डोनाल्ड ट्रंप और जस्टिन ट्रूडो (तस्वीर क्रेडिट@kaankit)

कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने दिया इस्तीफा,ट्रंप ने कनाडा को ’51वां राष्ट्र’ बनाने के ऑफर को फिर से दोहराया

वाशिंगटन,7 जनवरी (युआईटीवी)- कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के बाद अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने के अपने ऑफर को फिर से दोहराया है। अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का नाम हमेशा सुर्खियों में रहा है। वह अपने बयानों और फैसलों के लिए चर्चित रहे हैं, चाहे वह घरेलू राजनीति हो या अंतर्राष्ट्रीय संबंध। हाल ही में,ट्रंप ने एक बार फिर से कनाडा को अमेरिका का ‘51वां राज्य’ बनाने का प्रस्ताव दिया है,जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। यह बयान तब आया है,जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो सत्ता से बाहर हो चुके हैं और यह टिप्पणी ट्रंप द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के संदर्भ में की गई थी।

कनाडा और अमेरिका के बीच लंबे समय से दोस्ताना और स्थिर रिश्ते रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार,सुरक्षा और विदेश नीति पर कई सहयोगात्मक पहलुओं पर चर्चा की जाती रही है। हालाँकि,यह रिश्ता कभी-कभी दोनों देशों के नेताओं के निजी दृष्टिकोण पर भी निर्भर करता है। विशेष रूप से,जब से डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति बने थे, उन्होंने अपने कई बयानों से कनाडा के साथ अपने संबंधों को लेकर विवादों को जन्म दिया था।

78 वर्षीय डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच जस्टिन ट्रूडो के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद फिर से कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने का प्रस्ताव दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर कहा कि कनाडा के बहुत से लोग अमेरिका का हिस्सा बनना पसंद करेंगे और अब संयुक्त राज्य अमेरिका उस व्यापार घाटे और सब्सिडी को सहन नहीं कर सकता,जिनकी कनाडा को जरूरत है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर कनाडा अमेरिका के साथ जुड़ता है,तो टैरिफ नहीं होंगे,टैक्स कम हो जाएँगे और वह रूस एवं चीन के जहाजों से पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इसके साथ ही,ट्रंप ने ट्रूडो के प्रशासन पर अवैध प्रवास और मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने में विफलता का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि यह समस्या बनी रही,तो वह कनाडा पर 25 प्रतिशत शुल्क लगा देंगे।

ट्रंप ने पहले भी कनाडा को ‘51वां राज्य’ बनाने का प्रस्ताव दिया था और अब वह इसे फिर से दोहरा रहे हैं। उनका यह बयान तब आया है,जब जस्टिन ट्रूडो कनाडा के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि यदि कनाडा को अमेरिका के साथ मिलकर एक नया राष्ट्र बनाना हो,तो यह उनके लिए एक ‘विकसित और शांति की दिशा में बढ़ने वाला’ कदम होगा।

उनका यह बयान एक प्रकार से कनाडा की राजनीति में एक बड़ा संदेश था। ट्रंप का यह प्रस्ताव कनाडा की संप्रभुता पर सवाल उठाने जैसा था,क्योंकि कनाडा एक स्वतंत्र और समृद्ध राष्ट्र है। इस प्रस्ताव ने न केवल कनाडा के नागरिकों को बल्कि पूरी दुनिया को भी चौंका दिया,क्योंकि यह किसी भी अंतर्राष्ट्रीय समझौते के विपरीत था और इसका उद्देश्यमूलक रूप से अमेरिका की वैश्विक शक्ति को प्रकट करना था।

जब डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को ‘51वां राज्य’ बनाने का प्रस्ताव दिया,तो इसका प्रभाव केवल कनाडा तक ही सीमित नहीं था। यह बयान अमेरिकी राजनीति,अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और दुनिया भर में एक महत्वपूर्ण संकेत माना गया। ऐसे बयान यह दर्शाते हैं कि ट्रंप का दृष्टिकोण हमेशा ही अमेरिका की श्रेष्ठता पर केंद्रित रहा है।

कनाडा के लिए यह एक अभूतपूर्व प्रस्ताव था,क्योंकि इससे उसकी राष्ट्रीय पहचान और संप्रभुता पर सीधा हमला था। कनाडा के नेताओं ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इसे एक राजनीतिक शोहरत प्राप्त करने का प्रयास बताया। कनाडा की जनता ने भी इस टिप्पणी को नकारात्मक रूप से लिया और इसे अमेरिकी दखलअंदाजी के रूप में देखा।

ट्रंप का यह बयान क्या केवल एक मजाक था या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति छिपी हुई है? यह सवाल उठना स्वाभाविक है। ट्रंप की राजनीति हमेशा विवादित और चौंकाने वाली रही है और इस तरह के बयानों का उद्देश्य शायद अपने राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाना हो सकता है। उनके लिए यह एक तरीका हो सकता है, ताकि वह कनाडा और अन्य देशों के बीच अपनी स्थिति को मजबूत कर सकें और अपने समर्थकों के बीच अधिक लोकप्रियता प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा,यह संभव है कि ट्रंप ने यह बयान केवल अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए दिया हो,ताकि उनके नाम को फिर से चर्चा में लाया जा सके। ट्रंप की शैली में,कभी-कभी उनके बयानों के पीछे एक गहरी रणनीति हो सकती है, जो उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देती हो।

कनाडा के नेताओं ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया और कहा कि कनाडा का भविष्य पूरी तरह से कनाडा के लोगों के हाथ में है,न कि अमेरिका के। कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में जस्टिन ट्रूडो ने हमेशा कनाडा की संप्रभुता और स्वतंत्रता को महत्व दिया है और उनके द्वारा सत्ता से हटने के बाद भी कनाडा के राजनीतिक दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है। कनाडा की राजनीतिक स्थिरता और दुनिया में उसकी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए,कनाडा ने हमेशा अपने रिश्तों में संतुलन बनाए रखा है और वह अमेरिका से अलग भी अपनी पहचान को बनाए रखना चाहता है।

डोनाल्ड ट्रंप का कनाडा को ’51वां राज्य’ बनाने का प्रस्ताव एक बड़ा राजनीतिक बयान था,जिसने दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरीं। हालाँकि,यह बयान पूरी तरह से एक राजनीतिक रणनीति हो सकता है,फिर भी इसने कनाडा की संप्रभुता और राष्ट्रीय पहचान को चुनौती दी है। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप और उनके समर्थक इस प्रकार के बयानों का प्रयोग कैसे करते हैं और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।