इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट पर इजरायल आईसीसी से करेगा अपील

यरूशलम,28 नवंबर (युआईटीवी)- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देने की योजना का संकेत देते हुए इजरायल ने हेग स्थित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) में एक औपचारिक नोटिस दायर किया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि इजरायल ने आईसीसी से वारंट पर रोक लगाने का भी अनुरोध किया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान के अनुसार,इजरायल ने इस वारंट को तथ्यात्मक और कानूनी रूप से “निराधार” बताया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वारंट जारी करने का निर्णय न केवल गलत है,बल्कि इसका कोई वैध आधार नहीं है। इजरायल ने आईसीसी के अधिकार और इस वारंट की वैधता को भी पूरी तरह से नकार दिया है।

आईसीसी ने 8 अक्टूबर 2023 से 20 मई 2024 के बीच गाजा में “मानवता के खिलाफ अपराध” और “युद्ध अपराध” के आरोपों के तहत नेतन्याहू, गैलेंट और हमास के सैन्य कमांडर मोहम्मद देफ के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह आरोप गाजा में हुए संघर्ष और उसमें नागरिकों के खिलाफ हिंसा को लेकर लगाए गए हैं।

इस वारंट को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस और नॉर्वे जैसे देशों का समर्थन मिला है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने आईसीसी के आदेश का स्वागत किया और इसे “अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता की गारंटी” बताया। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्रिस्टोफ लेमोइन ने हर परिस्थिति में आईसीसी के आदेशों का पालन किए जाने की बात कही।

इजरायल ने अपनी अपील में आईसीसी के निर्णय को कानूनी और तथ्यात्मक रूप से कमजोर बताया है। उनका दावा है कि यह वारंट केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम है और इसका उद्देश्य इजरायल को निशाना बनाना है। इजरायल का कहना है कि यह वारंट निष्पक्ष न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को युद्ध अपराधों,मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। हालाँकि,इजरायल ने आईसीसी की वैधता को लंबे समय से चुनौती दी है और वह इस न्यायालय का सदस्य भी नहीं है। इसके बावजूद आईसीसी ने यह वारंट जारी किया है,जो इजरायल और न्यायालय के बीच विवाद को और बढ़ा सकता है।

यह मामला अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और कानून के बीच टकराव का उदाहरण है,जहाँ एक तरफ आईसीसी मानवाधिकारों और न्याय की रक्षा के लिए कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल इसे राजनीतिकरण का आरोप लगा रहा है। इस स्थिति में, आईसीसी और इजरायल के बीच कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई और तेज होने की संभावना है। वारंट का समर्थन करने वाले देशों ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक महत्वपूर्ण कदम बताया है,जबकि इजरायल इसे अपने अधिकारों और संप्रभुता के खिलाफ एक हमला मानता है।