अप्रैल का जीएसटी संग्रह बेहद मजबूत: विशेषज्ञ

अप्रैल का जीएसटी संग्रह बेहद मजबूत: विशेषज्ञ

चेन्नई, 2 मई (युआईटीवी/आईएएनएस)- अप्रैल 2023 में 1.87 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी संग्रह पर विशेषज्ञों की मिलीजुली राय है। वे इसे मजबूत और तर्कसंगत बता रहे हैं। मार्च 2023 में जीएसटी संग्रह तकरीबन 1.67 लाख करोड़ रुपये था। इक्रा की रिसर्च एवं आउटरीच प्रमुख और मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, जीएसटी संग्रह में वित्त वर्ष के अंत में अप्रैल 2023 में 12 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई है जो मार्च 2023 के लेनदेन के लिए भुगतान किया गया है।

नायर ने कहा, हाल के महीनों में संग्रह में 11-13 प्रतिशत की स्वस्थ वृद्धि बनी रही है। एक आधार के नॉर्मल होने और मुद्रास्फीति में नरमी से आने वाली तिमाही में इसमें थोड़ी कमी आ सकती है हालांकि ियह बड़े इकाई अंक में बनी रहेगी।

टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी के पार्टनर विवेक जालान के विचार में अप्रैल 2023 के जीएसटी संग्रह को सांख्यिकीय रूप से उचित कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा, बजट 2023 में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में वित्त वर्ष 23-24 में जीएसटी संग्रह में 12 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यदि मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि छह प्रतिशत रहती है, तो बजट में अप्रत्यक्ष कर में वृद्धि एक प्रतिशत भी नहीं रखी गई है।

जालान के अनुसार, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के और अधिक हासिल करने की उम्मीद है, जो अप्रैल 2023 में यह नहीं कर सका।

उन्होंने कहा, संभवत: हम वित्त वर्ष 23-24 में स्वचालित जांच आदि की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद कर सकते हैं। कुछ करदाताओं के लिए मई के पहले सप्ताह में ई-चालान पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। , इस दिशा में एक कदम हो सकता ह।

आईआरआईएस टैक्स टेक के कारोबार प्रमुख गौतम महंती ने पिछले महीने जीएसटी संग्रह को रिकॉर्ड-ब्रेकिंग बताते हुए कहा कि यह ई-चालान के सकारात्मक प्रभाव और भारत की संपन्न अर्थव्यवस्था के साथ नियमों की अनुपालना को मजबूत करने का एक स्पष्ट संकेत है।

जैसा कि अनुमान लगाया गया था, अप्रैल 2022 में पिछले वर्ष (1.67 लाख करोड़ रुपये) की तुलना में 12 प्रतिशत की वृद्धि का श्रेय मार्च 2023 में उत्पन्न ई-वे बिलों में वृद्धि (9.09 करोड़ रुपये) को दिया गया है। इसमें 16 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। महंती ने कहा कि पिछले साल इसी अवधि मार्च 2022 में यह वृद्धि 7.81 करोड़ रुपये रही थी।

महंती ने कहा, नए करदाताओं को जोड़ने और डिजिटलीकरण और पारदर्शिता पर सरकार के फोकस के साथ, हम उम्मीद करते हैं कि संग्रह आगामी वित्तीय वर्ष में 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर जाएगा।

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