किरेन रिजिजू

बजट सत्र के दूसरे चरण से पहले सियासी गरमाहट,लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर साधा निशाना

नई दिल्ली,9 मार्च (युआईटीवी)- संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इसके साथ ही राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। सत्र शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह बेहद अफसोस की बात है कि बजट सत्र के दूसरे भाग की शुरुआत ऐसे प्रस्ताव से हो रही है,जो सीधे तौर पर लोकसभा के सर्वोच्च पदों में से एक की गरिमा को चुनौती देता है।

रिजिजू ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार इस अविश्वास प्रस्ताव का पूरी तरह से जवाब देगी और इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बहस और मतभेद स्वाभाविक हैं,लेकिन संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुँचाना किसी भी तरह से उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को गिराने के लिए कितनी दूर तक जाएगा।

उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि वह न तो लोकतंत्र का सम्मान करती है और न ही संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा को स्वीकार करती है। उनके अनुसार कांग्रेस ने समय-समय पर कई संवैधानिक संस्थाओं को लेकर विवाद खड़े किए हैं और उनकी गरिमा पर सवाल उठाए हैं। रिजिजू ने कहा कि इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी की राजनीति अब एक परिवार के इर्द-गिर्द ही सिमटकर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं की बजाय एक ही परिवार के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने में अधिक रुचि रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नुकसानदायक है।

रिजिजू ने कहा कि संसद में कई महत्वपूर्ण संस्थागत पद होते हैं,जिनकी अपनी गरिमा और परंपरा होती है। उन्होंने कहा कि इन पदों का सम्मान करना हर राजनीतिक दल की जिम्मेदारी है। उन्होंने विशेष रूप से ओम बिड़ला के नेतृत्व वाले लोकसभा स्पीकर पद का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण संस्था है और इसे विवादों में घसीटना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि विपक्ष कम से कम लोकसभा स्पीकर के पद को विवादों से दूर रखेगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके अनुसार कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस पद की गरिमा पर भी सवाल उठाकर एक गलत परंपरा की शुरुआत की है। रिजिजू ने कहा कि इस तरह की राजनीति से लोकतंत्र को नुकसान पहुँच सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी मजबूती के साथ अपना पक्ष रखेगी और संसद में विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर मुद्दे पर चर्चा हो सकती है,लेकिन आरोप लगाने से पहले तथ्यों और परंपराओं का ध्यान रखना जरूरी होता है।

दरअसल,संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले विपक्ष की ओर से लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। विपक्ष का कहना है कि सदन की कार्यवाही के संचालन को लेकर उन्हें कई आपत्तियाँ हैं,जबकि सत्ता पक्ष इसे पूरी तरह से राजनीतिक कदम बता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बजट सत्र का दूसरा चरण काफी हंगामेदार हो सकता है। संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होनी है,लेकिन स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के कारण सत्र की शुरुआत ही राजनीतिक टकराव से होने की संभावना जताई जा रही है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी लगातार तेज हो रही है। सरकार का कहना है कि विपक्ष अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहा है,जबकि विपक्ष का आरोप है कि सदन के संचालन में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है।

ऐसे में सोमवार से शुरू होने वाला बजट सत्र का दूसरा चरण राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद के भीतर इस मुद्दे पर किस तरह की बहस होती है और क्या दोनों पक्ष किसी सहमति तक पहुँच पाते हैं या फिर सत्र के दौरान राजनीतिक टकराव और अधिक बढ़ता है। फिलहाल इतना तय है कि सत्र की शुरुआत से पहले ही माहौल काफी गर्म हो चुका है और आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।