नई दिल्ली,12 फरवरी (युआईटीवी)- 12 जून को अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के महज कुछ सेकंड बाद एयर इंडिया की फ्लाइट 171 का दुर्घटनाग्रस्त होना भारतीय विमानन इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में दर्ज हो चुका है। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान से जुड़ा यह हादसा इतना भयावह था कि इसमें कुल 260 लोगों की जान चली गई। विमान में सवार 242 यात्रियों और क्रू मेंबर में से 241 की मौत हो गई,जबकि जमीन पर मौजूद 19 लोग भी इस दुर्घटना का शिकार बन गए। उड़ान भरने के करीब 32 सेकंड बाद ही दोनों इंजनों की ताकत खत्म हो गई और विमान पास ही स्थित मेडिकल छात्रों के हॉस्टल पर जा गिरा। अब इस हादसे की जाँच से जुड़ी एक नई रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं और मामला तकनीकी खराबी से हटकर मानवीय हस्तक्षेप की ओर इशारा करता दिखाई दे रहा है।
इटली के एक प्रमुख अखबार ने पश्चिमी विमानन एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि जाँच में अब तक किसी तकनीकी खराबी के स्पष्ट सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार,कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की ऑडियो रिकॉर्डिंग को विशेष तकनीक से साफ कर दोबारा सुना गया,जिसके बाद यह स्पष्ट हुआ कि किस पायलट ने फ्यूल स्विच को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ की स्थिति में किया था। इसी कार्रवाई के बाद दोनों इंजन लगभग एक साथ बंद हो गए और विमान ने ऊँचाई खो दी। हालाँकि,अंतिम रिपोर्ट में इस निष्कर्ष को किस भाषा में और किस स्तर तक पेश किया जाएगा,यह अभी स्पष्ट नहीं है। सूत्रों का कहना है कि शक की सुई विमान के कमांडर सुमीत सभरवाल की ओर इशारा कर रही है,जिनकी इस हादसे में मृत्यु हो गई थी।
इस खबर पर भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अमेरिकी जाँच एजेंसी नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (एनटीएसबी) के प्रवक्ता पीटर सी. नुडसन ने भी अखबार को टिप्पणी देने से इनकार करते हुए भारतीय एजेंसी से संपर्क करने की सलाह दी। इस चुप्पी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इस हादसे की बारीकी से निगरानी की जा रही है।
दिसंबर में एएआईबी के अधिकारी वॉशिंगटन गए थे, जहाँ एनटीएसबी की अत्याधुनिक लैब में ब्लैक बॉक्स डेटा का दोबारा विश्लेषण किया गया। खास तौर पर कॉकपिट की ऑडियो रिकॉर्डिंग को साफ कर पुनः सुना गया। रिपोर्ट के मुताबिक इस विश्लेषण से यह स्पष्ट हो गया कि फ्यूल स्विच को बंद करने की कार्रवाई किसी तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम नहीं थी,बल्कि उसे जानबूझकर या किसी मानवीय निर्णय के तहत किया गया। अमेरिकी विशेषज्ञों ने बोइंग 787 पर कई सिम्युलेटर टेस्ट भी किए,लेकिन उन्हें ऐसा कोई तकनीकी कारण नहीं मिला,जिससे दोनों इंजन स्वतः बंद हो सकते हों। इस निष्कर्ष ने जाँच को पूरी तरह मानवीय कारकों की ओर मोड़ दिया है।
फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से प्राप्त जानकारी के अनुसार,सबसे पहले बाएं इंजन ने काम करना बंद किया,जहाँ कप्तान बैठते हैं। इसके कुछ ही सेकंड बाद दायां इंजन भी बंद हो गया। अंतिम क्षणों में सह-पायलट क्लाइव कुंदर का कंट्रोल ऊपर की ओर खींचा हुआ था,जिससे यह संकेत मिलता है कि वह विमान को ऊपर उठाने की कोशिश कर रहे थे। वहीं कप्तान का कंट्रोल स्थिर बताया गया है। शुरुआती रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया था कि फ्यूल स्विच ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पर ले जाए गए थे,जिसके बाद दोनों इंजन बंद हो गए। कॉकपिट रिकॉर्डिंग में एक पायलट की आवाज सुनाई देती है,जो पूछता है, “आपने इंजन क्यों बंद किए?” जवाब में दूसरा पायलट कहता है, “मैंने नहीं किया।” हालाँकि,रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ये आवाजें किसकी थीं।
इस नए खुलासे ने भारतीय पायलट संघ और दिवंगत कप्तान सुमीत सभरवाल के परिवार को आक्रोशित कर दिया है। उनका कहना है कि बिना अंतिम रिपोर्ट के किसी एक पायलट पर संदेह जताना न केवल अनुचित है,बल्कि यह मृतक की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने जैसा है। उन्होंने माँग की है कि विमान निर्माण कंपनी बोइंग, एयरलाइन प्रबंधन और अन्य संभावित तकनीकी या प्रणालीगत कारणों की भी गहराई से जाँच की जाए। उनका तर्क है कि किसी भी जटिल विमान हादसे को केवल एक व्यक्ति की गलती तक सीमित कर देना न्यायसंगत नहीं होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अंतर्राष्ट्रीय दबाव की भी चर्चा हो रही है। अखबार के अनुसार,पश्चिमी देशों ने भारतीय एयरलाइनों की सुरक्षा रेटिंग की पुनः समीक्षा की चेतावनी दी थी। अगर ऐसा होता तो इसका असर भारत की वैश्विक छवि पर पड़ सकता था,खासकर ऐसे समय में जब देश हवाई यात्रा,पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बड़े निवेश कर रहा है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि यदि पायलट की गलती को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जाता है,तो इसे एक “कबूल करने लायक बलिदान” के रूप में देखा जा सकता है,ताकि व्यापक संस्थागत सवालों से बचा जा सके। हालाँकि,इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन हादसों की जाँच में पारदर्शिता और तकनीकी निष्पक्षता बेहद जरूरी होती है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले सभी पहलुओं—मानवीय,तकनीकी,प्रशिक्षण संबंधी और सिस्टम डिजाइन का संतुलित मूल्यांकन आवश्यक है। बोइंग 787 जैसे आधुनिक विमान में कई सुरक्षा प्रणालियाँ मौजूद होती हैं,जो किसी एक त्रुटि को बड़े हादसे में बदलने से रोकने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि फ्यूल स्विच के कटऑफ पर जाने के बाद भी क्या कोई बैकअप या चेतावनी प्रणाली सक्रिय हुई थी या नहीं।
राजनीतिक स्तर पर भी इस रिपोर्ट को लेकर मंथन की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अंतिम रिपोर्ट जारी करने से पहले इसकी भाषा और प्रस्तुति पर विचार किया जा सकता है,ताकि देश में बड़ा विवाद न खड़ा हो। यह भी संभव है कि रिपोर्ट में सीधे तौर पर किसी एक व्यक्ति को दोषी ठहराने के बजाय घटनाक्रम को “मानवीय त्रुटि” जैसे व्यापक शब्दों में प्रस्तुत किया जाए।
फिलहाल इस त्रासदी से जुड़े परिवारों को अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है। 260 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने न केवल कई घर उजाड़े,बल्कि भारतीय विमानन प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। जाँच का अंतिम निष्कर्ष चाहे जो भी हो,यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पारदर्शी जाँच,निष्पक्ष निष्कर्ष और सुरक्षा मानकों में सुधार ही इस त्रासदी से मिली सबसे बड़ी सीख हो सकती है।
