नई दिल्ली,25 फरवरी (युआईटीवी)- हाल के महीनों में विमानन क्षेत्र में बढ़ती दुर्घटनाओं और सुरक्षा चूक की घटनाओं के बीच नागरिक उड्डयन नियामक डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर्स (एनएसओपी) सेक्टर के लिए कड़े कदमों की घोषणा की है। डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके लिए जीरो-टॉलरेंस नीति लागू की जा रही है। यह निर्णय सोमवार शाम झारखंड के चतरा जिले में हुई एक दर्दनाक एयर एम्बुलेंस दुर्घटना के बाद लिया गया,जिसमें विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई थी।
इस गंभीर हादसे ने नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेशंस,खासकर चार्टर विमानों और एयर एम्बुलेंस सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इसी पृष्ठभूमि में डीजीसीए ने सभी एनएसओपी ऑपरेटरों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की चेतावनी दी। नियामक ने कहा कि अब ऑपरेटरों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
बैठक के बाद डीजीसीए ने एक जरूरी डिस्क्लोजर पॉलिसी लागू करने की घोषणा की। इसके तहत सभी नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटरों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत सुरक्षा जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसमें एयरक्राफ्ट की उम्र,उसके मेंटेनेंस का इतिहास,तकनीकी स्थिति और पायलटों का अनुभव शामिल रहेगा। नियामक का कहना है कि इससे ग्राहकों को यह जानने का अधिकार मिलेगा कि वे जिस विमान को चार्टर कर रहे हैं, उसका सुरक्षा स्तर क्या है। यह कदम पारदर्शिता बढ़ाने और यात्रियों को सूचित निर्णय लेने में मदद करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
डीजीसीए ने यह भी संकेत दिया है कि वह सभी एनएसओपी ऑपरेटरों के लिए एक सेफ्टी रैंकिंग सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस रैंकिंग के मानदंड सार्वजनिक रूप से डीजीसीए की वेबसाइट पर जारी किए जाएँगे,ताकि आम लोग और कॉर्पोरेट ग्राहक यह देख सकें कि कौन-सा ऑपरेटर सुरक्षा के मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से प्रतिस्पर्धा के बीच सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देने का दबाव बढ़ेगा।
नियामक ने कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) के ज्यादा रैंडम ऑडिट करने की भी घोषणा की है। इसके साथ ही अनधिकृत संचालन या डेटा में गड़बड़ी की पहचान करने के लिए एडीएस-बी डेटा, ईंधन रिकॉर्ड और तकनीकी लॉग बुक्स का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाएगा। डीजीसीए ने साफ किया कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में केवल पायलट को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा,बल्कि संबंधित मैनेजर और वरिष्ठ नेतृत्व को भी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह बनाया जाएगा। यह बदलाव जवाबदेही को संस्थागत स्तर तक विस्तारित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विशेष रूप से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) के उल्लंघन और न्यूनतम सुरक्षा मानकों से नीचे लैंडिंग की कोशिश जैसे मामलों को लेकर डीजीसीए ने सख्त रुख अपनाया है। ऐसे मामलों में पायलट का लाइसेंस पाँच साल तक के लिए निलंबित किया जा सकता है। वहीं,जो ऑपरेटर तय मानकों का पालन नहीं करेंगे,उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा और उनका लाइसेंस या परमिट भी सस्पेंड किया जा सकता है।
डीजीसीए ने यह भी कहा है कि पुराने एयरक्राफ्ट और जिन विमानों के स्वामित्व में हाल ही में बदलाव हुए हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। नियामक उन ऑपरेटरों का ऑडिट भी करेगा जो अपनी खुद की मेंटेनेंस,रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सुविधा संचालित करते हैं। यदि किसी ऑपरेटर की एमआरओ व्यवस्था में कमी पाई जाती है,तो उसे रखरखाव कार्य को किसी अनुमोदित संगठन को आउटसोर्स करना होगा। इस कदम का उद्देश्य तकनीकी चूक और रखरखाव में लापरवाही को रोकना है।
मौसम संबंधी दुर्घटनाओं को लेकर भी डीजीसीए ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। नियामक के अनुसार,कई हादसे मौसम की अनिश्चितता के बजाय गलत निर्णयों का परिणाम होते हैं। इसीलिए सभी ऑपरेटरों को रियल-टाइम वेदर अपडेट सिस्टम स्थापित करने और निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पायलटों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मौसम संबंधी जागरूकता और अनियंत्रित परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता पर अधिक जोर देने को कहा गया है।
नियामक ने यह भी बताया कि मार्च की शुरुआत में विशेष सुरक्षा ऑडिट के पहले चरण को पूरा कर लिया गया है। अब दूसरे चरण की तैयारी की जा रही है,जिसमें शेष एनएसओपी ऑपरेटरों को शामिल किया जाएगा। यह चरणबद्ध ऑडिट प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सुरक्षा मानकों की व्यापक और निष्पक्ष समीक्षा हो सके।
हाल की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चार्टर और नॉन-शेड्यूल्ड एविएशन सेक्टर में सख्त निगरानी की आवश्यकता है। डीजीसीए की नई पहल से उम्मीद की जा रही है कि सुरक्षा संस्कृति को मजबूत किया जाएगा और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी। नियामक का स्पष्ट संदेश है कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
