मेलबर्न,31 जनवरी (युआईटीवी)- मेलबर्न के रॉड लेवर एरीना में शुक्रवार को खेला गया ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 का पुरुष एकल सेमीफाइनल टेनिस इतिहास के सबसे यादगार मुकाबलों में शामिल हो गया। स्पेन के 22 वर्षीय स्टार खिलाड़ी कार्लोस अल्काराज ने जर्मनी के अनुभवी टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव को पाँच घंटे 27 मिनट तक चले मैराथन मुकाबले में 6-4, 7-6(5), 6-7(3), 6-7(4), 7-5 से हराकर पहली बार ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में जगह बना ली। यह जीत अल्काराज के करियर की सबसे जुझारू और मानसिक मजबूती की मिसाल मानी जा रही है,क्योंकि उन्होंने चोट और शारीरिक परेशानी के बावजूद आखिरी बॉल तक हार नहीं मानी।
मैच की शुरुआत से ही दोनों खिलाड़ियों ने आक्रामक और संतुलित खेल का प्रदर्शन किया। पहले सेट में अल्काराज ने अपनी तेज रफ्तार बेसलाइन रैलियों और सटीक फोरहैंड के दम पर ज्वेरेव पर दबाव बनाया और 6-4 से सेट अपने नाम किया। दूसरे सेट में मुकाबला और भी रोमांचक हो गया। ज्वेरेव ने अपनी मजबूत सर्विस और बैकहैंड से वापसी की कोशिश की,लेकिन टाईब्रेक में अल्काराज ने धैर्य बनाए रखा और 7-6(5) से बढ़त दोगुनी कर ली।
हालाँकि,इसके बाद मैच का रुख बदलता नजर आया। तीसरे और चौथे सेट में ज्वेरेव ने अनुभव का फायदा उठाते हुए लंबी रैलियों में अल्काराज को थकाने की रणनीति अपनाई। इसी दौरान तीसरे सेट के बीच अल्काराज को शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें मेडिकल टाइम आउट लेना पड़ा। यह पल मैच का सबसे विवादित क्षण बन गया। ज्वेरेव ने अधिकारियों से इस फैसले पर आपत्ति जताई और उनका कहना था कि अल्काराज को क्रैम्प के कारण गेम के बीच में टाइम आउट लेने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इस मुद्दे पर ज्वेरेव और अंपायर के बीच बहस भी देखने को मिली,जबकि दूसरी ओर अल्काराज फिजियो से इलाज करवा रहे थे।
चौथे सेट में ज्वेरेव ने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए टाईब्रेक में जीत हासिल की और मैच को पाँचवें सेट तक खींच ले गए। स्टेडियम में मौजूद दर्शक सांस थामे इस ऐतिहासिक मुकाबले का आनंद ले रहे थे। पाँचवां और निर्णायक सेट दोनों खिलाड़ियों के लिए शारीरिक और मानसिक परीक्षा बन गया। थकान साफ दिखाई दे रही थी,लेकिन अल्काराज की आँखों में जीत की भूख नजर आ रही थी। उन्होंने अपने खेल में संयम और आक्रामकता का संतुलन बनाए रखा और अहम पलों पर ब्रेक लेकर 7-5 से सेट जीतते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।
मैच के बाद दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को गले लगाकर खेल भावना की मिसाल पेश की और कोर्ट पर हुई तनातनी को पीछे छोड़ दिया। जीत के बाद अल्काराज भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि ऐसे मैचों में खुद पर विश्वास रखना सबसे जरूरी होता है। अल्काराज ने कहा, “मैं हमेशा कहता हूँ कि चाहे हालात कैसे भी हों,आपको खुद पर भरोसा रखना चाहिए। तीसरे सेट के बीच में मैं संघर्ष कर रहा था। फिजिकली यह मेरे अब तक के करियर का सबसे कठिन मैच था,लेकिन मैं पहले भी ऐसे हालातों से गुजर चुका हूँ। मुझे पता था कि मुझे क्या करना है। मुझे मैच में अपना दिल झोंकना था और मैंने आखिरी बॉल तक लड़ाई लड़ी।”
उन्होंने आगे कहा कि पाँचवें सेट में धैर्य रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। अल्काराज ने कहा, “मैं जानता था कि मौके आएँगे। मुझे खुद पर गर्व है कि मैंने जिस तरह से वापसी की और जिस तरह से मानसिक रूप से मजबूत रहा।”
इस ऐतिहासिक जीत पर टेनिस जगत से अल्काराज को बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया। 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन नोवाक जोकोविच ने भी जैनिक सिनर के साथ अपने सेमीफाइनल मुकाबले से पहले अल्काराज को फाइनल में पहुँचने पर बधाई दी। जोकोविच ने कहा कि अल्काराज ने जिस तरह की मानसिक मजबूती दिखाई,वह उन्हें भविष्य का महान खिलाड़ी साबित करती है।
अब फाइनल में अल्काराज का सामना दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा,जहाँ जैनिक सिनर और नोवाक जोकोविच आमने-सामने होंगे। यह फाइनल अल्काराज के करियर के लिए बेहद खास होने वाला है,क्योंकि अगर वह खिताब जीतने में सफल रहते हैं,तो वह पुरुष एकल में सबसे कम उम्र में करियर ग्रैंड स्लैम पूरा करने वाले खिलाड़ी बन जाएँगे। इससे पहले वह यूएस ओपन,फ्रेंच ओपन और विंबलडन का खिताब जीत चुके हैं,लेकिन ऑस्ट्रेलियन ओपन का ताज उनके करियर में अब तक गायब था।
मेलबर्न में मिली यह जीत सिर्फ एक फाइनल में जगह बनाने की कहानी नहीं है,बल्कि यह अल्काराज की जिद,साहस और कभी हार न मानने वाले जज्बे की पहचान बन गई है। टेनिस प्रेमियों की निगाहें अब फाइनल पर टिकी हैं,जहाँ एक नया इतिहास रचने के लिए कार्लोस अल्काराज कोर्ट पर उतरेंगे।
