वाशिंगटन,3 मार्च (युआईटीवी)- अमेरिका के टेक्सास राज्य की राजधानी ऑस्टिन में रविवार सुबह हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ‘वेस्ट सिक्स्थ स्ट्रीट’ पर जुटे नागरिकों पर एक बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं,जिसमें दो लोगों की मौत हो गई और 14 अन्य घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद ऑस्टिन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हमलावर को मार गिराया। बाद में संघीय जाँच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने पुष्टि की कि मामले की जाँच आतंकी एंगल से की जा रही है। इस घटना के बाद वॉशिंगटन की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और इमिग्रेशन तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
हमले के तुरंत बाद अमेरिकी लॉमेकर्स ने 2 मार्च को कांग्रेस नेतृत्व को एक विस्तृत पत्र लिखा। यह पत्र सीनेट मेजॉरिटी लीडर जॉन थ्यून,सीनेट डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर,हाउस स्पीकर माइक जॉनसन और हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीस को संबोधित किया गया। पत्र में सांसदों ने कहा कि “सोच-विचार का समय बीत चुका है” और अब ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिकी जनता और खासतौर पर टेक्सास के लोग ऐसी इमिग्रेशन नीति चाहते हैं,जो अमेरिकियों की सुरक्षा और भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
पत्र में सांसदों ने तर्क दिया कि हर वह दिन जब कांग्रेस निर्णायक कदम उठाने में विफल रहती है,वह अमेरिकी नागरिकों की जान को खतरे में डालता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार निर्णायक कदम नहीं उठाती,तो राज्यों को अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए,ताकि वे अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। यह बयान संघीय और राज्य सरकारों के अधिकारों को लेकर चल रही पुरानी बहस को फिर से तेज कर सकता है।
इस बीच,वाशिंगटन में विदेश नीति को लेकर भी एक अहम बयान सामने आया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका के पास तेल की बढ़ती कीमतों का मुकाबला करने और वैश्विक शिपिंग लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की स्पष्ट रणनीति है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के मिसाइल हथियारों के जखीरे और उसकी नौसैनिक क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से हमले कर रहा है। हालाँकि,उन्होंने किसी विशेष सैन्य कार्रवाई का खुलासा नहीं किया,लेकिन उनके बयान से यह स्पष्ट हुआ कि मध्य पूर्व में तनाव का असर अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है।
ऑस्टिन हमले के बाद लिखे गए पत्र में सांसदों ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं,जिनमें सबसे पहली माँग गृह सुरक्षा विभाग को पूरी तरह से फंड देने की है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका का गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) देश की फ्रंटलाइन डिफेंस है और बजट में रुकावट या राजनीतिक गतिरोध राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता है। उनका तर्क है कि अगर डीएचएस को पर्याप्त संसाधन नहीं मिलते,तो वह सीमा सुरक्षा,इंटेलिजेंस शेयरिंग और आतंकी खतरों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावी ढंग से नहीं कर पाएगा।
दूसरी बड़ी माँग एच-1बी वीजा जारी करने पर तत्काल रोक लगाने की है। सांसदों ने लिखा कि जब तक मौजूदा वीजा धारकों और उनके स्टेटस का पूर्ण ऑडिट नहीं हो जाता,तब तक नए एच-1बी वीजा जारी करने पर रोक लगाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि देश में कौन लोग मौजूद हैं,वे यहाँ किस उद्देश्य से आए हैं और क्या वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई खतरा पैदा करते हैं,इसका स्पष्ट रिकॉर्ड होना चाहिए। यह माँग तकनीकी और कॉर्पोरेट जगत में भी हलचल पैदा कर सकती है,क्योंकि एच-1बी वीजा के तहत बड़ी संख्या में विदेशी पेशेवर अमेरिका में काम करते हैं।
तीसरी माँग और भी व्यापक है। सांसदों ने कहा कि जब तक उचित वेटिंग प्रोटोकॉल तैयार नहीं हो जाते,तब तक सभी प्रकार के इमिग्रेशन पर अस्थायी रोक लगा दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यह कदम अप्रवासी विरोधी नहीं बल्कि अमेरिका समर्थक है। हालाँकि,इस प्रस्ताव को लेकर डेमोक्रेटिक नेताओं और मानवाधिकार समूहों की ओर से कड़ा विरोध सामने आने की संभावना है,क्योंकि अमेरिका लंबे समय से खुद को आप्रवासियों का देश बताता आया है।
चौथी माँग में सांसदों ने संघीय अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे अपनी प्राथमिकताओं को पुनर्निर्देशित करें और देश के भीतर पहले से मौजूद संभावित खतरों की पहचान पर अधिक ध्यान दें। उन्होंने सुझाव दिया कि इमिग्रेशन रिकॉर्ड,लॉ एनफोर्समेंट डेटाबेस और इंटेलिजेंस रिपोर्ट को क्रॉस-रेफरेंस करने के लिए एक सुव्यवस्थित और पर्याप्त रूप से फंडेड अभियान चलाया जाए। उनका कहना है कि इससे उन व्यक्तियों की पहचान की जा सकेगी जो अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा बन सकते हैं।
पत्र में यह भी कहा गया कि आतंकवादियों के लिए राजनीतिक दल मायने नहीं रखते और उनके निशाने पर सभी अमेरिकी होते हैं। यह बयान उस समय आया है,जब अमेरिका में राजनीतिक ध्रुवीकरण अपने चरम पर है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक नेताओं के बीच सीमा सुरक्षा,इमिग्रेशन सुधार और संघीय बजट को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। ऑस्टिन हमले के बाद यह बहस और तेज हो गई है।
टेक्सास के नेताओं ने भी संकेत दिया है कि अगर कांग्रेस निर्णायक कदम नहीं उठाती,तो राज्य अपने स्तर पर कड़े उपाय करेगा। उन्होंने कहा कि टेक्सास फेडरल सहयोग के साथ या उसके बिना,अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर उपलब्ध कानूनी विकल्प का इस्तेमाल करेगा। हालाँकि,“गैरकानूनी टूल” जैसे शब्दों ने विवाद खड़ा कर दिया है और विपक्षी नेताओं ने इसे संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना आने वाले चुनावी माहौल को भी प्रभावित कर सकती है। इमिग्रेशन और सीमा सुरक्षा पहले से ही अमेरिकी राजनीति के केंद्र में रहे हैं। अब एक आतंकी हमले के बाद इन मुद्दों पर और अधिक भावनात्मक और आक्रामक बहस देखने को मिल सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,यदि कांग्रेस में गतिरोध बना रहता है,तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँच सकता है,खासकर यदि राज्य और संघीय अधिकारों के बीच टकराव बढ़ता है।
दूसरी ओर,नागरिक अधिकार समूहों ने चेतावनी दी है कि किसी एक हमले के आधार पर व्यापक इमिग्रेशन प्रतिबंध लागू करना उचित नहीं होगा। उनका कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है,लेकिन इसके नाम पर लाखों वैध आप्रवासियों और वीजा धारकों को संदेह की नजर से देखना देश की मूल भावना के खिलाफ होगा।
ऑस्टिन की सड़कों पर अभी भी घटना की गूँज महसूस की जा सकती है। स्थानीय समुदाय ने पीड़ितों की याद में कैंडललाइट विजिल आयोजित किए हैं। कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने एकजुटता का संदेश दिया है। वहीं,घायल लोगों का इलाज जारी है और प्रशासन ने उनके परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
ऑस्टिन हमला केवल एक आपराधिक या आतंकी घटना भर नहीं रह गया है,बल्कि यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति,इमिग्रेशन ढाँचे और संघीय-राज्य संबंधों पर व्यापक बहस का कारण बन गया है। आने वाले हफ्तों में कांग्रेस की कार्रवाई,डीएचएस की फंडिंग पर निर्णय और इमिग्रेशन नीतियों में संभावित बदलाव यह तय करेंगे कि अमेरिका इस संकट से किस दिशा में आगे बढ़ता है। फिलहाल इतना तय है कि यह घटना अमेरिकी राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकती है।
