वाशिंगटन,1 अप्रैल (युआईटीवी)- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान को लेकर अपना आक्रामक रुख स्पष्ट कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने मंगलवार को वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी स्थिति के लिए तैयार है और यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो सैन्य विकल्प अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यहाँ तक कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका जमीनी सैनिकों की तैनाती यानी “बूट्स ऑन द ग्राउंड” के लिए भी तैयार है।
यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेगसेथ के साथ ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन भी मौजूद थे,जिन्होंने अमेरिकी सैन्य तैयारियों और रणनीति को लेकर विस्तार से जानकारी दी।
हेगसेथ ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका इस पूरे अभियान को अपनी शर्तों पर ही समाप्त करेगा। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को दोहराते हुए कहा कि इस मिशन को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए—अमेरिका अपने हितों और सुरक्षा को सर्वोपरि रखेगा और उसी के अनुसार आगे बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और उसमें तेजी भी आई है,लेकिन इसके साथ ही सैन्य विकल्प पूरी तरह खुले हुए हैं। उनके मुताबिक,अमेरिका इस स्थिति में किसी भी समय जमीनी हमला करने का निर्णय ले सकता है,हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि शायद इसकी जरूरत न पड़े और कूटनीतिक समाधान निकल आए,लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका हर परिस्थिति के लिए तैयार है और अपने सभी विकल्पों को खुला रखना चाहता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हेगसेथ ने अमेरिकी रणनीति को “अनिश्चित” या “अनप्रेडिक्टेबल” बनाए रखने की बात पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध में सफलता पाने के लिए यह जरूरी है कि दुश्मन को आपके अगले कदम का अंदाजा न हो। यदि आप पहले से ही यह स्पष्ट कर दें कि आप क्या करने वाले हैं और क्या नहीं,तो आप अपनी रणनीतिक बढ़त खो देते हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण अमेरिका अपनी योजनाओं को लेकर पूरी तरह खुलासा नहीं करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि इस समय अमेरिका का विरोधी यह सोच रहा होगा कि ऐसे कई तरीके हैं,जिनसे अमेरिका जमीनी सैनिकों के जरिए हमला कर सकता है। यह अनिश्चितता ही अमेरिका की ताकत है,जो दुश्मन पर मानसिक दबाव बनाती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास कई विकल्प हैं और वह जरूरत पड़ने पर उनमें से किसी का भी इस्तेमाल कर सकता है।
इस दौरान जनरल डैन केन ने भी अमेरिकी सैन्य क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्पों की एक व्यापक श्रृंखला मौजूद है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति के निर्णय लेने के दायरे को सीमित नहीं करना चाहते,लेकिन इतना जरूर है कि अमेरिका के पास ऐसे कई विकल्प हैं,जिनका इस्तेमाल हालात के अनुसार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी ही एक बड़ा दबाव बिंदु है,जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
केन ने ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उसे कूटनीतिक स्तर पर सावधानीपूर्वक विचार करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि अगर स्थिति बिगड़ती है,तो अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नाटो को लेकर भी सवाल उठे,जिस पर हेगसेथ ने सहयोगी देशों के रवैये पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका बड़े पैमाने पर कार्रवाई करता है,तो यह देखा जाना चाहिए कि उसके सहयोगी किस हद तक साथ खड़े होते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब अमेरिका अतिरिक्त मदद या बुनियादी हवाई मार्ग की अनुमति माँगता है,तो उसे अक्सर सवालों, रुकावटों और हिचकिचाहट का सामना करना पड़ता है।
हेगसेथ ने यह भी कहा कि कई बार सहयोगी देशों की मिसाइलों की पहुँच अमेरिका तक नहीं होती,बल्कि वे अन्य देशों को प्रभावित करती हैं,फिर भी जब सहयोग की बात आती है, तो वे पीछे हटते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का रवैया गठबंधन की भावना के विपरीत है और इससे अमेरिका को अपने गठबंधन संबंधों पर पुनर्विचार करने की जरूरत महसूस हो सकती है।
उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आपके सहयोगी जरूरत के समय आपके साथ खड़े नहीं होते,तो ऐसे गठबंधन का कोई खास महत्व नहीं रह जाता। यह बयान स्पष्ट रूप से अमेरिका के सहयोगी देशों के लिए एक संदेश माना जा रहा है कि उन्हें अपनी भूमिका को लेकर अधिक स्पष्ट और प्रतिबद्ध होना होगा।
पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि अमेरिका इस समय ईरान को लेकर दोहरी रणनीति अपना रहा है—एक ओर वह कूटनीतिक बातचीत को जारी रखे हुए है,वहीं दूसरी ओर सैन्य विकल्पों को भी पूरी तरह खुला रखे हुए है। यह रणनीति अमेरिका को लचीलापन देती है और उसे परिस्थितियों के अनुसार तेजी से निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह आक्रामक रुख ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश है,ताकि उसे कूटनीतिक समाधान की ओर लाया जा सके। हालाँकि,इस तरह के बयान क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं और स्थिति को अधिक जटिल बना सकते हैं।
मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है और ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। ऊर्जा आपूर्ति,वैश्विक व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का यह बयान यह दर्शाता है कि अमेरिका इस संघर्ष को लेकर पूरी तरह गंभीर है और किसी भी स्थिति के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर यह टकराव एक बड़े सैन्य संघर्ष में बदल जाता है।
