अहमदाबाद,9 अप्रैल (युआईटीवी)- देश की पहली हाईस्पीड रेल परियोजना, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन,तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रही है और इसके साथ ही निर्माण कार्य में नए-नए रिकॉर्ड भी स्थापित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में अहमदाबाद के मणिनगर क्षेत्र में 1360 मीट्रिक टन वजनी विशाल गर्डर को सफलतापूर्वक स्थापित कर एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि हासिल की गई है। यह कार्य न केवल तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था,बल्कि समय की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण था,जिसे महज साढ़े तीन घंटे में पूरा कर लिया गया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की जानकारी खुद अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा की। उन्होंने बताया कि इतना भारी गर्डर बेहद कम समय में स्थापित किया जाना भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता और समन्वय का शानदार उदाहरण है। उन्होंने इस कार्य से जुड़े सभी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सराहना भी की।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत स्थापित यह गर्डर अब तक के सबसे भारी प्रीकास्ट-प्रीस्ट्रेस्ड पोर्टल बीम में से एक माना जा रहा है। यह कंक्रीट से बना एक मजबूत ढाँचा है,जिसकी लंबाई लगभग 34 मीटर है और इसका क्रॉस-सेक्शन 5.5 मीटर गुणा 4.5 मीटर का है। इसे अहमदाबाद के मणिनगर रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक के ऊपर पोर्टल बीम के रूप में स्थापित किया गया है। इस स्थान पर ऐसे कुल पाँच बीम लगाने की योजना है,जिन्हें साइट पर ही तैयार किया जा रहा है और फिर बड़े इंटीग्रेटेड यूनिट के रूप में खड़ा किया जा रहा है।
इस पूरे ऑपरेशन को बेहद सटीक योजना और समन्वय के साथ अंजाम दिया गया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार,गर्डर की लांचिंग के दौरान रेलवे ट्रैफिक और बिजली आपूर्ति को अस्थायी रूप से पूरी तरह रोक दिया गया था,ताकि काम बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके। पहले इस तरह के काम के लिए कई महीनों तक चरणबद्ध तरीके से सावधानी बरतने की योजना होती थी,जिसमें करीब 9 घंटे तक ट्रैफिक रोकना पड़ता,लेकिन इस बार नई तकनीक और बेहतर समन्वय के कारण यह काम केवल 3.5 घंटे में पूरा कर लिया गया।
इस विशाल गर्डर को उठाने और स्थापित करने के लिए अत्याधुनिक मशीनों और भारी-भरकम उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। मुख्य रूप से 2200 मीट्रिक टन क्षमता वाले क्रॉलर क्रेन का उपयोग किया गया,जो इतनी भारी संरचना को उठाने में सक्षम है। इसके अलावा 260 टन और 80 टन क्षमता वाले अन्य क्रेन,मैन लिफ्टर मशीनें और विशेष एंकरिंग फ्रेम वाले लिफ्टिंग बीम सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया। इन सभी उपकरणों के संयोजन से यह जटिल कार्य सुरक्षित और सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के अनुसार,इस परियोजना के दौरान कई इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती इतने भारी यानी 1360 मीट्रिक टन वजनी गर्डर को उठाना और उसे सटीक स्थान पर स्थापित करना था। यह भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर में अब तक उठाए गए सबसे भारी वजनों में से एक है। इसके अलावा,समय की सीमा भी एक बड़ी चुनौती थी,क्योंकि पूरे ऑपरेशन को सीमित समय में पूरा करना आवश्यक था।
इस कार्य में 75 मिलीमीटर व्यास वाली प्रीस्ट्रेस्ड मैकलॉय रॉड का उपयोग किया गया,जो इतनी भारी संरचना को सुरक्षित रूप से उठाने में मदद करती है। इसके साथ ही लिफ्टिंग बीम और भारी-भरकम स्लिंग का भी इस्तेमाल किया गया,जिससे गर्डर को संतुलित तरीके से उठाकर सही स्थान पर स्थापित किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में इंजीनियरिंग की उच्चतम तकनीकों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत के बुनियादी ढाँचे में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली परियोजना मानी जा रही है। यह देश की पहली हाईस्पीड रेल परियोजना है,जो अत्याधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगी। इस परियोजना के पूरा होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।
गुजरात में इस परियोजना के तहत काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और कई हिस्सों में निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुँच चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि अगले साल 15 अगस्त तक इस परियोजना का संचालन शुरू कर दिया जाए। इसके लिए दिन-रात काम किया जा रहा है और हर चरण में नई तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस तरह की इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं,बल्कि यह भी दिखाती हैं कि देश बड़े और जटिल बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम है। अहमदाबाद में गर्डर की सफल स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है,जो आने वाले समय में और भी बड़े निर्माण कार्यों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना न केवल देश के परिवहन क्षेत्र को नई दिशा देने वाली है,बल्कि यह भारत को वैश्विक स्तर पर एक आधुनिक और विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हो रही है।
