बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (तस्वीर क्रेडिट@dm_patna)

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: पहले चरण के नामांकन वापसी पूरी,कुल उम्मीदवारों की संख्या 1,314 हुई

नई दिल्ली,21 अक्टूबर (युआईटीवी)- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के नामांकन की वापसी की प्रक्रिया सोमवार को संपन्न हो गई। यह प्रक्रिया उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र वापस लेने का अंतिम अवसर प्रदान करती है। इस चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया 10 अक्टूबर से शुरू हुई थी और 17 अक्टूबर को पूरी हुई थी। उसके बाद निर्वाचन अधिकारियों ने 18 अक्टूबर को प्राप्त नामांकन की संवीक्षा की,ताकि केवल वैध नामांकन ही आगे की प्रक्रिया में शामिल हों। इसके बाद उम्मीदवारों को 20 अक्टूबर तक अपने नामांकन वापस लेने का अवसर दिया गया।

पहले चरण में कुल 18 जिलों के अंतर्गत 121 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। इस चरण में कुल 1,375 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे,जिनमें से 61 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस लेने का निर्णय लिया। इससे इस चरण में मैदान में कुल 1,314 उम्मीदवार बचे हैं। यह संख्या दर्शाती है कि पहले चरण का चुनाव काफी प्रतिस्पर्धात्मक होने जा रहा है और विभिन्न पार्टियों के उम्मीदवारों ने मतदाताओं का मन जीतने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है।

विशेष रूप से,कुढ़नी और मुजफ्फरपुर विधानसभा सीटों पर सबसे अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। दोनों सीटों पर 20-20 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं,जो इस क्षेत्र में चुनाव की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। वहीं,सबसे कम प्रतियोगिता वाले क्षेत्र भोरे,अलौली और परबत्ता विधानसभा सीटें हैं,जहाँ केवल 5-5 उम्मीदवार मैदान में हैं।

जिलेवार आँकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक नामांकन वापसी पटना जिले से हुई,जहाँ कुल 9 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए। इसके बाद दरभंगा जिले में 8,बेगूसराय में 7 और गोपालगंज में 6 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया। वैशाली जिले में 5,मुजफ्फरपुर में 4,जबकि सीवान,समस्तीपुर,नालंदा और बक्सर में 3-3 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस किया। मधेपुरा,खगड़िया और मुंगेर में 2-2 उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया,जबकि सहरसा,सारण,शेखपुरा और भोजपुर जिले में केवल एक-एक उम्मीदवार ने ऐसा किया।

पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों में कुल 149 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस जिले की पालीगंज विधानसभा में सबसे अधिक 14 उम्मीदवार चुनावी संघर्ष में शामिल हैं। पालीगंज विधानसभा की उच्च प्रतिस्पर्धा इस क्षेत्र में राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों की सक्रियता को दिखाती है। वहीं,भागलपुर जिले की 7 विधानसभा सीटों के लिए कुल 102 प्रत्याशी नामांकन में शामिल हैं। नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में कुल 21 उम्मीदवार चुनावी पर्चा दाखिल कर चुके हैं,जो इस क्षेत्र में मुकाबले की ताजगी और तीव्रता को दर्शाता है।

चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए यह स्पष्ट हो रहा है कि पहले चरण के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों ने उम्मीदवारों की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। इस चरण में उम्मीदवारों की संख्या,नामांकन और नाम वापसी के आँकड़ें यह संकेत दे रहे हैं कि चुनाव काफी प्रतिस्पर्धात्मक और रोचक होने वाला है।

पहले चरण के लिए मतदान की तिथि 6 नवंबर निर्धारित की गई है। इस चरण में जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए तैयार है। इस चरण के परिणाम अगले चरण के लिए राजनीतिक रणनीतियों और दलों की भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं,दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा और सभी चरणों के चुनावी नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएँगे। इससे बिहार विधानसभा चुनाव के अंतिम परिणामों की झलक एक साथ मिल सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि पहले चरण के चुनाव में उम्मीदवारों की संख्या और प्रतिस्पर्धा दर्शाती है कि जनता की पसंद और मतदाता जागरूकता पर राजनीतिक दलों का खास असर होगा। अधिक उम्मीदवार होने से मत विभाजन की संभावना बढ़ जाती है,जिससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ सकता है। साथ ही,निर्दलीय उम्मीदवार और छोटे दलों की भागीदारी चुनावी माहौल को और भी रोचक बना रही है।

इस चरण में पटना,मुजफ्फरपुर,भागलपुर और दरभंगा जैसे महत्वपूर्ण जिलों की विधानसभा सीटों पर मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है। इन जिलों की राजनीतिक गतिविधियों पर सभी दलों की नजर है और उम्मीदवारों की सक्रियता से चुनावी मैदान और भी गरमाया हुआ नजर आ रहा है।

इस प्रकार,पहले चरण के नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद राजनीतिक दल और उम्मीदवार आगामी मतदान की तैयारियों में जुट गए हैं। अब जनता के सामने अपने मताधिकार का प्रयोग करने का अवसर है और 6 नवंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान से बिहार की राजनीति में आगामी समय का रुख तय होगा। यह चरण न केवल राजनीतिक दलों की ताकत का आकलन करेगा,बल्कि आने वाले दूसरे चरण और अंतिम परिणामों की दिशा भी निर्धारित करेगा।

बिहार विधानसभा चुनाव का यह पहला चरण राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसकी परिणति पूरी राज्य की राजनीतिक तस्वीर को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगी। उम्मीदवारों की संख्या,नामांकन की वापसी और विधानसभा क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धा दर्शाती है कि इस बार चुनाव काफी रोचक और चुनौतीपूर्ण होने वाला है,जिसमें जनता की सक्रिय भागीदारी तय करेगी कि राज्य का राजनीतिक परिदृश्य किस दिशा में जाएगा।