नई दिल्ली, 4 अप्रैल (युआईटीवी)- अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रचते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस II मिशन के दौरान ली गई पृथ्वी की नई और अद्भुत तस्वीरें जारी की हैं। इन तस्वीरों में अंतरिक्ष से दिखाई देने वाली पृथ्वी की खूबसूरती ने एक बार फिर पूरी दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया है। ‘ब्लू मार्बल’ के नाम से मशहूर पृथ्वी का यह दृश्य न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी इंसानों को अपने ग्रह के प्रति एक नया नजरिया देता है।
नासा ने इन तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए एक भावुक संदेश भी लिखा। एजेंसी ने कहा कि पिछले 54 वर्षों में मानवता ने अंतरिक्ष में लंबा सफर तय किया है,लेकिन एक चीज अब भी वैसी ही है—अंतरिक्ष से दिखने वाली हमारी पृथ्वी की सुंदरता। यह बयान न केवल तकनीकी प्रगति को दर्शाता है,बल्कि यह भी बताता है कि समय बदलने के बावजूद हमारा ग्रह अब भी उतना ही आकर्षक और जीवनदायी है।
जारी की गई तस्वीरों में एक विशेष बात यह है कि इनमें 1972 के ऐतिहासिक अपोलो-17 मिशन के दौरान ली गई तस्वीर और वर्तमान आर्टेमिस-II मिशन की तस्वीर को साथ में दिखाया गया है। इन दोनों तस्वीरों की तुलना करने पर साफ तौर पर देखा जा सकता है कि तकनीक में कितना बदलाव आया है,लेकिन पृथ्वी की प्राकृतिक सुंदरता अब भी वैसी ही बनी हुई है। यह तुलना मानव अंतरिक्ष यात्रा के विकास को भी दर्शाती है।
इन नई तस्वीरों को आर्टेमिस-II मिशन के कमांडर और अनुभवी अंतरिक्ष यात्री रीड वाइजमैन ने कैद किया है। उन्होंने ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न पूरा करने के बाद ओरियन अंतरिक्ष यान की खिड़की से इन अद्भुत दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया। यह पहली बार है,जब इस तरह की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें सीधे स्पेसक्राफ्ट के अंदर से ली गई हैं,जिससे यह उपलब्धि और भी खास बन जाती है।
इन तस्वीरों में पृथ्वी का एक बेहद अनोखा रूप दिखाई देता है। एक तस्वीर में पृथ्वी सूर्य के सामने आकर उसे आंशिक रूप से ढकती हुई नजर आ रही है। इस दृश्य के कारण पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुवों के पास दो चमकदार ‘ऑरोरा’ यानी ध्रुवीय ज्योतियाँ साफ दिखाई दे रही हैं। ये रंगीन रोशनी अंतरिक्ष से बेहद आकर्षक लगती है और पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड की खूबसूरती को दर्शाती है। इसके अलावा,तस्वीर के निचले हिस्से में ‘जोडिएकल लाइट’ भी दिखाई दे रही है,जो अंतरिक्ष में मौजूद धूल कणों पर सूर्य के प्रकाश के परावर्तन के कारण बनती है।
दूसरी तस्वीर में पृथ्वी घने बादलों से ढकी हुई नजर आती है,जो हमारे ग्रह के मौसम तंत्र और जलवायु की जटिलता को दर्शाती है। इस तस्वीर में यह भी साफ देखा जा सकता है कि जैसे-जैसे अंतरिक्ष यान आगे बढ़ रहा है,पृथ्वी धीरे-धीरे दूर होती जा रही है। यह दृश्य न केवल वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है,बल्कि आम लोगों को भी यह एहसास कराता है कि ब्रह्मांड में हमारा ग्रह कितना छोटा और अनमोल है।
इस समय आर्टेमिस-II मिशन का क्रू पृथ्वी से लगभग 90,000 मील यानी करीब 1.45 लाख किलोमीटर की दूरी पर है और चंद्रमा की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इस मिशन में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं,जिनमें तीन अमेरिकी—रीड वाइजमैन,विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसन शामिल हैं। यह टीम मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए अध्याय की शुरुआत कर रही है।
आर्टेमिस-II मिशन का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि यह 1972 के बाद पहला ऐसा मिशन है,जिसमें इंसान चंद्रमा के चारों ओर यात्रा करेंगे। हालाँकि,इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेंगे,बल्कि वे ओरियन कैप्सूल में बैठकर चंद्रमा के ‘फार साइड’ यानी उस हिस्से से गुजरेंगे जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता। इसके बाद वे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटेंगे।
यह मिशन भविष्य के आर्टेमिस कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है,जिसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में मानव को फिर से चंद्रमा की सतह पर उतारना और आगे चलकर मंगल ग्रह तक पहुँचने की तैयारी करना है। इस दिशा में आर्टेमिस-II एक परीक्षण मिशन के रूप में काम कर रहा है,जिसमें अंतरिक्ष यान की क्षमताओं और मानव सहनशीलता का परीक्षण किया जा रहा है।
नासा द्वारा जारी की गई ये नई तस्वीरें केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं हैं,बल्कि यह मानवता के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी की यह झलक हमें यह याद दिलाती है कि हमारा ग्रह कितना अनमोल है और इसे सुरक्षित रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आने वाले समय में जब मानव और भी दूर अंतरिक्ष में जाएगा,तब भी यह ‘ब्लू मार्बल’ हमारे लिए हमेशा घर की याद दिलाता रहेगा।
