नई दिल्ली,18 फरवरी (युआईटीवी)- राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट 2026 वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य को दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। इस बहुपक्षीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए स्वीडन,फिनलैंड और यूनाइटेड किंगडम के शीर्ष नेता भारत पहुँच चुके हैं। पाँच दिवसीय इस सम्मेलन में एआई के प्रभाव,संभावनाओं और उसके जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक चर्चा की जा रही है।
फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ऑर्पो और स्वीडन की उपप्रधानमंत्री एवं ऊर्जा,व्यवसाय और उद्योग मंत्री एब्बा बुश बुधवार सुबह नई दिल्ली पहुँचे। वहीं यूनाइटेड किंगडम के उपप्रधानमंत्री डेविड लैमी मंगलवार देर रात राजधानी पहुँचे। विदेश मंत्रालय ने सभी नेताओं का औपचारिक स्वागत किया और उनकी यात्राओं को भारत के साथ तकनीकी व रणनीतिक सहयोग के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
स्वीडन की उपप्रधानमंत्री के आगमन पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत-स्वीडन संबंध व्यापार,अर्थव्यवस्था,विज्ञान,नवाचार, जलवायु कार्रवाई और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी का उदाहरण हैं। दोनों देशों के बीच तकनीकी नवाचार और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। एआई समिट के मंच पर इन क्षेत्रों में डिजिटल समाधान और स्थिर विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी।
फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ऑर्पो की यात्रा को भी द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार,यह दौरा डिजिटल तकनीक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,स्थिरता और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत-फिनलैंड सहयोग को और गहराई देगा। उन्हें हवाई अड्डे पर कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत सिंह ने रिसीव किया। फिनलैंड अपनी उन्नत शिक्षा प्रणाली और तकनीकी नवाचार के लिए जाना जाता है,ऐसे में एआई के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग नई संभावनाएँ खोल सकता है।
यूनाइटेड किंगडम के उपप्रधानमंत्री डेविड लैमी की यात्रा को भारत-यूके व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने वाला कदम बताया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह सहयोग विश्वसनीय,समावेशी और जिम्मेदार एआई को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। भारत और यूके पहले से ही प्रौद्योगिकी,रक्षा,शिक्षा और व्यापार के क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग कर रहे हैं। एआई के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान,स्टार्टअप साझेदारी और नियामकीय ढांचे पर समन्वय दोनों देशों के लिए अहम रहेगा।
इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का उद्देश्य ‘सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय’ की राष्ट्रीय भावना के अनुरूप एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाना है। सम्मेलन में 110 से अधिक देशों के प्रतिनिधि,30 अंतर्राष्ट्रीय संगठन,लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख स्तर के प्रतिनिधि और करीब 45 मंत्री भाग ले रहे हैं। यह व्यापक भागीदारी इस बात का संकेत है कि एआई अब केवल तकनीकी विषय नहीं,बल्कि वैश्विक नीति,अर्थव्यवस्था और समाज के भविष्य से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है।
यह समिट एआई समिट श्रृंखला का चौथा संस्करण है। इससे पहले यह सम्मेलन 2023 में यूके के ब्लेचली पार्क, 2024 में दक्षिण कोरिया और 2025 में फ्रांस में आयोजित किया जा चुका है। भारत में इसका आयोजन इस बात का प्रतीक है कि देश वैश्विक डिजिटल परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना,स्टार्टअप इकोसिस्टम और डेटा गवर्नेंस के क्षेत्र में जो प्रगति की है,वह वैश्विक मंच पर सराही जा रही है।
सम्मेलन के दौरान जिम्मेदार एआई,नैतिक मानक,डेटा गोपनीयता,साइबर सुरक्षा,रोजगार पर प्रभाव और एआई के सामाजिक दायित्व जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई का उपयोग केवल आर्थिक विकास के लिए ही नहीं,बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा,कृषि और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में भी मानवता के हित में किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन भारत को एक ऐसे देश के रूप में स्थापित कर रहा है,जो तकनीकी नवाचार के साथ-साथ नैतिक और समावेशी विकास के सिद्धांतों पर भी जोर देता है। आने वाले दिनों में अन्य वैश्विक नेताओं के भी पहुँचने की उम्मीद है,जिससे यह मंच और अधिक प्रभावशाली बन जाएगा। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से निकले निष्कर्ष और सहमतियाँ भविष्य की वैश्विक डिजिटल नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
