बिलासपुर,5 नवंबर (युआईटीवी)- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मंगलवार को एक दर्दनाक रेल हादसे ने पूरे राज्य को दहला दिया। लालखदान के पास हावड़ा रूट पर एक पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसा इतना भयावह था कि पैसेंजर ट्रेन के कई डिब्बे पटरी से उतर गए और एक-दो डिब्बे मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गए। टक्कर के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई,यात्रियों में अफरातफरी का माहौल बन गया और आसपास के गाँवों से लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। इस हादसे में अब तक 11 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है,जबकि करीब 20 यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। मरने वालों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है,क्योंकि कई यात्री अब भी डिब्बों के मलबे में फँसे बताए जा रहे हैं।
हादसे की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन और स्थानीय जिला प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। रेस्क्यू टीम,एनडीआरएफ और रेलवे की मेडिकल यूनिट लगातार मौके पर जुटी हुई हैं। घायलों को तत्काल पास के अस्पतालों में भेजा गया है,जहाँ उनका इलाज जारी है। घायलों का इलाज बिलासपुर के सिम्स अस्पताल,रेलवे अस्पताल और अपोलो अस्पताल में किया जा रहा है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आसपास के सभी अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी है।
दुर्घटना के बाद रेलवे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई ट्रेनों का रूट डायवर्ट कर दिया है,ताकि अन्य ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित न हो। घटनास्थल पर रेल यातायात को रोक दिया गया है और ट्रैक की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं,रेलवे अधिकारियों का कहना है कि हादसे की सटीक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्राथमिक जाँच में संभावना जताई जा रही है कि सिग्नल फेल होने या मानवीय त्रुटि के कारण यह बड़ा हादसा हुआ।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) ने हादसे में मृत और घायल यात्रियों की सूची जारी की है। मृतकों में मथुरा भास्कर (55),चौरा भास्कर (50),शत्रुघ्न (50),गीता देबनाथ (30),मेहनिश खान (19),संजू विश्वकर्मा (35),सोनी यादव (25),संतोष हंसराज (60),रश्मि राज (34),ऋषि यादव (02) और तुलाराम अग्रवाल (60) शामिल हैं। इसके अलावा, 16 वर्षीय अराधना निषाद समेत कई घायलों का इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक कुछ यात्रियों की हालत बेहद गंभीर है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार,हादसा शाम करीब साढ़े पाँच बजे हुआ,जब पैसेंजर ट्रेन लालखदान स्टेशन पार कर रही थी। उसी समय सामने से आ रही मालगाड़ी तेज रफ्तार में ट्रैक पर आ गई। इससे पहले कि चालक कुछ समझ पाता,दोनों ट्रेनों के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कुछ डिब्बे हवा में उछलकर एक-दूसरे पर चढ़ गए। कई यात्री अपनी सीटों से गिर पड़े और कुछ लोग डिब्बों में फँस गए। हादसे के बाद आसमान में धूल और धुआँ फैल गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के गाँवों में लोग घरों से बाहर निकल आए। ग्रामीणों ने सबसे पहले मौके पर पहुँचकर घायल यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। कुछ लोगों ने अपने निजी वाहनों से घायलों को अस्पताल पहुँचाया। मौके पर राहत कार्य देर रात तक जारी रहा।
रेलवे प्रशासन ने हादसे के बाद तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं,ताकि यात्रियों के परिजन अपने प्रियजनों की जानकारी प्राप्त कर सकें। चंपा जंक्शन के लिए 808595652,रायगढ़ के लिए 975248560 और पेंड्रा रोड के लिए 8294730162 नंबर जारी किए गए हैं। इसके अलावा सीधे दुर्घटनास्थल से भी दो हेल्पलाइन नंबर 9752485499 और 8602007202 उपलब्ध कराए गए हैं। रेलवे ने बताया है कि ये सभी हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे सक्रिय रहेंगे,ताकि परिजनों को किसी भी तरह की असुविधा न हो और वे अफवाहों से बच सकें।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन से संपर्क किया। मुख्यमंत्री ने बिलासपुर जिलाधिकारी संजय अग्रवाल से वीडियो कॉलिंग के माध्यम से बातचीत की और राहत-बचाव कार्य की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा दी जाए और किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घोषणा की कि राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देगी।
हादसे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी गहरा दुख जताया है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुखद घटना है और राज्य के हर नागरिक का दिल इस समय पीड़ित परिवारों के साथ है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए राज्य सरकार और रेलवे प्रशासन से माँग की कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी तरह की कोताही न बरती जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस दुर्घटना की उच्चस्तरीय जाँच की जानी चाहिए,ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
इस हादसे ने एक बार फिर भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में रेल हादसों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। तकनीकी खामियाँ,सिग्नलिंग सिस्टम की कमजोरियाँ और ट्रैक के रखरखाव में लापरवाही जैसी समस्याएँ अक्सर इन हादसों की जड़ मानी जाती हैं। बिलासपुर हादसा भी इसी लापरवाही का परिणाम हो सकता है,हालाँकि इसकी पुष्टि जाँच रिपोर्ट के बाद ही हो पाएगी।
इस बीच,रेलवे बोर्ड ने हादसे की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दे दिए हैं। एक विशेष जाँच दल मौके पर पहुँच चुका है,जो तकनीकी पहलुओं की गहन समीक्षा करेगा। वहीं,केंद्रीय रेल मंत्री ने भी इस हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावित यात्रियों को हर संभव सहायता दी जाएगी और जाँच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।
बिलासपुर का यह हादसा छत्तीसगढ़ के इतिहास में दर्ज हो गया है। दर्दनाक दृश्य,चीख-पुकार और अपनों की तलाश में भटकते लोगों की आँखों में सिर्फ एक ही सवाल था—कब खत्म होंगे ये रेल हादसे? प्रशासन के अनुसार,सभी घायलों को बेहतर इलाज दिया जा रहा है और मलबे में फँसे यात्रियों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन रातभर जारी रहेगा।
यह हादसा न केवल कई परिवारों के जीवन को हमेशा के लिए बदल गया है,बल्कि एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि तकनीकी प्रगति के बावजूद सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। फिलहाल,पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है और देशभर से लोग इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। रेलवे और प्रशासन का कहना है कि राहत कार्य पूरी गति से जारी है और बहुत जल्द हादसे की असली वजह का खुलासा कर दिया जाएगा।
