मुंबई,24 फरवरी (युआईटीवी)- देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा दांव खेलते हुए अपनी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) शाखा एयरटेल मनी लिमिटेड के जरिए अगले कुछ वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी का कहना है कि यह निवेश भारत के तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय सेवा बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत करेगा और देश में मौजूद क्रेडिट गैप को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
एयरटेल ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित 20,000 करोड़ रुपये के निवेश में से 70 प्रतिशत राशि वह स्वयं लगाएगी,जबकि शेष 30 प्रतिशत पूँजी प्रमोटर समूह भारती एंटरप्राइजेज लिमिटेड के माध्यम से लाई जाएगी। इस कदम को कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है,जिसके तहत वह टेलीकॉम सेवाओं से आगे बढ़कर डिजिटल वित्तीय समाधान के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को व्यापक बनाना चाहती है।
कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल ने इस अवसर पर कहा कि एयरटेल के डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म की अब तक की सफलता इस बात का प्रमाण है कि कंपनी तकनीक,डेटा एनालिटिक्स और ग्राहकों के भरोसे को प्रभावी ढंग से जोड़ने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि एनबीएफसी विस्तार कंपनी के मजबूत डिजिटल आधार को और सुदृढ़ करेगा और यह उस व्यापक दृष्टि को दर्शाता है, जिसके तहत एयरटेल भरोसे,नवाचार और वित्तीय समावेशन पर आधारित भविष्य का डिजिटल लेंडिंग कारोबार तैयार करना चाहती है।
एयरटेल मनी लिमिटेड को 13 फरवरी 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक से एनबीएफसी लाइसेंस प्राप्त हुआ है। यह लाइसेंस कंपनी को स्वतंत्र रूप से ऋण वितरण और वित्तीय सेवाओं का विस्तार करने की अनुमति देता है। कंपनी के अनुसार,यह कदम देश भर में सरल,सुरक्षित और नवाचारी डिजिटल वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक रणनीतिक पहल है। एयरटेल का मानना है कि भारत में बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से पूरी तरह जुड़ी नहीं है और डिजिटल माध्यमों के जरिए इस अंतर को पाटा जा सकता है।
पिछले दो वर्षों में एयरटेल ने अपने डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म को मजबूत किया है। कंपनी के मुताबिक,इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 9,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए जा चुके हैं। कंपनी ने लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर (एलएसपी) मॉडल अपनाया है,जिसमें अनुशासित अंडरराइटिंग प्रक्रिया,बेहतर पोर्टफोलियो प्रबंधन और रियल-टाइम जोखिम निगरानी को प्राथमिकता दी गई है। इस मॉडल के कारण कंपनी को तेज वृद्धि हासिल हुई है, साथ ही ऋण प्रदर्शन भी संतोषजनक बना हुआ है।
एयरटेल का डिजिटल प्लेटफॉर्म 500 से अधिक डेटा वैज्ञानिकों द्वारा समर्थित डेटा और एनालिटिक्स इंजन से लैस है। यह इंजन ग्राहकों की प्रोफाइलिंग,जोखिम आकलन और क्रेडिट स्कोरिंग को अधिक सटीक और तेज बनाता है। कंपनी का दावा है कि उन्नत तकनीक और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली के कारण वह बड़े पैमाने पर विस्तार करने में सक्षम है,जबकि जोखिम प्रबंधन भी संतुलित बना हुआ है। डिजिटल लेंडिंग के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है,लेकिन एयरटेल अपने विशाल ग्राहक आधार और तकनीकी क्षमता के बल पर मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है।
भारत में एमएसएमई,छोटे व्यापारियों और वेतनभोगी वर्ग के बीच क्रेडिट की माँग तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था हर ग्राहक तक समान रूप से नहीं पहुँच पाती,ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित ऋण सेवाएं तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। एयरटेल का मानना है कि उसकी दूरसंचार सेवाओं से जुड़े करोड़ों ग्राहकों के डेटा और व्यवहारिक पैटर्न के आधार पर वह अधिक सटीक और जिम्मेदार ऋण वितरण कर सकती है। इससे न केवल ग्राहकों को तेज और आसान ऋण मिलेगा,बल्कि वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालाँकि,नियामकीय आवश्यकताओं के तहत एयरटेल मनी ने स्पष्ट किया है कि उसे आरबीआई अधिनियम के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है,लेकिन केंद्रीय बैंक कंपनी की वित्तीय स्थिति या उसकी देनदारियों की वापसी की कोई गारंटी नहीं देता। यह स्पष्टीकरण निवेशकों और ग्राहकों को नियामकीय ढाँचे की प्रकृति समझाने के लिए दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरटेल का यह निवेश डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तीव्र करेगा। पहले से ही कई फिनटेक कंपनियाँ और बैंक इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। ऐसे में एयरटेल को अपने तकनीकी कौशल,डेटा एनालिटिक्स और ब्रांड भरोसे का लाभ उठाना होगा। कंपनी के पास देशभर में व्यापक नेटवर्क और विशाल ग्राहक आधार है, जो उसके लिए बड़ा अवसर भी है और जिम्मेदारी भी।
20,000 करोड़ रुपये का यह निवेश एयरटेल की रणनीतिक दिशा में एक बड़ा कदम है। टेलीकॉम सेवाओं से आगे बढ़कर वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति बनाना कंपनी के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है। यदि एयरटेल अपनी तकनीकी दक्षता, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक भरोसे को संतुलित रख पाती है,तो डिजिटल लेंडिंग के क्षेत्र में वह आने वाले वर्षों में एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभर सकती है।
