानबूझकर नहीं किया गया,बल्कि यह एक वास्तविक वित्तीय कठिनाई थी। वीआई ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा है कि एजीआर विवाद वर्षों से अनिश्चितता में घिरा हुआ था और भुगतान के मुद्दे पर विभिन्न व्याख्याएँ थीं,जिससे कंपनियों को सही अनुमान लगाना मुश्किल था कि सरकार की माँगें आखिरकार किस आधार पर तय होंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस मामले को 6 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया था,क्योंकि सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से अतिरिक्त समय माँगा था। मेहता ने कहा था कि दूरसंचार विभाग को वोडाफोन आइडिया की याचिका पर विस्तृत जवाब तैयार करने में कुछ समय लगेगा। उस दौरान वोडाफोन आइडिया ने सरकार की इस माँग का विरोध नहीं किया था।
इससे पहले 19 सितंबर को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि वह वोडाफोन आइडिया की याचिका का विरोध नहीं कर रही है। सरकार ने यह भी कहा था कि इस मामले का समाधान अत्यंत आवश्यक है,क्योंकि वोडाफोन आइडिया में अब सरकार की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है। यह हिस्सेदारी तब बनी जब कंपनी की ब्याज देनदारियों को इक्विटी में परिवर्तित किया गया। हालाँकि,सरकार को इस हिस्सेदारी के बावजूद कंपनी का ‘प्रमोटर’ नहीं माना गया है।
केंद्र ने अदालत को यह भी बताया कि वह वोडाफोन आइडिया को बचाने के पक्ष में है,क्योंकि यह कंपनी देश की दूरसंचार व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यदि वोडाफोन आइडिया जैसी बड़ी कंपनी वित्तीय रूप से अस्थिर होती है,तो इससे न केवल उपभोक्ताओं पर बल्कि पूरे दूरसंचार उद्योग पर व्यापक असर पड़ेगा। सरकार ने कहा कि वोडाफोन आइडिया को स्थिरता देने के लिए एक व्यावहारिक समाधान जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले को राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा था कि इसका जल्द-से-जल्द निपटारा होना चाहिए। अदालत ने यह संकेत दिया था कि इस तरह के मामलों में लगातार कानूनी अनिश्चितता से उद्योग को नुकसान पहुँचता है और इससे सरकार को भी राजस्व नुकसान होता है।
एजीआर विवाद की जड़ में यह सवाल है कि टेलीकॉम कंपनियों की सकल आय (ग्रॉस रेवेन्यू) की गणना में किन तत्वों को शामिल किया जाए। दूरसंचार विभाग का मानना था कि एजीआर की गणना में केवल कोर टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली आय ही नहीं,बल्कि अन्य स्रोतों से हुई आमदनी — जैसे ब्याज,डिविडेंड और रेंटल इनकम को भी शामिल किया जाना चाहिए। कंपनियों ने इसका विरोध किया था,लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने डीओटी के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद टेलीकॉम कंपनियों पर भारी एजीआर बकाया का बोझ आ गया।
वोडाफोन आइडिया के लिए यह मामला अस्तित्व से जुड़ा हुआ है। कंपनी पर भारी एजीआर देनदारी के कारण उसका वित्तीय ढाँचा कमजोर हुआ है। बाजार में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी मजबूत प्रतिस्पर्धियों के बीच वोडाफोन आइडिया को टिके रहने के लिए सरकार की राहत की सख्त जरूरत है। कंपनी ने पहले भी अदालत को बताया था कि वह अपने एजीआर बकाया का कुछ हिस्सा चुका चुकी है,लेकिन जुर्माना और ब्याज समेत पूरी रकम अदा कर पाना उसके लिए संभव नहीं है।
अदालत के इस ताजा निर्णय से पहले वोडाफोन आइडिया के शेयर बाजार में दबाव में रहे। सोमवार को दोपहर 2:45 बजे कंपनी का शेयर 3.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹8.49 पर कारोबार कर रहा था। निवेशक अब 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई पर निगाहें टिकाए हुए हैं, क्योंकि अदालत का निर्णय कंपनी के भविष्य को दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
यदि सुप्रीम कोर्ट वोडाफोन आइडिया की याचिका पर सकारात्मक रुख अपनाता है और ब्याज तथा जुर्माने में छूट की अनुमति देता है,तो यह कंपनी के लिए बड़ी राहत होगी। इससे उसकी वित्तीय स्थिति में सुधार होगा और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ सकता है। वहीं,यदि अदालत याचिका को खारिज करती है,तो कंपनी के सामने एक बार फिर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
फिलहाल,उद्योग जगत की नजरें अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर हैं। आने वाला सप्ताह यह तय करेगा कि वोडाफोन आइडिया अपने वित्तीय पुनर्गठन और अस्तित्व की जंग में कितनी राहत हासिल कर पाती है या उसे एजीआर विवाद के बोझ तले और गहराई में जाना पड़ेगा।
