बांग्लादेश महिला टीम की पूर्व कप्तान जहांआरा आलम (तस्वीर क्रेडिट@ICC)

बांग्लादेश महिला टीम की पूर्व कप्तान जहांआरा आलम के यौन उत्पीड़न के आरोपों की जाँच के लिए समिति गठित,15 दिनों में रिपोर्ट पेश करेगी बीसीबी

नई दिल्ली,7 नवंबर (युआईटीवी)- बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने देश की महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान जहांआरा आलम द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों पर जाँच के लिए एक विशेष समिति के गठन की घोषणा की है। बीसीबी ने सोमवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह समिति 15 कार्यदिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें बोर्ड को सौंपेगी। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है,जब जहांआरा आलम ने पूर्व चीफ सेलेक्टर और टीम मैनेजर मंजरुल इस्लाम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पूरे बांग्लादेश क्रिकेट तंत्र को हिला दिया है।

बीसीबी ने अपने बयान में कहा, “बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड राष्ट्रीय महिला क्रिकेट टीम की एक पूर्व सदस्य द्वारा लगाए गए आरोपों पर गंभीर चिंता व्यक्त करता है। मामला अत्यंत संवेदनशील है,इसलिए बोर्ड ने एक जाँच समिति गठित करने का फैसला किया है,जो सभी तथ्यों और बयानों की बारीकी से समीक्षा करेगी। समिति को निर्देश दिया गया है कि वह 15 कार्यदिवसों के भीतर अपनी जाँच पूरी करे और रिपोर्ट सौंपे।”

बोर्ड ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वह खिलाड़ियों और कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित,सम्मानजनक और पेशेवर माहौल सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बयान में आगे कहा गया, “बीसीबी ऐसे मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेता है और जाँच के निष्कर्षों के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। हमारे लिए खिलाड़ियों की सुरक्षा और गरिमा सर्वोपरि है।”

दरअसल,बांग्लादेश की अनुभवी तेज गेंदबाज और पूर्व कप्तान जहांआरा आलम ने हाल ही में पत्रकार रियासाद अजीम को दिए एक इंटरव्यू में टीम मैनेजर मंजरुल इस्लाम पर अनुचित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि मंजरुल इस्लाम अक्सर उनके साथ निजी सीमाओं का उल्लंघन करते थे। जहांआरा के मुताबिक, “वह बिना इजाजत मेरे कंधे पर हाथ रख देते थे और कई बार ऐसी बातें करते जिनसे मुझे असहज महसूस होता था। वे हाथ मिलाने के बजाय गले लगाने के लिए पास आते थे,वह भी तब जब टीम की अन्य साथी खिलाड़ी और अधिकारी मौजूद होते थे।”

जहांआरा ने आगे कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत बीसीबी के पूर्व निदेशक शफीउल इस्लाम नादेल और बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निजामुद्दीन चौधरी से की थी,लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगीं और मैदान पर अपने प्रदर्शन पर भी इसका असर पड़ा। जहांआरा ने इंटरव्यू में भावुक होकर कहा, “मैंने देश के लिए खेला है,लेकिन कभी नहीं सोचा था कि मुझे अपनी ही टीम के माहौल में असुरक्षित महसूस करना पड़ेगा।”

जहांआरा आलम का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया,जिसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट जगत में हड़कंप मच गया। कई पूर्व खिलाड़ी और महिला संगठनों ने बीसीबी से इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच की माँग की। आलोचकों का कहना है कि महिला क्रिकेट टीम में लंबे समय से एक ‘मौन संस्कृति’ बनी हुई थी,जहाँ महिला खिलाड़ियों की शिकायतों को अनसुना कर दिया जाता था। इस वजह से कई खिलाड़ी अपनी बात खुलकर रखने से डरती थीं।

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष नजमुल हसन पापोन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बोर्ड किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “जहांआरा एक वरिष्ठ खिलाड़ी हैं और उन्होंने देश के लिए लंबे समय तक सेवाएँ दी हैं। उनके आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जाँच निष्पक्ष और पारदर्शी हो और यदि किसी की गलती साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

जहांआरा आलम का क्रिकेट करियर बांग्लादेश महिला क्रिकेट के इतिहास में खास रहा है। वह बांग्लादेश की पहली महिला क्रिकेटर हैं,जिन्होंने भारत में महिला टी20 चैलेंज और फेयरब्रेक इनविटेशनल टी20 जैसे अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। उन्होंने बांग्लादेश की ओर से 52 वनडे मैच खेले,जिसमें उन्होंने 48 विकेट झटके। वहीं 83 टी20 अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में उन्होंने 24.03 की औसत से 60 विकेट हासिल किए हैं। उनकी गिनती बांग्लादेश की सबसे अनुभवी और सफल गेंदबाजों में होती है।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जहांआरा का खुलकर सामने आना बांग्लादेश महिला क्रिकेट में बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पहले भी महिला खिलाड़ियों ने टीम मैनेजमेंट और चयन प्रक्रिया में पक्षपात को लेकर सवाल उठाए थे,लेकिन यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप पहली बार इतने सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।

बीसीबी के लिए यह मामला न केवल एक आंतरिक चुनौती है,बल्कि उसकी साख से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर आईसीसी (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल) पहले ही कई सख्त दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। ऐसे में बीसीबी पर दबाव है कि वह न केवल निष्पक्ष जाँच कराए,बल्कि महिला क्रिकेटरों के लिए भविष्य में एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल तैयार करे।

अब सबकी निगाहें बीसीबी द्वारा गठित जांच समिति पर टिकी हैं,जो अगले 15 कार्यदिवसों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यदि समिति की रिपोर्ट में मंजरुल इस्लाम या किसी अन्य अधिकारी की गलती साबित होती है,तो यह मामला बांग्लादेश क्रिकेट के इतिहास में एक मिसाल बन सकता है। वहीं जहांआरा आलम का साहसिक कदम अन्य महिला खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा साबित हो सकता है,ताकि वे भी अपने अनुभवों को बिना किसी डर के सामने रख सकें।

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि खेल के मैदान में सफलता जितनी जरूरी है,उतना ही जरूरी है खिलाड़ियों की गरिमा और सुरक्षा का सम्मान करना। बांग्लादेश क्रिकेट अब इस चुनौतीपूर्ण दौर से कैसे गुजरता है,यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।