निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को आईजीआईएमएस से पीएमसीएच किया गया शिफ्ट (तस्वीर क्रेडिट@RanjanSinghh_)

31 साल पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ी,आईजीआईएमएस से पीएमसीएच किया गया शिफ्ट

पटना,7 फरवरी (युआईटीवी)- बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को शनिवार को पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) से पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) स्थानांतरित कर दिया गया। गिरफ्तारी के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई थी,जिसके बाद देर रात पटना पुलिस उन्हें इलाज के लिए आईजीआईएमएस लेकर पहुँचीं थी। शनिवार सुबह उन्हें बेहतर उपचार के लिए पीएमसीएच भेजे जाने की सूचना मिली,जिसके साथ ही यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

पप्पू यादव को शुक्रवार की देर रात पटना पुलिस ने उनके मंदिरी स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार,यह गिरफ्तारी वर्ष 1995 से जुड़े एक मामले में की गई है,जिसकी सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। बताया गया है कि अदालत में इस मामले की प्रक्रिया जारी थी,लेकिन सांसद की लगातार गैरहाजिरी के कारण कार्रवाई की गई। यह मामला गर्दनीबाग थाना क्षेत्र से संबंधित है,जो पहले पुरानी भारतीय दंड संहिता के तहत दर्ज था और अब भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत चल रहा है।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार,इस मामले में सांसद पर आईपीसी की धारा 419, 420, 468, 448, 506 और 120बी के तहत आरोप लगाए गए हैं। ये धाराएँ धोखाधड़ी,जालसाजी,आपराधिक साजिश और धमकी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी हैं। पुलिस का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत ही गिरफ्तारी की गई है और इसमें किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है। हालाँकि,पप्पू यादव के समर्थक और उनके करीबी इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से प्रेरित बता रहे हैं।

गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। उनके निजी सचिव और समर्थकों का दावा है कि गिरफ्तारी के बाद उनकी सेहत अचानक खराब हो गई थी,जिसके चलते पुलिस उन्हें रात में ही आईजीआईएमएस लेकर गई। सोशल मीडिया पर पप्पू यादव के आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनके हवाले से एक पोस्ट साझा की गई,जिसमें अस्पताल में मिले इलाज और सुविधाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

फेसबुक पोस्ट में लिखा गया कि आईजीआईएमएस में उन्हें रात भर स्ट्रेचर पर ही रखा गया और बेड उपलब्ध नहीं कराया गया। पोस्ट के अनुसार,शनिवार सुबह पुलिस उन्हें पीएमसीएच ले जा रही थी। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि उन्हें इलाज के लिए पर्याप्त सुविधाएँ नहीं दी गईं और यह बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि ‘नीट बेटी’ की लड़ाई लड़ने के कारण सत्ता और प्रशासन उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं और उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।

पप्पू यादव के समर्थकों ने इस घटनाक्रम को लेकर पटना और पूर्णिया समेत कई जगहों पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि एक निर्वाचित सांसद के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल अमानवीय है,बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। समर्थकों का दावा है कि यदि मामला इतना पुराना था,तो अचानक कार्रवाई करना यह संकेत देता है कि इसके पीछे कोई और वजह हो सकती है।

दूसरी ओर,पुलिस और प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तारी पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है और सांसद को मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार इलाज मुहैया कराया गया। पुलिस का यह भी कहना है कि तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया और डॉक्टरों की सलाह पर ही पीएमसीएच शिफ्ट किया गया है।

आईजीआईएमएस और पीएमसीएच प्रशासन की ओर से फिलहाल सांसद की मेडिकल स्थिति को लेकर कोई विस्तृत मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक,उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है,ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है,जब पप्पू यादव हाल के दिनों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर मुखर रहे हैं। विशेषकर शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में उनकी सक्रियता चर्चा में रही है। समर्थकों का मानना है कि इसी सक्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है,जबकि विरोधियों का कहना है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है और पुराने मामलों में भी कार्रवाई होना स्वाभाविक है।

फिलहाल,पप्पू यादव की गिरफ्तारी,उनकी सेहत और अस्पताल में शिफ्ट किए जाने को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले की सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट्स से यह साफ होगा कि आगे की कानूनी और राजनीतिक दिशा क्या होगी। इस बीच,पूरे घटनाक्रम पर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं,जिनका जवाब सरकार और संबंधित एजेंसियों को देना होगा।