मुंबई,25 मार्च (युआईटीवी)- वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है,जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन घरेलू बाजार तेजी के साथ खुले और शुरुआती कारोबार में ही मजबूत बढ़त दर्ज की गई। सकारात्मक वैश्विक संकेतों,कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और जोखिम लेने की बढ़ती प्रवृत्ति ने बाजार को मजबूती दी।
कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,068.45 के मुकाबले 583.56 अंकों यानी 0.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,652.01 पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 ने भी 152 अंकों यानी 0.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,064.40 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत की। हालाँकि,शुरुआती घंटों में ही बाजार में तेजी और मजबूत होती गई और सुबह करीब 9:27 बजे तक सेंसेक्स 886.30 अंकों की बढ़त के साथ 74,954.75 पर पहुँच गया,जबकि निफ्टी 304.35 अंकों की तेजी के साथ 23,216.75 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।
बाजार की यह तेजी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही,बल्कि व्यापक बाजार में भी जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने मुख्य सूचकांकों से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में करीब 2.04 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई,जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 2.29 प्रतिशत तक चढ़ गया। यह संकेत देता है कि निवेशकों का भरोसा व्यापक रूप से बाजार में बढ़ा है और वे विभिन्न सेगमेंट में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 3.55 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई,जो इस सेक्टर में मजबूत खरीदारी को दर्शाती है। इसके अलावा मेटल,मीडिया,ऑटो और पीएसयू बैंक जैसे सेक्टरों में भी उल्लेखनीय तेजी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.51 प्रतिशत,मीडिया 2.29 प्रतिशत, ऑटो 2.20 प्रतिशत और पीएसयू बैंक इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत चढ़ा। वहीं एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर भी क्रमशः 1.26 प्रतिशत और 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ सकारात्मक रुख में रहे।
निफ्टी50 के प्रमुख शेयरों में भी जोरदार तेजी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, अदाणी एंटरप्राइजेज,ग्रासिम,अदाणी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया। इन कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने बाजार को और मजबूती प्रदान की और निवेशकों के उत्साह को बढ़ाया।
हालाँकि,शेयर बाजार में तेजी के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया थोड़ा कमजोर नजर आया। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 93.95 पर खुला, जबकि मंगलवार को यह 93.87 के स्तर पर बंद हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते रुपये पर दबाव बना हुआ है,हालाँकि,शेयर बाजार की मजबूती से इसे कुछ हद तक समर्थन मिल सकता है।
बाजार में इस तेजी का एक बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भी है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्धविराम और शांति समझौते की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 97.18 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 6 प्रतिशत से अधिक गिरकर 86.72 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया। तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयातक देशों के लिए सकारात्मक मानी जाती है,क्योंकि इससे महँगाई पर नियंत्रण रखने और चालू खाता घाटा कम करने में मदद मिलती है।
पिछले तीन से चार सप्ताह में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था,जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई थी। इस दौरान निवेशकों के बीच विकास दर और महंगाई को लेकर चिंताएँ भी बढ़ी थीं। हालाँकि,अब शांति वार्ता की खबरों ने इन चिंताओं को कुछ हद तक कम किया है और बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू मैक्रोइकोनॉमिक आंकड़े और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभाएँगी। फिलहाल बाजार को वैश्विक स्तर से समर्थन मिल रहा है,लेकिन इसकी संरचना अभी पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार,निफ्टी के लिए कुछ अहम तकनीकी स्तर बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि निफ्टी इन रेजिस्टेंस स्तरों को मजबूती से पार कर लेता है,तो बाजार में आगे भी तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है। वहीं यदि ऐसा नहीं होता है,तो ऊँचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है,जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस समय सतर्क और चयनात्मक निवेश रणनीति अपनाएँ। तेजी के माहौल में बिना सोच-समझकर निवेश करने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देना जरूरी है। साथ ही वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखना भी आवश्यक है,क्योंकि वर्तमान समय में बाजार काफी हद तक बाहरी कारकों से प्रभावित हो रहा है।
बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी ने यह संकेत दिया है कि निवेशकों का भरोसा लौट रहा है और वे जोखिम लेने के लिए तैयार हैं। हालाँकि,आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान संबंधों,कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। ऐसे में बाजार में उत्साह के साथ-साथ सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है।
