वाशिंगटन,4 अप्रैल (युआईटीवी)- अमेरिका की राजनीति और वैश्विक रणनीति के केंद्र में एक बार फिर रक्षा बजट आ गया है। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में व्हाइट हाउस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड रक्षा बजट प्रस्तावित किया है,जो पिछले स्तर की तुलना में लगभग 44 प्रतिशत की भारी वृद्धि को दर्शाता है। यह प्रस्ताव न केवल अमेरिका की सैन्य क्षमता को और मजबूत करने का संकेत देता है,बल्कि इसके साथ ही घरेलू कार्यक्रमों में कटौती को लेकर एक नई राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है।
व्हाइट हाउस द्वारा जारी आधिकारिक बजट दस्तावेज के अनुसार,यह प्रस्ताव राष्ट्रीय रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है। प्रशासन का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में,जहाँ कई क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ तेजी से बढ़ रही हैं,अमेरिका को अपनी सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है। बजट दस्तावेज में कहा गया है कि यह प्रस्ताव अमेरिका को दुनिया की सबसे शक्तिशाली और सक्षम सैन्य ताकत बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
इस प्रस्ताव के तहत लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर का आधारभूत विवेकाधीन रक्षा व्यय रखा गया है,जबकि 350 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि को प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों के लिए निर्धारित किया गया है। इन कार्यक्रमों में गोला-बारूद उत्पादन को बढ़ाना,रक्षा औद्योगिक आधार का विस्तार करना और नई तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना शामिल है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अमेरिका केवल वर्तमान सैन्य जरूरतों को ही नहीं,बल्कि भविष्य की संभावित चुनौतियों के लिए भी तैयारी कर रहा है।
इस बजट का एक प्रमुख आकर्षण “गोल्डन डोम” मिसाइल रक्षा प्रणाली है,जिसे व्यापक रूप से वित्त पोषित करने की योजना बनाई गई है। यह प्रणाली अमेरिका के हवाई और मिसाइल रक्षा ढाँचे को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से तैयार की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उन्नत रक्षा प्रणालियाँ न केवल देश की सुरक्षा को बढ़ाएँगी,बल्कि संभावित विरोधियों के लिए एक मजबूत संदेश भी देंगी।
इसके अलावा,बजट में नौसेना के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। युद्धपोत निर्माण के लिए 65.8 अरब डॉलर का प्रावधान रखा गया है,जिसमें नए युद्धपोतों और सहायक पोतों का निर्माण शामिल है। यह कदम विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया माना जा रहा है,जहाँ चीन के साथ अमेरिका की रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता लगातार बढ़ रही है।
सैन्य कर्मियों के कल्याण को भी इस बजट में प्रमुखता दी गई है। प्रस्ताव के अनुसार, ई-5 और उससे नीचे के रैंक के सैनिकों के लिए 7 प्रतिशत वेतन वृद्धि का प्रावधान किया गया है। यह कदम सेना के मनोबल को बढ़ाने और योग्य युवाओं को सैन्य सेवा की ओर आकर्षित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
हालाँकि,इस भारी रक्षा खर्च के साथ-साथ व्हाइट हाउस ने गैर-रक्षा खर्च में कटौती का भी प्रस्ताव रखा है,जिसने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। बजट दस्तावेज के अनुसार, 2026 के स्तर की तुलना में गैर-रक्षा खर्च में 10 प्रतिशत की कमी की जाएगी। इसका सीधा असर शिक्षा,स्वास्थ्य,पर्यावरण और विदेशी सहायता जैसे क्षेत्रों पर पड़ेगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक,इन कटौतियों के तहत पर्यावरण,शिक्षा और स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यक्रमों में लगभग 73 अरब डॉलर की कमी की जा सकती है। इसके अलावा,कुल गैर-रक्षा खर्च को घटाकर लगभग 660 अरब डॉलर तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कटौतियाँ देश के सामाजिक और आर्थिक ढाँचे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
कांग्रेस में इस प्रस्ताव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। रिपब्लिकन नेताओं ने जहाँ इस रक्षा बजट का स्वागत किया है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया है,वहीं डेमोक्रेटिक नेताओं ने इसे अत्यधिक और असंतुलित करार दिया है। उनका कहना है कि रक्षा पर इतना बड़ा खर्च घरेलू जरूरतों की अनदेखी करके किया जा रहा है,जो दीर्घकाल में नुकसानदायक साबित हो सकता है।
डेमोक्रेट्स का तर्क है कि शिक्षा,स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में निवेश कम करना देश की आंतरिक मजबूती को कमजोर कर सकता है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सैन्य ताकत से ही नहीं,बल्कि मजबूत सामाजिक और आर्थिक ढाँचे से भी सुनिश्चित होती है। दूसरी ओर,रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा पर अधिक खर्च करना समय की माँग है और इससे अमेरिका की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी।
व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव को एक व्यापक वित्तीय पुनर्गठन योजना का हिस्सा बताया है। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी बनाना और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। दस्तावेज में कहा गया है कि यह बजट राष्ट्रपति के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है,जिसमें गैर-जरूरी खर्च को सीमित कर सरकार को अधिक कुशल बनाया जाए।
अब यह प्रस्ताव कांग्रेस के पास जाएगा,जहाँ इसे मंजूरी मिलना आसान नहीं होगा। अमेरिकी संसद में बजट पारित करने की प्रक्रिया अक्सर जटिल और विवादास्पद होती है, खासकर तब जब दोनों प्रमुख दलों के बीच गहरे मतभेद हों। विधायकों को 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष से पहले इस प्रस्ताव पर निर्णय लेना होगा।
इतिहास गवाह है कि पेंटागन के बड़े बजट प्रस्तावों को अक्सर राजनीतिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है,भले ही दोनों दल रक्षा खर्च के महत्व को स्वीकार करते हों। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार कांग्रेस इस प्रस्ताव में कितने बदलाव करती है और अंततः कितना बजट पारित होता है।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो अमेरिका पहले ही दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश है। इस प्रस्तावित वृद्धि से यह अंतर और अधिक बढ़ जाएगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका को मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों,एशिया में चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण की जरूरतों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े रक्षा बजट से अमेरिका अपनी सैन्य ताकत को तो मजबूत कर सकता है,लेकिन इसके साथ ही उसे घरेलू असंतोष और राजनीतिक विभाजन का भी सामना करना पड़ सकता है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह बजट अमेरिका की सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन बनाने में कितना सफल साबित होता है।
ट्रंप प्रशासन का यह रक्षा बजट प्रस्ताव न केवल अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है,बल्कि यह भी दिखाता है कि देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। अब सबकी नजरें कांग्रेस पर टिकी हैं,जहाँ इस प्रस्ताव का भविष्य तय होगा और यह स्पष्ट होगा कि अमेरिका आने वाले वर्षों में अपनी नीतियों को किस तरह आकार देता है।
