वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने बेटे अग्निवेश के निधन पर शेयर किया भावुक पोस्ट (तस्वीर क्रेडिट@Mukesh_Journo)

अनिल अग्रवाल का भावुक संदेश,बेटे अग्निवेश के आकस्मिक निधन से शोक में डूबा देश,पीएम मोदी ने जताया दुख

नई दिल्ली,8 जनवरी (युआईटीवी)- वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल के आकस्मिक निधन की खबर ने न केवल उद्योग जगत,बल्कि पूरे देश को गहरे शोक में डाल दिया है। इस दुखद घटना के बाद अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक अत्यंत भावुक पोस्ट साझा किया,जिसमें उन्होंने बेटे के साथ बिताए पलों,उसकी सोच,सपनों और परिवार में उसकी भूमिका को याद करते हुए अपने दर्द को शब्दों में बयां किया। एक सफल उद्योगपति के रूप में पहचाने जाने वाले अनिल अग्रवाल का यह निजी और मानवीय रूप सामने आना लोगों को भीतर तक छू गया है।

अपने पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि अग्निवेश उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा था। उन्होंने बेटे के बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक पिता के रूप में उन्होंने उसे बड़ा होते देखा,उसकी जिज्ञासाओं को समझा और उसके साथ भविष्य को लेकर लंबी चर्चाएँ कीं। अग्रवाल ने लिखा कि परिवार के साथ बिताए गए छोटे-छोटे पल,हँसी-मजाक,त्योहारों की खुशियाँ और कारोबारी मसलों पर हुई बातचीत आज स्मृतियों के रूप में रह गई हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बेटे के अचानक चले जाने से उनके जीवन में एक ऐसा खालीपन आ गया है,जिसे भर पाना बेहद कठिन होगा।

इस दुखद समाचार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर कहा कि अग्निवेश अग्रवाल के निधन की खबर से उन्हें गहरा दुख पहुँचा है और इस कठिन समय में अनिल अग्रवाल तथा उनके परिवार के प्रति उनकी संवेदनाएँ हैं। प्रधानमंत्री के इस संदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल एक उद्योगपति के परिवार का निजी दुख नहीं है,बल्कि देश के लिए भी यह एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

अग्निवेश अग्रवाल को वेदांता समूह की अगली पीढ़ी के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखा जा रहा था। उन्होंने अमेरिका के प्रतिष्ठित व्हार्टन स्कूल से शिक्षा प्राप्त की थी और वैश्विक कारोबारी माहौल की गहरी समझ रखते थे। खनन,धातु और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति रखने वाले वेदांता समूह के भविष्य को लेकर वे बेहद उत्साहित रहते थे। उनके करीबी बताते हैं कि अग्निवेश केवल मुनाफे तक सीमित सोच नहीं रखते थे,बल्कि टिकाऊ विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को भी उतनी ही अहमियत देते थे।

पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर अग्निवेश की सक्रियता को उद्योग जगत में सराहना मिली थी। वे मानते थे कि खनन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं होनी चाहिए,बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति भी उनका दायित्व है। इसी सोच के तहत वेदांता समूह में ग्रीन टेक्नोलॉजी,स्वच्छ ऊर्जा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कई प्रयासों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी।

अनिल अग्रवाल की अपनी जीवन यात्रा भी संघर्ष और सफलता की मिसाल रही है। एक समय स्क्रैप व्यापार से शुरुआत करने वाले अग्रवाल ने मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर वेदांता जैसे वैश्विक औद्योगिक समूह की नींव रखी। उनके लिए अग्निवेश केवल पुत्र ही नहीं,बल्कि उस विरासत का उत्तराधिकारी भी थे,जिसे उन्होंने दशकों की मेहनत से खड़ा किया था। अब उनके असमय निधन से न केवल परिवार भावनात्मक रूप से टूट गया है,बल्कि कारोबारी स्तर पर भी कई चुनौतियाँ सामने खड़ी हो गई हैं।

अग्निवेश के निधन पर उद्योग जगत के कई दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया। रिलायंस समूह के चेयरमैन मुकेश अंबानी और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी समेत कई प्रमुख उद्योगपतियों ने अग्रवाल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। सोशल मीडिया पर लगातार श्रद्धांजलि संदेश सामने आ रहे हैं,जिनमें अग्निवेश को एक संवेदनशील,दूरदर्शी और जिम्मेदार युवा नेता के रूप में याद किया जा रहा है।

वेदांता समूह और अग्रवाल परिवार द्वारा संचालित कालिंगा फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा,स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए गए कार्यों को भी इस मौके पर याद किया जा रहा है। अग्निवेश इन सामाजिक पहलों में भी गहरी रुचि रखते थे और मानते थे कि उद्योगों की सफलता तभी सार्थक है,जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।

यह दुखद घटना जीवन की नश्वरता और अनिश्चितता की याद दिलाती है। अनिल अग्रवाल द्वारा सार्वजनिक रूप से अपने दर्द को साझा करना कई लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गया है। एक ऐसे समय में जब वे देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक हैं,उनका यह स्वीकार करना कि पिता के रूप में वे टूट गए हैं,मानवीय संवेदनाओं को सामने लाता है। यह संदेश देता है कि चाहे सफलता कितनी भी बड़ी क्यों न हो,परिवार और अपनों का महत्व सबसे ऊपर रहता है।

अग्निवेश अग्रवाल का जाना एक ऐसी क्षति है,जिसकी भरपाई न परिवार के लिए आसान है और न ही उद्योग जगत के लिए। उनकी स्मृतियाँ,उनके विचार और उनका योगदान लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।