केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, सीएए ‘सौम्य कानून’ है, असम समझौते का उल्लंघन नहीं करता

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर (युआईटीवी/आईएएनएस)- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) ‘एक सौम्य कानून’ है, जो विशिष्ट देशों के विशिष्ट समुदायों को स्पष्ट कटौती के साथ छूट प्रदान करना चाहता है- ऑफ डेट और अदालत से इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया। केंद्र ने जोर देकर कहा कि सीएए अवैध प्रवास को प्रोत्साहित नहीं करता है, क्योंकि यह एक ‘केंद्रित कानून’ है जो केवल छह निर्दिष्ट समुदायों के सदस्यों को नागरिकता प्रदान करता है जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले आए थे।

गृह मंत्रालय ने 150 पृष्ठों के हलफनामे में कहा : “यह प्रस्तुत किया गया है कि सीएए कानून का एक सौम्य टुकड़ा है, जो स्पष्ट कट-ऑफ तारीख के साथ निर्दिष्ट देशों के विशिष्ट समुदायों को एक माफी की प्रकृति में छूट प्रदान करना चाहता है।”

“यह प्रस्तुत किया गया है कि सीएए एक विशिष्ट संशोधन है जो निर्दिष्ट देशों में प्रचलित एक विशिष्ट समस्या से निपटने का प्रयास करता है, अर्थात निर्दिष्ट देशों में निर्विवाद लोकतांत्रिक संवैधानिक स्थिति के आलोक में धर्म के आधार पर उत्पीड़न, ऐसे राज्यों के व्यवस्थित कामकाज और डर की धारणा जो उक्त देशों में वास्तविक स्थिति के अनुसार अल्पसंख्यकों में प्रचलित हो सकती है।”

प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित और न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी सीएए को चुनौती देने वाली 200 से अधिक याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई करेंगे, जिनमें ज्यादातर जनहित याचिकाएं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *