वाशिंगटन,3 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने एक बार फिर गंभीर आतंकी खतरे को समय रहते रोक दिया। जाँच एजेंसी ने खुलासा किया है कि उत्तरी कैरोलिना के मिंट हिल इलाके में नए साल के मौके पर भीड़भाड़ वाले ग्रॉसरी स्टोर और रेस्तरां पर हमला करने की साजिश नाकाम कर दी गई। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी 18 वर्षीय क्रिश्चियन स्टर्डिवेंट,कथित तौर पर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) की विचारधारा से प्रेरित था और पिछले करीब एक साल से इस हमले की तैयारी कर रहा था।
एफबीआई के मुताबिक,स्टर्डिवेंट मिंट हिल का निवासी है और पास के एक बर्गर किंग आउटलेट में काम करता था। देखने में एक साधारण युवक लगता यह आरोपी अंदर-ही-अंदर हिंसक कट्टरपंथ से प्रभावित हो चुका था। जाँचकर्ताओं का कहना है कि उसने नए साल की रात को ऐसा हमला करने की योजना बनाई थी,जिससे अधिक से अधिक निर्दोष लोगों को नुकसान पहुँचे और क्षेत्र में दहशत फैल जाए। वह बंदूक के बजाय चाकू और हथौड़ों के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा था,ताकि पास मौजूद लोगों पर अचानक और क्रूर तरीके से वार किया जा सके।
दिसंबर 2025 में स्टर्डिवेंट सोशल मीडिया पर सक्रिय हुआ और वहाँ आईएसआईएस का खुला समर्थन करने वाले कई पोस्ट साझा करने लगा। उसने हिंसा को महिमामंडित करने वाली तस्वीरें और संदेश भी डाले,जिनसे उसका झुकाव और मनोवृति साफ झलकती थी। इसी संदर्भ में जाँच एजेंसियों के रडार पर उसका नाम आया। अधिकारियों को एक ऐसा सोशल मीडिया अकाउंट मिला जिसका डिस्प्ले नाम आईएसआईएस के पूर्व प्रमुख अबू बकर अल-बगदादी से जुड़ा था। इस अकाउंट के जरिये स्टर्डिवेंट कट्टरपंथी सामग्री देखता और साझा करता था।
यही से शुरू हुई निगरानी ने धीरे-धीरे इस साजिश का पूरा खाका सामने ला दिया। जाँच में पता चला कि स्टर्डिवेंट दो अंडरकवर एजेंटों के संपर्क में था,जिनमें से एक एफबीआई का अधिकारी था। आरोपी उन्हें आईएसआईएस के सदस्य समझ बैठा और अपनी योजनाएँ विस्तार से साझा करने लगा। उसने एजेंटों को हथौड़ों और चाकू की तस्वीरें भेजीं और संदेश में लिखा कि वह “जल्द जिहाद” करेगा। इतना ही नहीं,उसने आईएसआईएस के प्रति वफादारी की कसम खाते हुए ग्रॉसरी स्टोर पर हमला करने का जिक्र किया और नए साल से पहले हथियार खरीदने की योजना बताई।
एफबीआई ने बताया कि पूरी अवधि के दौरान आरोपी पर कड़ी नजर रखी गई और ऐसा कोई भी मौका नहीं आने दिया गया,जब वह आम लोगों के लिए वास्तविक खतरा बन सके। एजेंसी का कहना है कि यदि स्टर्डिवेंट अपने घर से हथियार लेकर बाहर निकलता,तो उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया जाता। यानी,योजना भले ही भयावह थी,लेकिन सुरक्षा एजेंसियाँ हर कदम पर उससे एक कदम आगे थीं।
29 दिसंबर को जब उसके घर की तलाशी ली गई तो जाँचकर्ताओं को “न्यू इयर्स अटैक 2026” नाम से एक हाथ से लिखा दस्तावेज मिला। इस दस्तावेज में उसने 20–21 लोगों को चाकू से घायल करने,पुलिस पर हमला कर “शहीद” बनने और इस पूरी कार्रवाई के लिए आवश्यक सामान की सूची तैयार की थी। सूची में वेस्ट,मास्क, टैक्टिकल ग्लव्स और अन्य वस्तुएँ शामिल थीं। तलाशी में उसके बिस्तर के नीचे दो हथौड़े और दो चाकू भी बरामद किए गए,जो उसके इरादों का स्पष्ट सबूत थे।
स्टर्डिवेंट को 31 दिसंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और उसे संघीय अदालत में पेश किया गया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी के लिए तय की है। अगर दोष सिद्ध हुआ,तो उसे अधिकतम 20 वर्ष की सजा हो सकती है। एफबीआई के स्पेशल एजेंट इन-चार्ज जेम्स बार्नेकल ने बताया कि यह पहला मौका नहीं है,जब स्टर्डिवेंट सुरक्षा एजेंसियों के संदेह के घेरे में आया हो। जनवरी 2022 में,जब वह नाबालिग था,तब भी वह रडार पर आया था—कथित तौर पर उसने यूरोप में स्थित एक आईएसआईएस सदस्य से संपर्क किया था और हथौड़े से अपने पड़ोसी पर हमला करने की कोशिश की थी। यह इतिहास बताता है कि उसके भीतर चरमपंथ की जड़ें काफी पहले से जम चुकी थीं।
एफबीआई और जिला अभियोजकों के अनुसार,इस मामले ने दर्शाया है कि कैसे ऑनलाइन कट्टरपंथी प्रचार धीरे-धीरे युवाओं को हिंसा की ओर धकेल सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय उग्रवादी नेटवर्क,प्रतीक,नारे और वीडियो अक्सर कमजोर मनोस्थिति वाले या प्रभावित होने वाले युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। धीरे-धीरे यह आकर्षण विचारधारात्मक प्रतिबद्धता में बदल जाता है, और फिर योजना,तैयारी और अंततः हिंसा की ओर ले जाता है।
मिंट हिल की स्थानीय समुदाय में इस खुलासे के बाद राहत और चिंता—दोनों भावनाएँ साथ-साथ दिखाई दीं। राहत इसलिए कि एक संभावित सामूहिक हमला समय रहते रोक लिया गया और चिंता इसलिए कि यह साजिश उनके ही बीच रहने वाले एक युवा द्वारा रची गई थी। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि यह घटना समुदाय को चौकन्ना रहने और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देने की याद दिलाती है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत में अभियोजन पक्ष स्टर्डिवेंट की लिखित योजना,हथियार,सोशल मीडिया पोस्ट और अंडरकवर एजेंटों के साथ हुई बातचीत को मजबूत साक्ष्य के रूप में पेश करेगा। बचाव पक्ष संभवतः उसकी कम उम्र,मानसिक स्थिति और ऑनलाइन ब्रेनवॉशिंग जैसे तर्क दे सकता है। फिर भी,जिस व्यवस्थित तरीके से हमला योजनाबद्ध था,उसने मुकदमे को गंभीर और संवेदनशील बना दिया है।
इस घटना ने एक बार फिर अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती को रेखांकित किया है—ऐसे ‘लोन-वुल्फ’ हमलों को रोकना,जिन्हें किसी बड़े नेटवर्क के बिना,कुछ ही साधनों के साथ अंजाम दिया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लड़ाई केवल कानून प्रवर्तन की नहीं,बल्कि समाज,परिवार, स्कूल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म—सबकी साझा जिम्मेदारी है।
फिलहाल,एफबीआई का दावा है कि जनता कभी वास्तविक खतरे में नहीं आई और एजेंसी ने साजिश के हर चरण पर नियंत्रण रखा,लेकिन यह मामला इस कड़वी सच्चाई को उजागर कर गया कि कट्टरपंथ की आग कहीं भी भड़क सकती है और उसका मुकाबला केवल सतर्कता,समय रहते हस्तक्षेप और मजबूत सामुदायिक सहयोग से ही संभव है।
