नई दिल्ली,10 फरवरी (युआईटीवी)- बजट सत्र के दौरान संसद में लगातार जारी हंगामे के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर विपक्षी सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में महिला सांसदों ने न केवल सदन में हुए घटनाक्रम को “दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक” बताया है,बल्कि विपक्ष के आचरण को लोकसभा की गरिमा,मर्यादा और पवित्रता के खिलाफ करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग भी की है। यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है,जब बजट सत्र के दौरान लगातार व्यवधान,नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।
भाजपा की महिला सांसदों ने अपने पत्र की शुरुआत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की भूमिका की सराहना से की है। उन्होंने लिखा कि 4 फरवरी 2026 को माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जिस तरह से स्पीकर ने सदन की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने का प्रयास किया,उसके लिए वे गहरी कृतज्ञता और प्रशंसा व्यक्त करती हैं। महिला सांसदों ने कहा कि उस दिन न केवल पूरा सदन,बल्कि पूरा देश लोकसभा कक्ष के भीतर घटित एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण दृश्य का साक्षी बना।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि विपक्षी दलों के कुछ सदस्य न केवल सदन के वेल में घुस गए,बल्कि उन्होंने सदन की टेबल पर चढ़कर कागज फाड़े और उन्हें अध्यक्ष की ओर फेंका। महिला सांसदों के अनुसार,यह व्यवहार संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ था। उन्होंने यह भी कहा कि हालात तब और बिगड़ गए,जब कुछ विपक्षी महिला सदस्य आक्रामक रवैये के साथ हाथों में बैनर और तख्तियाँ लिए दूसरी ओर चली गईं।
भाजपा की महिला सांसदों ने पत्र में दावा किया कि विपक्षी सदस्य न केवल माननीय प्रधानमंत्री की सीट के आसपास पहुँच गए,बल्कि ट्रेजरी बेंच के भीतर तक चले गए, जहाँ वरिष्ठ मंत्री बैठते हैं। उनके अनुसार,यह एक ऐसा कदम था,जिसने सदन की सुरक्षा व्यवस्था और संसदीय शिष्टाचार दोनों पर सवाल खड़े कर दिए। पत्र में इस पूरे घटनाक्रम को “संसद के इतिहास के सबसे खेदजनक क्षणों में से एक” बताया गया है।
महिला सांसदों ने यह भी लिखा कि विपक्ष की ओर से किए गए इस गंभीर उकसावे के बावजूद उन्होंने अत्यधिक संयम बरता। उन्होंने कहा कि वे इस व्यवहार से बेहद उत्तेजित और आक्रोशित थीं,लेकिन अपने वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर उन्होंने किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की। उनके मुताबिक,अगर संयम नहीं बरता जाता, तो स्थिति और अधिक अप्रिय हो सकती थी,जिससे सदन की गरिमा को और गहरा आघात पहुँचता।
पत्र में आगे कहा गया है कि मामला उस समय और गंभीर हो गया,जब बाद में विपक्षी सांसद आक्रामक तरीके से लोकसभा अध्यक्ष के चैंबर की ओर बढ़े। महिला सांसदों ने दावा किया कि वे स्पीकर के चैंबर के भीतर से तेज आवाजें सुन सकती थीं,जिससे यह संकेत मिलता था कि वहाँ भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। उनके अनुसार, लोकसभा के पवित्र परिसर में घटनाओं का यह खतरनाक मोड़ सभी के लिए चिंता का विषय है।
भाजपा की महिला सांसदों ने चेतावनी देते हुए लिखा कि मौजूदा स्थिति के गंभीर और अप्रिय परिणाम हो सकते थे और यह हमारे संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे काले क्षणों में से एक बन सकता था। उन्होंने कहा कि संसद केवल एक इमारत नहीं है,बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश का प्रतीक है और ऐसे कृत्य उन मूल्यों को ठेस पहुँचाते हैं।
इसी संदर्भ में महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि वे नियमों के तहत उन विपक्षी सांसदों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें,जिन्होंने सदन के परिसर में इस तरह के “जघन्य कृत्य” किए हैं। उनके मुताबिक,ऐसी घटनाएँ न केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करती हैं,बल्कि जनता के विश्वास को भी कमजोर करती हैं। पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि सख्त कार्रवाई केवल अनुशासन कायम करने के लिए ही नहीं,बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए भी जरूरी है।
पत्र के अंत में भाजपा की महिला सांसदों ने ओम बिरला के नेतृत्व में अपना पूरा विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि पिछले लगभग सात वर्षों के कार्यकाल में स्पीकर ने लगातार लोकसभा की प्रतिष्ठा और प्रभावशीलता को बढ़ाने का प्रयास किया है। महिला सांसदों का कहना है कि अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला ने हमेशा निष्पक्षता दिखाई है और पार्टी संबद्धता की परवाह किए बिना सभी सदस्यों को समान अवसर दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा उनके नेतृत्व में सुरक्षित हाथों में है और सदन भाग्यशाली है कि उसके संरक्षक के रूप में ओम बिरला जैसे अनुभवी और संतुलित नेता हैं। महिला सांसदों ने उम्मीद जताई कि स्पीकर इस पूरे मामले में उचित निर्णय लेंगे और संसदीय मर्यादा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएंगे।
इस पत्र के सामने आने के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक तापमान और बढ़ने की संभावना है। विपक्ष पहले ही सरकार पर संसद में चर्चा से भागने और आवाज दबाने के आरोप लगाता रहा है,जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष पर जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में भाजपा की महिला सांसदों का यह पत्र बजट सत्र के दौरान चल रहे टकराव को एक नया मोड़ देता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या विपक्षी सांसदों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
