गुवाहाटी,9 अप्रैल (युआईटीवी)- असम में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांग्रेस के नेता अब इतने हताश हो चुके हैं कि वे अपने ही सहयोगियों को मुश्किल में डाल रहे हैं। सरमा का यह बयान ऐसे समय आया है,जब राज्य में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है और मतदान से ठीक पहले राजनीतिक तापमान काफी बढ़ चुका है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किए गए अपने पोस्ट में हिमंता सरमा ने सीधे तौर पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस द्वारा जारी किए जा रहे दस्तावेज पूरी तरह से फर्जी हैं और इन्हें जनता को गुमराह करने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा है। सरमा ने दावा किया कि असम सरकार की टीम पहले ही इन तथाकथित नकली दस्तावेजों का खुलासा कर चुकी है,लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस बार-बार ऐसे ही दस्तावेज जारी कर रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि यह अब सामान्य राजनीति नहीं रह गई है,बल्कि यह सीधे तौर पर धोखाधड़ी का मामला बन चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम अब अपनी जिम्मेदारी से भटक गया है और वह केवल राजनीतिक लाभ के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। सरमा ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि असम की जनता जल्द ही इसका जवाब देगी और कांग्रेस नेतृत्व को इस कथित धोखे की कीमत चुकानी पड़ेगी।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है,जब असम में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान होने वाला है। इसके साथ ही केरल और पुडुचेरी में भी चुनाव हो रहे हैं,जिससे राष्ट्रीय स्तर पर भी इस चुनावी मुकाबले की अहमियत बढ़ गई है। असम में खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है,ऐसे में दोनों दलों के बीच बयानबाजी का तीखा होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
हिमंता सरमा के इस बयान ने चुनावी माहौल को और ज्यादा गर्म कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी जानबूझकर ऐसे दस्तावेज जारी कर रही है,जिससे जनता में भ्रम पैदा हो और सरकार की छवि खराब हो। सरमा का कहना है कि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है,जिसे उनकी सरकार ने समय रहते उजागर कर दिया है।
हालाँकि,कांग्रेस की ओर से इस पूरे मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है,लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं ने पहले भी असम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस लगातार राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार, प्रशासनिक विफलता और जनविरोधी नीतियों को लेकर हमला करती रही है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच यह टकराव नया नहीं है,बल्कि चुनाव के करीब आते ही यह और अधिक तीखा हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप आम बात होते हैं,लेकिन इस बार मामला कुछ ज्यादा ही व्यक्तिगत और आक्रामक होता नजर आ रहा है। हिमंता सरमा का सीधे तौर पर पवन खेड़ा का नाम लेना और कांग्रेस पर ‘धोखे’ का आरोप लगाना इस बात का संकेत है कि भाजपा इस चुनाव को पूरी गंभीरता से ले रही है और कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती।
दूसरी ओर,कांग्रेस भी अपनी रणनीति के तहत सरकार को घेरने में लगी हुई है। पार्टी का फोकस राज्य में बेरोजगारी,महँगाई और विकास से जुड़े मुद्दों को उठाने पर है। हालाँकि,सरमा के आरोपों के बाद अब कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है कि वह इन आरोपों का जवाब दे और अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
असम की जनता के लिए यह चुनाव काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलाव हुए हैं,जिनका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। ऐसे में दोनों प्रमुख दल जनता को अपने पक्ष में करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और क्या यह मुद्दा मतदान के रुझानों को प्रभावित करता है। फिलहाल,इतना तय है कि असम में चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है और आखिरी समय तक सियासी घमासान जारी रहेगा।
