आर्टेमिस-II मिशन की ऐतिहासिक उड़ान (तस्वीर क्रेडिट@CuriosityonX)

आर्टेमिस-II मिशन की ऐतिहासिक उड़ान: चंद्रमा की परिक्रमा के बाद पृथ्वी वापसी की ओर बढ़ा नासा का अंतरिक्ष यान

वाशिंगटन,10 अप्रैल (युआईटीवी)- मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस-II मिशन को लेकर बड़ी उपलब्धि की घोषणा की है। एजेंसी के अनुसार यह मिशन 1 अप्रैल को सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ था और अब अपनी ऐतिहासिक यात्रा के अंतिम चरण में पहुँच चुका है। नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए जानकारी दी कि अंतरिक्ष यान चंद्रमा की परिक्रमा कर चुका है और अब पृथ्वी की ओर लौट रहा है। इसकी समुद्र में लैंडिंग,जिसे स्प्लैशडाउन कहा जाता है, 10 अप्रैल को रात करीब 8:07 बजे (ईटी) प्रशांत महासागर में होने की उम्मीद है।

इस मिशन ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है,क्योंकि यह पाँच दशकों से भी अधिक समय के बाद मानवता की गहरे अंतरिक्ष में वापसी का प्रतीक बनकर उभरा है। अपोलो-13 मिशन के बाद पहली बार इंसानों को पृथ्वी की निचली कक्षा से बहुत दूर ले जाने वाला यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है। नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मिशन की सफलता आने वाले समय में चंद्रमा पर मानव की स्थायी उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

इस ऐतिहासिक मिशन में चार अंतरिक्ष यात्रियों का दल शामिल है,जिसमें रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर,क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं। इन अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी यात्रा के दौरान पृथ्वी से 248,655 मील की दूरी तय कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। इतना ही नहीं,मिशन के सबसे दूर के बिंदु पर यह दल लगभग 252,756 मील तक पहुँच गया,जो पिछले रिकॉर्ड से कहीं अधिक है। इस उपलब्धि ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई स्थापित की है।

यह मिशन कुल 10 दिनों का रहा,जिसका मुख्य उद्देश्य ओरियन अंतरिक्ष यान और स्पेस लॉन्च सिस्टम की गहरे अंतरिक्ष में क्षमताओं का परीक्षण करना था। इस दौरान अंतरिक्ष यान ने चंद्रमा के पास से गुजरते हुए उसकी परिक्रमा की,जो भविष्य में होने वाले मानव मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के परीक्षण मिशन यह सुनिश्चित करते हैं कि आगे के अभियानों में तकनीकी रूप से किसी भी तरह की चुनौती का सामना न करना पड़े।

नासा की वरिष्ठ अधिकारी डॉ. लोरी ग्लेज ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि एजेंसी लगातार नई सीमाओं को पार करने और अंतरिक्ष में नई खोज करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत आने वाले मिशन मानवता को चंद्रमा और उससे आगे की यात्रा के लिए तैयार करेंगे।

वहीं,अंतरिक्ष यान से जुड़े अनुभव साझा करते हुए जेरेमी हैनसेन ने कहा कि यह मिशन न केवल तकनीकी उपलब्धि है,बल्कि यह उन अंतरिक्ष यात्रियों की विरासत को भी सम्मान देता है,जिन्होंने दशकों पहले अंतरिक्ष अन्वेषण की नींव रखी थी। उन्होंने इसे एक नए युग की शुरुआत बताते हुए कहा कि आने वाले समय में अंतरिक्ष यात्रा और भी अधिक व्यापक और उन्नत होगी।

आर्टेमिस-II मिशन को नासा के दीर्घकालिक लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एजेंसी का उद्देश्य चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसानों की मौजूदगी स्थापित करना है,जिससे भविष्य में मंगल जैसे दूरस्थ ग्रहों तक मानव मिशन भेजने का रास्ता भी साफ हो सके। इस मिशन की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बल पर अंतरिक्ष में नई संभावनाओं को साकार किया जा सकता है।

जैसे-जैसे अंतरिक्ष यान पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है,पूरी दुनिया की निगाहें उसके सुरक्षित लौटने पर टिकी हुई हैं। यदि यह मिशन सफलतापूर्वक अपने अंतिम चरण को पूरा कर लेता है,तो यह न केवल नासा बल्कि पूरी मानवता के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। आर्टेमिस-II ने यह साबित कर दिया है कि अंतरिक्ष अन्वेषण का भविष्य उज्ज्वल है और मानवता एक बार फिर सितारों की ओर बढ़ने के लिए तैयार है।