डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन (तस्वीर क्रेडिट@DeekshaKumari26)

‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का ट्रंप का न्योता,पुतिन के पास पहुँचा प्रस्ताव,क्रेमलिन ने पुष्टि की,वॉशिंगटन से बातचीत की उम्मीद

वाशिंगटन,20 जनवरी (युआईटीवी)- अमेरिका की ओर से प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर वैश्विक कूटनीति में नई हलचल तेज हो गई है। क्रेमलिन ने दावा किया है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बोर्ड में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। रूस ने साफ किया है कि वह इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रहा है और इससे जुड़े सभी पहलुओं पर स्पष्टता के लिए वॉशिंगटन से बातचीत की उम्मीद करता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है,जब यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पश्चिमी देशों से बड़े पैमाने पर कूटनीतिक अलगाव का सामना कर रहा है और वैश्विक मंचों पर उसकी भूमिका लगातार विवादों में रही है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों को इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राष्ट्रपति पुतिन को कूटनीतिक माध्यमों से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का ऑफर मिला है। रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक,पेस्कोव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मास्को इस प्रस्ताव का बारीकी से अध्ययन कर रहा है और सभी शर्तों तथा दायरे को समझने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस अमेरिकी पक्ष से संपर्क की उम्मीद कर रहा है ताकि इस बोर्ड की भूमिका,संरचना और अधिकारों को लेकर कोई अस्पष्टता न रहे।

बताया जा रहा है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक शांति योजना का हिस्सा है,जिसका दूसरा चरण अब शुरू होने वाला है। इस योजना का पहला चरण अक्टूबर 2025 में पूरा हुआ था,जब इजरायल और हमास के बीच संघर्ष को थामने के लिए मिस्र,कतर,अमेरिका और तुर्की ने मध्यस्थता की थी। उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब एक स्थायी अंतर्राष्ट्रीय निगरानी और समन्वय तंत्र बनाने की बात की जा रही है,जिसे ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का नाम दिया गया है। इस बोर्ड का उद्देश्य न केवल गाजा संघर्ष की निगरानी करना है,बल्कि भविष्य में अन्य वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए भी इसे एक मंच के रूप में विकसित किया जाना है।

रूस के लिए यह न्योता कई मायनों में अहम माना जा रहा है। यूक्रेन पर हमले के बाद से रूस को अमेरिका और यूरोपीय देशों ने बड़े पैमाने पर प्रतिबंधों और राजनीतिक अलगाव का सामना कराया है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर रूस की भूमिका सीमित हुई है और पश्चिमी देशों के साथ उसके संबंध सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए हैं। ऐसे में ट्रंप की अगुवाई वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में रूस को शामिल होने का न्योता,कुछ विश्लेषकों के अनुसार,मास्को के लिए एक संभावित कूटनीतिक वापसी का रास्ता खोल सकता है,जबकि अन्य इसे अमेरिका की रणनीतिक चाल के रूप में देख रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गाजा के लिए एक तरह की ‘अम्ब्रेला ओवरसाइट बॉडी’ के तौर पर काम करेगा। इसकी अध्यक्षता स्वयं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे और इसमें दुनिया के विभिन्न हिस्सों से चुने गए राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। मिडिल ईस्ट के कई देशों के साथ-साथ दुनिया के अन्य क्षेत्रों के नेताओं को भी इसके लिए न्योता भेजा गया है। भारत के शामिल होने की भी पुष्टि हो चुकी है,जिसे इस पहल में एक महत्वपूर्ण वैश्विक भागीदार के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच रॉयटर्स ने एक खत और बोर्ड के ड्राफ्ट चार्टर की कॉपी के हवाले से दावा किया है कि इस बोर्ड की अध्यक्षता ट्रंप जीवन भर करेंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड का पहला फोकस गाजा संघर्ष को सुलझाने पर होगा और इसके बाद इसे अन्य अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों से निपटने के लिए विस्तारित किया जाएगा। चार्टर में यह भी उल्लेख है कि सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित रहेगा,जबकि स्थायी सदस्यता के लिए कथित तौर पर एक बिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा। इस प्रावधान ने कई राजनयिकों और विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है।

कई कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह का बोर्ड संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को कमजोर कर सकता है। उनका तर्क है कि यदि संघर्ष समाधान और शांति स्थापना जैसे अहम मुद्दों पर एक समानांतर अंतर्राष्ट्रीय ढाँचा खड़ा किया जाता है,तो इससे संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी एजेंसियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठ सकते हैं। कुछ राजनयिकों ने चेतावनी दी है कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ वैश्विक शासन प्रणाली में असंतुलन पैदा कर सकता है और शक्तिशाली देशों को अधिक प्रभाव देने का जरिया बन सकता है।

रूस की ओर से फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। क्रेमलिन का कहना है कि मास्को सभी पहलुओं का मूल्यांकन करेगा,जिसमें बोर्ड की वास्तविक शक्तियाँ,निर्णय लेने की प्रक्रिया और रूस की भूमिका शामिल होगी। यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह पहल वास्तव में शांति स्थापना के लिए है या फिर वैश्विक राजनीति में प्रभाव बढ़ाने का एक नया मंच।

ट्रंप द्वारा पुतिन को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि रूस इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं और यदि करता है,तो इसका वैश्विक शक्ति संतुलन और मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं पर क्या असर पड़ता है।