नई दिल्ली,20 फरवरी (युआईटीवी)- भारत और नीदरलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने की दिशा में गुरुवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया,जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री डिक शूफ के साथ द्विपक्षीय बैठक की। प्रधानमंत्री शूफ एआई इम्पैक्ट समिट में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए भारत आए हैं। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने उभरती प्रौद्योगिकियों,व्यापार,रक्षा,जल प्रबंधन और वैश्विक चुनौतियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री शूफ का आभार व्यक्त किया और आर्थिक विकास तथा सामाजिक कल्याण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर गठित कार्य समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में नीदरलैंड की सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि एआई आज वैश्विक परिवर्तन का प्रमुख साधन बन चुका है और इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। प्रधानमंत्री शूफ ने भी सम्मेलन के महत्व पर जोर देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस शिखर सम्मेलन की घोषणा भविष्य की नीतिगत चर्चाओं को दिशा प्रदान करेगी और देशों के बीच तकनीकी सहयोग को नई गति देगी।
दोनों नेताओं ने इस बात को स्वीकार किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का आगमन तकनीकी विकास के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल उद्योग और व्यापार के स्वरूप को बदल रहा है,बल्कि शिक्षा,स्वास्थ्य और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत और नीदरलैंड को एआई की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे एआई,क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर निर्माण में सहयोग को और सुदृढ़ करने पर भी सहमति जताई।
बैठक के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की व्यापक समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने पिछले वर्षों में भारत-नीदरलैंड साझेदारी में हुई निरंतर प्रगति का स्वागत किया। जल प्रबंधन के क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की विशाल आवश्यकताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। कृषि के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग,खाद्य सुरक्षा और सतत खेती के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। स्वास्थ्य सेवाओं में अनुसंधान,नवाचार और डिजिटल स्वास्थ्य समाधान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई।
Met Prime Minister Dick Schoof on the sidelines of the AI Impact Summit. The Netherlands has made significant strides in the digital and AI world and our nations will work together in these sectors. We deliberated on strengthening linkages in semiconductors, mega water projects,… pic.twitter.com/tLl9dsyPVp
— Narendra Modi (@narendramodi) February 19, 2026
स्वच्छ ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की प्राथमिकता बताया गया। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। रक्षा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी,ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को मजबूत किया जा सके।
दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति व्यक्त की कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की ऐतिहासिक वार्ता के सफल समापन से व्यापार और आर्थिक साझेदारी की अपार संभावनाएँ खुलेंगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच निवेश,तकनीकी आदान-प्रदान और बाजार पहुँच को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है। व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं और अब यह समझौता उन्हें और विस्तार देने का अवसर प्रदान करेगा।
क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों नेताओं ने गहन चर्चा की। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं,भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आवश्यक बताया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत के रुख को दोहराते हुए इसके शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति ही स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की और इस दिशा में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत-नीदरलैंड साझेदारी ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार देखा है। पारंपरिक क्षेत्रों जैसे व्यापार और निवेश,जल प्रबंधन,कृषि और स्वास्थ्य के अलावा अब यह संबंध प्रौद्योगिकी,नवाचार,रक्षा एवं सुरक्षा,नवीकरणीय ऊर्जा,शिक्षा और समुद्री क्षेत्र तक फैल चुका है। जन-संबंधों को भी दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत कड़ी बताया गया। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में छात्र और वैज्ञानिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ लेकर आएगा। भारत के पास विशाल मानव संसाधन और डिजिटल बुनियादी ढाँचा है,जबकि नीदरलैंड नवाचार और तकनीकी दक्षता में अग्रणी देशों में गिना जाता है। इन दोनों की साझेदारी वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में नई मिसाल कायम कर सकती है।
इस द्विपक्षीय बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि भारत और नीदरलैंड भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं। एआई से लेकर हरित ऊर्जा और रक्षा सहयोग तक,दोनों देशों ने बहुआयामी संबंधों को और गहराई देने का संकल्प दोहराया है। आने वाले समय में यह साझेदारी न केवल आर्थिक और तकनीकी क्षेत्रों में,बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
