नई दिल्ली,4 फरवरी (युआईटीवी)- नागर विमानन मंत्रालय ने मंगलवार को एयर इंडिया के बोइंग बी787-8 ड्रीमलाइनर विमान वीटी-एएनएक्स में ईंधन कटऑफ स्विच की कथित खराबी को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर अपना आधिकारिक रिस्पॉन्स जारी किया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला विमान की उड़ान सुरक्षा के लिए किसी भी तरह से खतरे का कारण नहीं बना और सभी जरूरी जाँच अंतर्राष्ट्रीय मानकों तथा नियामक प्रक्रियाओं के तहत पूरी की गईं। मंत्रालय के अनुसार,बोइंग द्वारा सुझाए गए परीक्षणों और प्रक्रियाओं के आधार पर एयर इंडिया इंजीनियरिंग और डीजीसीए अधिकारियों की मौजूदगी में फ्यूल कटऑफ स्विच की विस्तार से जाँच की गई,जिसमें कोई तकनीकी खामी नहीं पाई गई।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बोइंग के दिशानिर्देशों के अनुसार, फ्यूल कटऑफ स्विच की कार्यक्षमता जाँचने के लिए विशेष परीक्षण किए गए। इन परीक्षणों के दौरान बाएँ और दाएँ दोनों स्विचों की जाँच की गई और उन्हें संतोषजनक स्थिति में पाया गया। बयान में यह भी कहा गया कि स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म,यानी लॉकिंग टूथ और पॉवल,पूरी तरह से अपनी जगह पर था और सामान्य संचालन की स्थिति में रन से कटऑफ की ओर फिसल नहीं रहा था। यहाँ तक कि जब बेस प्लेट के समानांतर पूरी ताकत लगाई गई,तब भी स्विच सुरक्षित और स्थिर पाया गया।
हालाँकि,मंत्रालय ने यह भी स्वीकार किया कि अगर स्विच पर गलत दिशा से बाहरी बल लगाया जाए,तो वह रन से कटऑफ की स्थिति में जा सकता है। इसका कारण स्विच की कोणीय बेस प्लेट बताई गई है,जिसके चलते यदि अंगुली या अंगूठे से गलत तरीके से दबाव डाला जाए,तो फिसलने की संभावना बन सकती है। मंत्रालय के अनुसार,यह किसी तकनीकी खराबी का संकेत नहीं है,बल्कि स्विच के डिजाइन और उसके संचालन के तरीके से जुड़ा पहलू है,जिसे चालक दल को प्रशिक्षण के दौरान समझाया जाता है।
बयान में आगे बताया गया कि बोइंग के साथ हुए संवाद के आधार पर संबंधित ईंधन कटऑफ स्विच,स्थापित किए जाने वाले फ्यूल कंट्रोल यूनिट और एक अन्य विमान के फ्यूल कटऑफ स्विच पर भी अनुशंसित प्रक्रिया के तहत पुल-टू-अनलॉक बल की जाँच की गई। यह जाँच यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि स्विच को अनलॉक करने के लिए कितनी ताकत की आवश्यकता होती है और क्या वह तय मानकों के भीतर है या नहीं। मंत्रालय के अनुसार,सभी मामलों में पुल-टू-अनलॉक बल निर्धारित सीमा के भीतर पाया गया। इन सभी निरीक्षणों और परीक्षणों को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के अधिकारियों की मौजूदगी में अंजाम दिया गया।
यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब एयर इंडिया ने रविवार को बोइंग बी787-8 विमान वीटी-एएनएक्स को उड़ान एआई 132 के रूप में लंदन से बेंगलुरु के लिए संचालित किया। लंदन में इंजन स्टार्ट करने की प्रक्रिया के दौरान चालक दल ने देखा कि हल्का दबाव डालने पर ईंधन नियंत्रण स्विच “रन” स्थिति में मजबूती से लॉक नहीं हो रहा था। चालक दल ने यह स्थिति दो बार नोट की। तीसरे प्रयास में स्विच सही तरीके से “रन” में लॉक हो गया और इसके बाद वह स्थिर बना रहा।
मंत्रालय के मुताबिक,तीसरे प्रयास के बाद चालक दल ने मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की सभी प्रक्रियाएँ रोक दीं और स्विच की भौतिक जाँच की। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईंधन नियंत्रण स्विच पूरी तरह से और स्पष्ट रूप से “रन” स्थिति में लॉक हो चुका है। जाँच के बाद यह पुष्टि हुई कि स्विच सही स्थिति में था और सुरक्षित रूप से लॉक हो गया है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इंजन स्टार्ट के दौरान या उसके बाद किसी भी समय कोई असामान्य इंजन पैरामीटर सामने नहीं आया। न तो किसी तरह की चेतावनी,वार्निंग और न ही किसी संबंधित सिस्टम का कोई संदेश मिला। इसका मतलब यह है कि इंजन और उससे जुड़े सिस्टम सामान्य रूप से काम कर रहे थे और उड़ान के संचालन में किसी तरह की बाधा नहीं आई।
चालक दल ने इस पूरी स्थिति की जानकारी परिचालन दल के अन्य सदस्यों को भी दी। इसके बाद एहतियात के तौर पर स्विच से अनावश्यक संपर्क से बचने का फैसला किया गया। उड़ान के शेष समय के दौरान चालक दल ने इंजन संकेतों और चेतावनी प्रणालियों की लगातार और बारीकी से निगरानी की। मंत्रालय के अनुसार,यह कदम अतिरिक्त सावधानी के तौर पर उठाया गया,ताकि किसी भी संभावित जोखिम को समय रहते पहचाना जा सके।
अंततः उड़ान एआई 132 बिना किसी घटना के सुरक्षित रूप से पूरी हुई और यात्रियों या विमान की सुरक्षा पर कोई असर नहीं पड़ा। मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि विमानन सुरक्षा के मामलों में किसी भी तरह की असामान्य रिपोर्ट को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उसकी जाँच की जाती है। इस मामले में भी बोइंग,एयर इंडिया इंजीनियरिंग और डीजीसीए के बीच समन्वय के साथ सभी आवश्यक परीक्षण किए गए।
नागर विमानन मंत्रालय का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तकनीकी मुद्दे को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। मंत्रालय ने यह भरोसा दिलाया है कि एयर इंडिया के बेड़े में शामिल सभी विमानों की नियमित निगरानी और जाँच जारी रहेगी,ताकि यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद हवाई यात्रा का अनुभव मिल सके।
